निश्चय ही पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं। हम स्वयं प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इसी असंतुलन से भूमि, वायु, जल और ध्वनि के प्रदूषण उत्पन्न हो रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण से फेफड़ों के रोग, हृदय और पेट की बीमारियाँ, देखने और सुनने की क्षमता में कमी, मानसिक तनाव आदि बीमारियाँ पैदा हो रही हैं। हम सभी जानते हैं कि धरती पर जीवन प्रकृति संतुलन से ही संभव हो सकता है। प्राकृतिक वनस्पतियों से से ढक न जाए इसलिए घास खाने वाले प्रयाप्त संख्या में थे। घास खाने वाले जानवरों की संख्या को सीमित रखने के लिए हिंसक जंतु भी थे। इन तीनों का अनुपात संतुलित और नियंत्रित था अधुनिक युग में वैज्ञानिक आविष्कारों और उद्योग धंधों के विकास फैलाव के साथ साथ जनसंख्या का भी भयावह विस्फोट हुआ है। बढ़ती आबादी की अपनी भोजन, वस्त्र और आवास की समस्याएँ हैं जिनकी पूर्ति के लिए धरती के संचित संसाधनों का अंधाधुंध बेरहमी से दोहन किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर वन काटे जा रहे हैं। खेती करने, घर बनाने, कल कारखाने लगाने, सड़कें और रेल की पटरियाँ बिछाने के लिए भूमि चाहिए। सिंचाई और बिजली की आपूर्ति करने के लिए नदियों और झरनों के स्वाभाविक प्रवाहों को मोड़, बदल और रोककर बड़े बड़े बाँध बनाए जाते हैं, जिससे जंगल जलमग्न होते हैं। इमारती लकड़ी और कच्चे माल के लिए गत पचास वर्षों से वनों की कटाई इतनी तेजी से हुई है कि वनों और पशु–पक्षियों का सफाया हो गया है। दूसरी ओर रासायनिक उर्वरकों कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव ने भूमि को उसर, दूषित और विषैला बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्यकर और शुद्ध अनाज तथा फल–सब्जियाँ दुर्लभ हो गई हैं।
Q1.पर्यावरण प्रदूषण की समस्त आपदाएं किसकी बनाई हुई है?
A. ईश्वर
B. मनुष्य ✓
C. प्रकृति
D. उद्योग
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Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार 'पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं' अर्थात मनुष्य द्वारा बनाई हुई हैं।
Q2.पर्यावरण प्रदूषण से मनुष्य किस तरह की समस्याओं से जूझ रहा है?
A. आर्थिक
B. शारीरिक एवं मानसिक ✓
C. धार्मिक
D. सामाजिक
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश में फेफड़ों के रोग, हृदय व पेट की बीमारियाँ, देखने-सुनने की क्षमता में कमी (शारीरिक) तथा मानसिक तनाव (मानसिक) का उल्लेख है, अतः शारीरिक एवं मानसिक समस्याएँ।
Q3.धरती पर जीवन कैसे संभव है ?
A. धार्मिक संतुलन से
B. उद्योग संतुलन से
C. प्रकृति संतुलन से ✓
D. मुद्रा संतुलन से
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश में स्पष्ट है 'धरती पर जीवन प्रकृति संतुलन से ही संभव हो सकता है'।
Q4.उद्योग धंधों के विकास से निम्नलिखित में से किसका भयावह विस्फोट हुआ है ?
A. बम विस्फोट
B. जनसंख्या विस्फोट ✓
C. विद्युत विस्फोट
D. ज्वालामुखी विस्फोट
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार वैज्ञानिक आविष्कारों और उद्योग धंधों के विकास के साथ-साथ 'जनसंख्या का भी भयावह विस्फोट हुआ है'।
Q5.बढ़ती आबादी के कारण धरती के संचित संसाधनों का क्या किया जा रहा है ?
A. शोधन
B. प्रबन्धन
C. दोहन ✓
D. संरक्षण
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश के अनुसार बढ़ती आबादी के कारण 'धरती के संचित संसाधनों का अंधाधुंध बेरहमी से दोहन किया जा रहा है'।
निश्चय ही पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं। हम स्वयं प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इसी असंतुलन से भूमि, वायु, जल और ध्वनि के प्रदूषण उत्पन्न हो रहे हैं। पर्यावरण प्रदूषण से फेफड़ों के रोग, हृदय और पेट की बीमारियाँ, देखने और सुनने की क्षमता में कमी, मानसिक तनाव आदि बीमारियाँ पैदा हो रही हैं। हम सभी जानते हैं कि धरती पर जीवन प्रकृति संतुलन से ही संभव हो सकता है। बढ़ती आबादी की भोजन, वस्त्र और आवास की समस्याओं की पूर्ति के लिए धरती के संचित संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। खेती करने, घर बनाने, कल कारखाने लगाने, सड़कें और रेल की पटरियाँ बिछाने के लिए भूमि चाहिए। सिंचाई और बिजली की आपूर्ति करने के लिए नदियों और झरनों के स्वाभाविक प्रवाहों को मोड़, बदल और रोककर बड़े बड़े बाँध बनाए जाते हैं, जिससे जंगल जलमग्न होते हैं। दूसरी ओर रासायनिक उर्वरकों कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव ने भूमि को उसर, दूषित और विषैला बना दिया है।
Q6.नदियों और झरनों के स्वाभाविक प्रवाहों को मोड़कर बड़े-बड़े बनाए जा रहे है ?
A. बाँध ✓
B. फ्लाईओवर
C. कारखाने
D. इमारतें
Show answer & explanation
Correct answer: A
गद्यांश के अनुसार नदियों और झरनों के प्रवाहों को मोड़, बदल और रोककर 'बड़े बड़े बाँध बनाए जाते हैं'।
निश्चय ही पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं। हम स्वयं प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। इमारती लकड़ी और कच्चे माल के लिए गत पचास वर्षों से वनों की कटाई इतनी तेजी से हुई है कि वनों और पशु–पक्षियों का सफाया हो गया है। दूसरी ओर रासायनिक उर्वरकों कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव ने भूमि को उसर, दूषित और विषैला बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्यकर और शुद्ध अनाज तथा फल–सब्जियाँ दुर्लभ हो गई हैं।
Q7.पचास वर्षा से वनों की कटाई तेज गति से होने का प्रमुख कारण है–
A. कल–कारखाने लगाना
B. इमारती लकडी ✓
C. बाँध बनाना
D. पर्यावरण प्रदूषण रोकना
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश में 'इमारती लकड़ी और कच्चे माल के लिए गत पचास वर्षों से वनों की कटाई इतनी तेजी से हुई है' — अतः इमारती लकड़ी प्रमुख कारण है।
निश्चय ही पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं। हम स्वयं प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहे हैं। बढ़ती आबादी की अपनी भोजन, वस्त्र और आवास की समस्याएँ हैं जिनकी पूर्ति के लिए धरती के संचित संसाधनों का अंधाधुंध बेरहमी से दोहन किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर वन काटे जा रहे हैं।
Q8.भोजन, वस्त्र और आवास की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं किसके कारण ?
A. वैज्ञानिक आविष्कार
B. बाँधों का निर्माण
C. बढ़ती आबादी ✓
D. वनों का कटाव
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश के अनुसार 'बढ़ती आबादी की अपनी भोजन, वस्त्र और आवास की समस्याएँ हैं'।
निश्चय ही पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं। सिंचाई और बिजली की आपूर्ति करने के लिए नदियों और झरनों के स्वाभाविक प्रवाहों को मोड़, बदल और रोककर बड़े बड़े बाँध बनाए जाते हैं, जिससे जंगल जलमग्न होते हैं।
Q9.जंगल जलमग्न क्यों हो जाते है ?
A. बहुमंजिला इमारतें बनाए जाने के कारण
B. बाँध बनाए जाने के कारण ✓
C. कल-कारखाने लगाए जाने के कारण
D. नदियों में ज्यादा पानी भर जाने के कारण
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार बड़े-बड़े बाँध बनाए जाते हैं 'जिससे जंगल जलमग्न होते हैं'।
Q10.बाँध बनाए जाने का मुख्य कारण कौन सा है ?
A. पर्यावरण की सुन्दरता के लिए
B. सिंचाई और बिजली की आपूर्ति के लिए ✓
C. पानी की आपूर्ति के लिए
D. पर्यावरण के संतुलन के लिए
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार 'सिंचाई और बिजली की आपूर्ति करने के लिए ... बड़े बड़े बाँध बनाए जाते हैं'।
निश्चय ही पर्यावरण को विकृत और दूषित करने वाली समस्त आपदाएँ हमारी अपनी ही बनाई हुई हैं। दूसरी ओर रासायनिक उर्वरकों कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव ने भूमि को उसर, दूषित और विषैला बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्यकर और शुद्ध अनाज तथा फल–सब्जियाँ दुर्लभ हो गई हैं।
Q11.रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव ने भूमि को कैसा बना दिया है ?
A. उपजाऊ
B. ऊसर ✓
C. उर्वरक
D. ऊबड़-खाबड़
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार छिड़काव ने 'भूमि को उसर, दूषित और विषैला बना दिया है' — उसर अर्थात बंजर/अनुपजाऊ।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन–दिन अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी। इंग्लैण्ड के एक विद्वान को युवावस्था में राज–दरबारियों में जगह नहीं मिली। इसपर जिन्दगी भर वह अपने भाग्य को सराहता रहा। बहुत से लोग तो इसे अपना बड़ा भारी दुर्भाग्य समझते, पर वह अच्छी तरह जानता था कि वहाँ वह बुरे लोगों की संगति में पड़ता जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होते। बहुत–से लोग ऐसे होते हैं, जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, क्योंकि उतने ही बीच में ऐसी–ऐसी बातें कही जाती हैं जो कानों में न पड़नी चाहिए, चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं, जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है। बुराई अटल भाव धारण करके बैठती है, बुरी बातें हमारी धारणा में बहुत दिनों तक टिकती हैं। इस बात को प्रायः सभी लोग जानते हैं कि भद्दे व फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं, उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं। एक बार एक मित्र ने मुझसे कहा कि उसने लड़कपन में कहीं से बुरी कहावत सुनी थी, जिसका ध्यान वह लाख चेष्टा करता है कि न आए, पर बार–बार आता है। जिन भावनाओं को हम दूर रखना चाहते हैं, जिन बातों को हम याद करना नहीं चाहते, वे बार–बार हृदय में उठती हैं और बेधती हैं। अतः तुम पूरी चौकसी रखो, ऐसे लोगों को साथी न बनाओ जो अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से तुम्हें हँसाना चाहें। सावधान रहो। ऐसा न हो कि पहले–पहल तुम इसे एक बहुत सामान्य बात समझो और सोचो कि एक बार ऐसा हुआ, फिर ऐसा न होगा। अथवा तुम्हारे चरित्र बल का ऐसा प्रभाव पड़ेगा कि ऐसी बातें बकनेवाले आगे चलकर आप सुधर जाएँगे। नहीं, ऐसा नहीं होता है।
Q12.निम्नलिखित में से कुसंग का अर्थ है–
A. बुरी संगति ✓
B. संगति
C. सद्गति
D. दुर्गति
Show answer & explanation
Correct answer: A
कुसंग = कु (बुरा) + संग (संगति) अर्थात बुरी संगति; गद्यांश भी बुरी संगति के दुष्प्रभाव की चर्चा करता है।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन–दिन अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी। बहुत–से लोग ऐसे होते हैं, जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, क्योंकि उतने ही बीच में ऐसी–ऐसी बातें कही जाती हैं जो कानों में न पड़नी चाहिए, चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं, जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है।
Q13.कुसंगति से नाश होता है–
A. मन–मस्तिष्क का
B. नीति और सद्वृत्ति का ✓
C. सामर्थ्य का
D. शारीरिक शान्ति का
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश में स्पष्ट है 'यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है'। अतः कुसंगति से नीति और सद्वृत्ति का नाश होता है।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन–दिन अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी। अतः तुम पूरी चौकसी रखो, ऐसे लोगों को साथी न बनाओ जो अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से तुम्हें हँसाना चाहें।
Q14.'सत्संग' शब्द का विलोमार्थी है:
A. बुराई
B. भलाई
C. सुसंगति
D. कुसंग ✓
Show answer & explanation
Correct answer: D
सत्संग (अच्छी संगति) का विलोम कुसंग (बुरी संगति) है।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। इस बात को प्रायः सभी लोग जानते हैं कि भद्दे व फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं, उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं। एक बार एक मित्र ने मुझसे कहा कि उसने लड़कपन में कहीं से बुरी कहावत सुनी थी, जिसका ध्यान वह लाख चेष्टा करता है कि न आए, पर बार–बार आता है।
Q15.लड़कपन में बालकों का ध्यान किस से आकर्षित होता है–
A. सत्संग
B. कथा–प्रवचन
C. सिनेमा
D. भद्दे–फूहड़ गीत ✓
Show answer & explanation
Correct answer: D
गद्यांश के अनुसार 'भद्दे व फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं, उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं' — अतः बालकों का ध्यान भद्दे–फूहड़ गीतों से शीघ्र आकर्षित होता है।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। इंग्लैण्ड के एक विद्वान को युवावस्था में राज–दरबारियों में जगह नहीं मिली। इसपर जिन्दगी भर वह अपने भाग्य को सराहता रहा। बहुत से लोग तो इसे अपना बड़ा भारी दुर्भाग्य समझते, पर वह अच्छी तरह जानता था कि वहाँ वह बुरे लोगों की संगति में पड़ता जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होते।
Q16.आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होती है–
A. अच्छे लोगों की संगति
B. बुरे लोगों की संगति ✓
C. संतों की संगति
D. भक्तों की संगति
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार विद्वान बुरे लोगों की संगति में पड़ता 'जो उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक होते'।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। बहुत–से लोग ऐसे होते हैं, जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, क्योंकि उतने ही बीच में ऐसी–ऐसी बातें कही जाती हैं जो कानों में न पड़नी चाहिए, चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं, जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है। बुराई अटल भाव धारण करके बैठती है, बुरी बातें हमारी धारणा में बहुत दिनों तक टिकती हैं।
Q17.बुरी बातों का चित्त पर प्रभाव पड़ने से होता है–
A. स्वास्थ्य का क्षय
B. मानसिक संताप
C. पवित्रता का नाश ✓
D. बुद्धि का ह्रास
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश के अनुसार 'चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं, जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है'।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। अतः तुम पूरी चौकसी रखो, ऐसे लोगों को साथी न बनाओ जो अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से तुम्हें हँसाना चाहें। अथवा तुम्हारे चरित्र बल का ऐसा प्रभाव पड़ेगा कि ऐसी बातें बकनेवाले आगे चलकर आप सुधर जाएँगे।
Q18.किस प्रकार के बल के कारण मनुष्य कुसंगति का शिकार होने से बच जाता है–
A. शारीरिक बल
B. बौद्धिक बल
C. चारित्रिक बल ✓
D. आध्यात्मिक बल
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश में 'तुम्हारे चरित्र बल का ऐसा प्रभाव पड़ेगा' — चारित्रिक बल से मनुष्य कुसंगति से बच सकता है।
कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। अतः तुम पूरी चौकसी रखो, ऐसे लोगों को साथी न बनाओ जो अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से तुम्हें हँसाना चाहें। सावधान रहो।
Q19.लड़कपन में किस तरह के साथियों से सावधान रहना चाहिए–
A. पढ़ाई में कमजोर
B. चापलूस
C. अश्लील, अपवित्र विचार वाले ✓
D. अनुशासनहीन
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश के अनुसार ऐसे लोगों को साथी न बनाओ 'जो अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से तुम्हें हँसाना चाहें'।
Q20.'पूरी चौकसी' सी रखना मुहावरे का सही अर्थ क्या है ?
A. खड़े रहना
B. सावधान रहना ✓
C. तैयार रहना
D. निर्भय रहना
Show answer & explanation
Correct answer: B
'पूरी चौकसी रखना' का अर्थ है पूर्णतः सतर्क/सावधान रहना; गद्यांश में आगे 'सावधान रहो' भी कहा गया है।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। यदि फल दूर ही पर दिखाई पड़े, उसकी भावना के साथ ही उसका लेशमात्र भी कर्म या प्रयत्न के साथ लगाव न मालूम हो तो हमारे हाथ–पाँव कभी न उठें और उस फल के साथ हमारा संयोग ही न हो। इससे कर्म श्रृंखला की पहली कड़ी पकड़ते ही फल के आनंद की भी कुछ अनुभूति होने लगती है। यदि हमें यह निश्चय हो जाए की अमुक स्थान पर जाने से हमें किसी प्रिय व्यक्ति का दर्शन होगा तो उस निश्चय के प्रभाव से हमारी यात्रा भी अत्यंत प्रिय हो जाएगी। हम चल पड़ेंगे और हमारे अंगों की प्रत्येक गति में प्रफुल्लता दिखाई देगी। यही प्रफुल्लता कठिन–से–कठिन कर्मों के साधन में ही देखी जाती है। ये कर्म भी प्रिय हो जाते हैं और अच्छे लगने लगते हैं। जब तक फल तक पहुँचनेवाला कर्म–पथ अच्छा न लगेगा तब तक केवल फल का अच्छा लगना कुछ नहीं। फल की इच्छा मात्र हृदय में रखकर जो प्रयत्न किया जाएगा वह अभावमय और आनंदशून्य होने के कारण निर्जीव–सा होगा। कर्म–रुचि शून्य प्रयत्न में कभी–कभी इतना उतावलापन और आकुलता होती है कि मनुष्य साधना के उत्तरोत्तर क्रम का निर्वाह न कर सकने के कारण बीच ही में चूक जाता है। मान लीजिए कि एक ऊँचे पर्वत के शिखर पर विचरते हुए किसी व्यक्ति को नीचे बहुत दूर तक गई हुई सीढ़ियाँ दिखाई दी और यह मालूम हुआ कि नीचे उतरने पर सोने का ढेर मिलेगा। यदि उसमें इतनी सजीवता है कि उक्त सूचना के साथ ही वह उस स्वर्ण–राशि के साथ एक प्रकार के मानसिक संयोग का अनुभव करने लगा तथा उसका चित्त प्रफुल्ल और अंग सचेष्ट हो गए, उसे एक–एक सीढ़ी स्वर्णमयी दिखाई देगी। एक–एक सीढ़ी उतरने में उसे आनंद मिलता जाएगा, एक–एक क्षण उसे सुख से बीतता हुआ जान पड़ेगा और यह प्रसन्नता के साथ स्वर्णराशि तक पहुँचेगा। इस प्रकार उसके प्रयत्न–काल को भी फल–प्राप्ति काल के अंतर्गत ही समझना चाहिए। इसके विरुद्ध यदि उसका हृदय दुर्बल होगा और उसमें इच्छामात्र ही उत्पन्न होकर रह जाएगी, तो अभाव के बोध के कारण उसके चित्त में यही होगा कि कैसे झट से नीचे पहुँच जाएँ उसे एक–एक सीढ़ी उतरना बुरा मालूम होगा और आश्चर्य नहीं कि वह या तो हारकर बैठ जाए या लड़खड़ाकर मुँह के बल गिर पड़े।
Q21.उत्साह की प्रेरणा से हमारे भीतर कौन–सा भाव पैदा होता है ?
A. जटिलता
B. सहजता
C. तत्परता ✓
D. आलस्य
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश के प्रथम वाक्य में 'जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है' — अतः उत्साह से तत्परता का भाव पैदा होता है।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। यदि फल दूर ही पर दिखाई पड़े, उसकी भावना के साथ ही उसका लेशमात्र भी कर्म या प्रयत्न के साथ लगाव न मालूम हो तो हमारे हाथ–पाँव कभी न उठें और उस फल के साथ हमारा संयोग ही न हो। फल की इच्छा मात्र हृदय में रखकर जो प्रयत्न किया जाएगा वह अभावमय और आनंदशून्य होने के कारण निर्जीव–सा होगा।
Q22.उत्साह किसकी मिली–जुली अनुभूति ह ?
A. दुःख और सुख
B. कर्म और फल ✓
C. राग और द्वेष
D. दया और धर्म
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार 'उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है'।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। यदि हमें यह निश्चय हो जाए की अमुक स्थान पर जाने से हमें किसी प्रिय व्यक्ति का दर्शन होगा तो उस निश्चय के प्रभाव से हमारी यात्रा भी अत्यंत प्रिय हो जाएगी। हम चल पड़ेंगे और हमारे अंगों की प्रत्येक गति में प्रफुल्लता दिखाई देगी।
Q23.हमारी यात्रा कब अत्यन्त प्रिय हो जाती है ?
A. सुन्दर स्थलों पर भ्रमण करने से
B. धार्मिक स्थलों पर जाने से
C. किसी प्रिय व्यक्ति के दर्शन होने से ✓
D. विदेश-भ्रमण करने से
Show answer & explanation
Correct answer: C
गद्यांश के अनुसार किसी प्रिय व्यक्ति के दर्शन के निश्चय के प्रभाव से 'हमारी यात्रा भी अत्यंत प्रिय हो जाएगी'।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। जब तक फल तक पहुँचनेवाला कर्म–पथ अच्छा न लगेगा तब तक केवल फल का अच्छा लगना कुछ नहीं। फल की इच्छा मात्र हृदय में रखकर जो प्रयत्न किया जाएगा वह अभावमय और आनंदशून्य होने के कारण निर्जीव–सा होगा।
Q24.जो प्रयत्न केवल फलप्राप्ति के लिए किया जाएगा वह होगा :
A. आनन्द / शून्य ✓
B. आनन्ददायक
C. परहित के लिए
D. सार्थक और महत्त्वपूर्ण
Show answer & explanation
Correct answer: A
गद्यांश के अनुसार केवल फल की इच्छा से किया गया प्रयत्न 'अभावमय और आनंदशून्य होने के कारण निर्जीव–सा होगा' — अर्थात आनन्दशून्य।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। कर्म–रुचि शून्य प्रयत्न में कभी–कभी इतना उतावलापन और आकुलता होती है कि मनुष्य साधना के उत्तरोत्तर क्रम का निर्वाह न कर सकने के कारण बीच ही में चूक जाता है।
Q25.कर्म रूचि–शून्य प्रयत्न में कभी–भी नहीं होनी चाहिए–
A. तत्परता
B. आकुलता ✓
C. व्याकुलता
D. अराजकता
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार कर्म-रुचि शून्य प्रयत्न में 'उतावलापन और आकुलता' होती है, जिससे मनुष्य चूक जाता है; अतः आकुलता नहीं होनी चाहिए।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। मान लीजिए कि एक ऊँचे पर्वत के शिखर पर विचरते हुए किसी व्यक्ति को नीचे बहुत दूर तक गई हुई सीढ़ियाँ दिखाई दी और यह मालूम हुआ कि नीचे उतरने पर सोने का ढेर मिलेगा। यदि उसमें इतनी सजीवता है कि उक्त सूचना के साथ ही वह उस स्वर्ण–राशि के साथ एक प्रकार के मानसिक संयोग का अनुभव करने लगा तथा उसका चित्त प्रफुल्ल और अंग सचेष्ट हो गए।
Q26.मनुष्य को कर्म करने से पूर्व / किसी विशेष लाभ की प्राप्ति की सूचना होती है, तो उसका चित्त कैसा हो जाता है ?
A. दुर्बल
B. प्रफुल्लित ✓
C. विरक्त
D. निश्चिय
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार सोने के ढेर की सूचना मिलने पर 'उसका चित्त प्रफुल्ल और अंग सचेष्ट हो गए' — अर्थात चित्त प्रफुल्लित हो जाता है।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। यदि फल दूर ही पर दिखाई पड़े, उसकी भावना के साथ ही उसका लेशमात्र भी कर्म या प्रयत्न के साथ लगाव न मालूम हो तो हमारे हाथ–पाँव कभी न उठें और उस फल के साथ हमारा संयोग ही न हो।
Q27.मनुष्य प्रायः कर्म किस विकल्प की इच्छा से करता है ?
A. फल ✓
B. कर्म
C. धर्म
D. मन
Show answer & explanation
Correct answer: A
गद्यांश के अनुसार मनुष्य फल की भावना/इच्छा से कर्म करता है; फल के साथ संयोग की आशा से ही हाथ-पाँव उठते हैं।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। यही प्रफुल्लता कठिन–से–कठिन कर्मों के साधन में ही देखी जाती है। ये कर्म भी प्रिय हो जाते हैं और अच्छे लगने लगते हैं।
Q28.कठिन से कठिन कर्म की साधना में कौन–सा भाव निहित होता है ?
A. प्रसन्नता
B. प्रफुल्लता ✓
C. सुन्दरता
D. तत्परता
Show answer & explanation
Correct answer: B
गद्यांश के अनुसार 'यही प्रफुल्लता कठिन–से–कठिन कर्मों के साधन में ही देखी जाती है'।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। जब तक फल तक पहुँचनेवाला कर्म–पथ अच्छा न लगेगा तब तक केवल फल का अच्छा लगना कुछ नहीं। ये कर्म भी प्रिय हो जाते हैं और अच्छे लगने लगते हैं।
Q29."जब तक फल तक पहुँचने वाला कर्म–पथ अच्छा न लगेगा तब तक केवल फल का अच्छा लगना कुछ नही?" इस वाक्य में कर्म–पथ का क्या आशय है?
A. कर्म से मुक्ति
B. कर्म की प्राप्ति
C. कर्म से आशक्ति
D. कर्म करने का सही मार्ग ✓
Show answer & explanation
Correct answer: D
'कर्म–पथ' अर्थात कर्म करने का मार्ग/रास्ता — फल तक पहुँचने हेतु अपनाया जाने वाला सही मार्ग।
उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली–जुली अनुभूति है जिसकी प्रेरणा से तत्परता आती है। इसके विरुद्ध यदि उसका हृदय दुर्बल होगा और उसमें इच्छामात्र ही उत्पन्न होकर रह जाएगी, तो अभाव के बोध के कारण उसके चित्त में यही होगा कि कैसे झट से नीचे पहुँच जाएँ उसे एक–एक सीढ़ी उतरना बुरा मालूम होगा और आश्चर्य नहीं कि वह या तो हारकर बैठ जाए या लड़खड़ाकर मुँह के बल गिर पड़े।
Q30.'हार कर बैठ जाना' क्या है ?
A. मुहावरा ✓
B. लोकोक्ति
C. कहावत
D. सूक्ति
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Correct answer: A
'हार कर बैठ जाना' एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है निराश होकर प्रयत्न छोड़ देना।
Q31.निम्नलिखित मुहावरों का उनके अर्थों के साथ मिलान कीजिए— A. ऊधो चक्कर होना I. दुःखी दिखाना; B. रोनी सूरत बनाना II. आरम्भ करना; C. श्री गणेश करना III. भाग जाना; D. मन में गाँठ होना IV. मनमुटाव होना
A. A-IV, B-III, C-II, D-I
B. A-III, B-I, C-II, D-IV ✓
C. A-IV, B-II, C-I, D-III
D. A-I, B-III, C-IV, D-II
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Correct answer: B
ऊधो चक्कर होना = भाग जाना (III); रोनी सूरत बनाना = दुःखी दिखाना (I); श्री गणेश करना = आरम्भ करना (II); मन में गाँठ होना = मनमुटाव होना (IV)। अतः A-III, B-I, C-II, D-IV।
Q32.निम्नलिखित मुहावरे का अभिप्राय क्या है ? किंकर्तव्य विमूढ़ होना–
A. निरुतर होना
B. असमंजस की स्थिति ✓
C. आश्चर्य चकित होना
D. घबरा जाना
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Correct answer: B
'किंकर्तव्यविमूढ़' का अर्थ है क्या करूँ क्या न करूँ की उलझन — अर्थात असमंजस की स्थिति में होना।
Q33.निम्नलिखित में से कौन–सा शब्द 'तलवार' का पर्यायवाची नहीं है ?
A. तड़ाग ✓
B. कृपाण
C. चन्द्रहास
D. खड्ग
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Correct answer: A
कृपाण, चन्द्रहास, खड्ग — तलवार के पर्यायवाची हैं; 'तड़ाग' का अर्थ तालाब है, अतः वह तलवार का पर्यायवाची नहीं है।
Q34.निम्नलिखित में से इन्द्र का पर्यायवाची है :
A. कर्मेन्द्र
B. सुरेन्द्र ✓
C. शैलेन्द्र
D. क्षेमेन्द्र
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Correct answer: B
सुरेन्द्र (सुर + इन्द्र = देवताओं का राजा) इन्द्र का पर्यायवाची है। शैलेन्द्र = पर्वतराज (हिमालय)।
Q35.निम्नलिखित में से कौन सा शब्द 'किसान' का पर्याय नहीं है–
A. हलधर
B. विषधर ✓
C. कृषक
D. कर्षक
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Correct answer: B
हलधर, कृषक, कर्षक — किसान के पर्यायवाची हैं; 'विषधर' का अर्थ साँप है, अतः वह किसान का पर्याय नहीं है।
Q36.निम्नलिखित वाक्यों को क्रमानुसार व्यवस्थित करके सही वाक्य बनाइए: A. त्यौहार B. संस्कृति के C. देश की सभ्यता और D. भारत के E. दर्पण हैं
A. A B C D E
B. D A C B E ✓
C. E D A B C
D. C E D B A
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Correct answer: B
सही वाक्य: 'भारत के (D) त्यौहार (A) देश की सभ्यता और (C) संस्कृति के (B) दर्पण हैं (E)' — अतः क्रम D A C B E।
Q37.निम्नलिखित शब्दों का विलोमार्थी शब्दों से मिलान कीजिए— सूची I: A. तामसिक B. ग्राह्य C. कृत्रिम D. अंतरंग ; सूची II: I. नैसर्गिक II. बहिरंग III. सात्विक IV. त्याज्य
A. A-III, B-IV, C-I, D-II ✓
B. A-III, B-IV, C-II, D-I
C. A-IV, B-I, C-II, D-III
D. A-III, B-II, C-I, D-IV
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Correct answer: A
तामसिक × सात्विक (III); ग्राह्य × त्याज्य (IV); कृत्रिम × नैसर्गिक (I); अंतरंग × बहिरंग (II)। अतः A-III, B-IV, C-I, D-II।
Q38.निम्नलिखित शब्दों का विलोमार्थी शब्दों से मिलान कीजिए— सूची I: A. अपनति B. अधुनातन C. आविर्भाव D. धृष्ट ; सूची II: I. पुरातन II. तिरोभाव III. विनीत IV. उन्नति । नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
A. A-I, B-IV, C-III, D-II
B. A-IV, B-I, C-II, D-III ✓
C. A-IV, B-III, C-I, D-II
D. A-III, B-IV, C-II, D-I
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Correct answer: B
अपनति × उन्नति (IV); अधुनातन × पुरातन (I); आविर्भाव × तिरोभाव (II); धृष्ट × विनीत (III)। अतः A-IV, B-I, C-II, D-III।
Q39.अनेक शब्दों के लिए एक शब्द चुनकर सही मिलान कीजिए— सूची I: A. जिसका उत्साह नष्ट हो गया हो। B. जिस धरती पर अन्न न उगाया जा सके। C. आधारहीन लोक प्रचलित कथा। D. चट्टानों का अपनी जगह से खिसकना ; सूची II: I. दंत कथा II. शिला–स्खलन III. हतोत्साहित IV. ऊसर । नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
A. A-IV, B-III, C-II, D-I
B. A-III, B-IV, C-I, D-II ✓
C. A-I, B-IV, C-III, D-II
D. A-I, B-II, C-III, D-IV
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Correct answer: B
उत्साह नष्ट = हतोत्साहित (III); अन्न न उगाई जा सकने वाली धरती = ऊसर (IV); आधारहीन प्रचलित कथा = दंत कथा (I); चट्टानों का खिसकना = शिला–स्खलन (II)। अतः A-III, B-IV, C-I, D-II।
Q40.अनेक शब्दों के लिए एक शब्द चुनकर सही मिलान कीजिए— सूची I: A. जो स्त्री कविता लिखती हो B. आंतरिक ज्ञान प्राप्त करने की शक्ति C. मन का किसी वस्तु या भाव की ओर झुकाव D. जिसमें केवल हड्डियाँ ही बची रह गई हो ; सूची II: I. अंतर्दृष्टि II. अस्थिशेष III. कवयित्री IV. प्रवृत्ति । नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
A. A-III, B-IV, C-II, D-I
B. A-II, B-III, C-IV, D-I
C. A-III, B-I, C-IV, D-II ✓
D. A-III, B-II, C-I, D-IV
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Correct answer: C
कविता लिखने वाली स्त्री = कवयित्री (III); आंतरिक ज्ञान की शक्ति = अंतर्दृष्टि (I); मन का झुकाव = प्रवृत्ति (IV); केवल हड्डियाँ शेष = अस्थिशेष (II)। अतः A-III, B-I, C-IV, D-II।
Original question paper source: National Testing Agency (NTA), CUET (UG) 2022. Reproduced for educational use. Answers & explanations by UniDrill.