अलंकार
अलंकार is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- अलंकार का अर्थ है आभूषण — जैसे आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, वैसे ही अलंकार काव्य/भाषा की शोभा बढ़ाते हैं। ये शब्दों या अर्थ में चमत्कार उत्पन्न करते हैं।
- अलंकार के दो मुख्य भेद हैं — शब्दालंकार (शब्दों की ध्वनि/रचना पर आधारित : अनुप्रास, यमक, श्लेष) और अर्थालंकार (अर्थ पर आधारित : उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति आदि)।
- CUET में पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार पहचानना पूछा जाता है। हर अलंकार की एक पहचान-चिह्न होती है।
- परीक्षा-सत्य: +5 / −1। पहचान-चिह्न (जैसे, सी, मानो, सा) देखकर अलंकार पहचानो; उपमा-रूपक-उत्प्रेक्षा के भेद पर सावधान रहो।
भाग 1 — शब्दालंकार
| अलंकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुप्रास | एक ही वर्ण की आवृत्ति | "चारु चंद्र की चंचल किरणें" (च की आवृत्ति) |
| यमक | एक शब्द की आवृत्ति, भिन्न अर्थ | "कनक कनक ते सौ गुनी" (कनक = धतूरा/सोना) |
| श्लेष | एक शब्द, एक बार प्रयुक्त, अनेक अर्थ | "रहिमन पानी राखिए" (पानी = इज़्ज़त/चमक/जल) |
भाग 2 — अर्थालंकार (मुख्य)
| अलंकार | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| उपमा | जैसे/सी/सम/के समान (दो वस्तुओं की समानता) | "हरि-मुख मानहु… मुख कमल के समान" |
| रूपक | उपमेय पर उपमान का आरोप (बिना जैसे) | "चरण-कमल बंदौं हरि राई" (चरण ही कमल) |
| उत्प्रेक्षा | मानो/मनु/जनु/ज्यों (संभावना) | "मुख मानो चंद्र है" |
| अतिशयोक्ति | बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना | "हनुमान की पूँछ में लग न पाई आग, लंका सिगरी जल गई" |
| मानवीकरण | निर्जीव में मानवीय क्रिया | "लता-वधू ने पेड़ का सहारा लिया" |
| उपमेयोपमा | दोनों को परस्पर उपमान बनाना | "राम-सा राजा, राजा-सा राम" |
भाग 3 — उपमा के चार अंग (आधार समझें)
उपमा अलंकार में चार अंग होते हैं — इन्हें पहचानना रूपक/उत्प्रेक्षा से भेद में सहायक है:
- उपमेय — जिसकी तुलना हो (मुख)।
- उपमान — जिससे तुलना हो (कमल)।
- साधारण धर्म — समान गुण (सुंदरता/कोमलता)।
- वाचक शब्द — तुलना सूचक (जैसे, सा, सम, के समान)।
भाग 4 — उपमा बनाम रूपक बनाम उत्प्रेक्षा (निर्णायक भेद)
- उपमा : समानता दिखाई जाती है, "जैसे/सी" रहता है — मुख कमल के समान सुंदर है।
- रूपक : उपमेय को ही उपमान कह दिया जाता है, "जैसे" लुप्त — चरण-कमल (चरण ही कमल बन गया)।
- उत्प्रेक्षा : संभावना की जाती है, "मानो/मनु/जनु" रहता है — मुख मानो चंद्र है। तीनों में अंतर वाचक शब्द से तय होता है — जैसे/सी → उपमा; कोई वाचक नहीं, आरोप → रूपक; मानो/जनु → उत्प्रेक्षा।
भाग 5 — विधि (अलंकार कैसे पहचानें)
- वर्ण-आवृत्ति देखो — एक ही व्यंजन बार-बार? → अनुप्रास।
- शब्द-आवृत्ति देखो — एक ही शब्द दो बार भिन्न अर्थ में? → यमक। एक बार पर अनेक अर्थ? → श्लेष।
- वाचक शब्द खोजो — जैसे/सी → उपमा; मानो/जनु → उत्प्रेक्षा; आरोप → रूपक।
- अतिशयोक्ति/मानवीकरण — असंभव बढ़ा-चढ़ाव या निर्जीव में मानवीय क्रिया।
भाग 6 — हल किए हुए उदाहरण
- "चारु चंद्र की चंचल किरणें" → अनुप्रास (च की आवृत्ति)।
- "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय" → यमक।
- "रहिमन पानी राखिए" → श्लेष।
- "पीपर पात सरिस मन डोला" → उपमा (सरिस = समान)।
- "चरण-कमल बंदौं हरि राई" → रूपक।
- "उषा सुनहले तीर बरसती" → मानवीकरण।
- "मुख मानो चंद्रमा है" → उत्प्रेक्षा (मानो)।
- "हनुमान की पूँछ की आग से सारी लंका जल गई" → अतिशयोक्ति।
- "मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के" → मानवीकरण।
- "राम-सा राजा, राजा-सा राम" → उपमेयोपमा।
भाग 7 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)
- यमक बनाम श्लेष — यमक में शब्द दो बार आता है (भिन्न अर्थ); श्लेष में एक बार पर अनेक अर्थ।
- उपमा बनाम रूपक — "जैसे/सी" हो तो उपमा; आरोप (उपमेय ही उपमान) हो तो रूपक।
- रूपक बनाम उत्प्रेक्षा — रूपक में निश्चय (चरण ही कमल); उत्प्रेक्षा में संभावना (मानो कमल)।
- अनुप्रास बनाम यमक — अनुप्रास वर्ण की आवृत्ति; यमक शब्द की आवृत्ति।
भाग 8 — अलंकार पहचानने में वाचक-चिह्न क्यों निर्णायक है
अलंकार के प्रश्न देखने में जटिल लगते हैं, पर वास्तव में प्रत्येक अलंकार अपनी एक पहचान-चिह्न के साथ आता है, और उसी चिह्न को पकड़ लेने पर पहचान सरल हो जाती है। शब्दालंकारों में चिह्न ध्वनि/शब्द की पुनरावृत्ति है — यदि एक ही व्यंजन बार-बार आए तो अनुप्रास, यदि एक ही शब्द दो बार भिन्न अर्थ में आए तो यमक, और यदि एक ही शब्द एक बार आकर अनेक अर्थ दे तो श्लेष। अर्थालंकारों में सबसे निर्णायक चिह्न वाचक शब्द है, जो तीन सर्वाधिक भ्रामक अलंकारों — उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा — के बीच भेद कर देता है। यदि पंक्ति में "जैसे, सी, सम, सरिस, के समान" जैसा तुलना-सूचक शब्द हो, तो वह उपमा है, क्योंकि वहाँ दो वस्तुओं की समानता दिखाई जा रही है। यदि कोई वाचक शब्द न हो और उपमेय को सीधे उपमान कह दिया जाए (चरण ही कमल बन जाए), तो वह रूपक है, क्योंकि वहाँ अभेद-आरोप है। और यदि "मानो, मनु, जनु, ज्यों" जैसा संभावना-सूचक शब्द हो, तो वह उत्प्रेक्षा है, क्योंकि वहाँ केवल संभावना/कल्पना की जा रही है। इसलिए किसी भी अलंकार-प्रश्न में सबसे पहले पंक्ति में वाचक-चिह्न खोजिए; वह मिल जाए तो आधा उत्तर वहीं तय हो जाता है। शेष अलंकारों — अतिशयोक्ति (असंभव बढ़ा-चढ़ाव) और मानवीकरण (निर्जीव में मानवीय क्रिया) — की पहचान भी इसी प्रकार उनके स्वभाव से होती है। यह चिह्न-आधारित विधि अलंकार को रटने के बोझ से मुक्त कर तर्क का विषय बना देती है।
भाग 9 — इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें
शब्दालंकार (भाग 1) और अर्थालंकार (भाग 2) को उनके पहचान-चिह्न तथा उदाहरण सहित याद करें, उपमा के चार अंग (भाग 3) समझें, और उपमा-रूपक-उत्प्रेक्षा के निर्णायक भेद (भाग 4, 8) का विशेष अभ्यास करें, क्योंकि परीक्षा यहीं उलझाती है। हर काव्य-पंक्ति पढ़ते समय अलंकार पहचानने का अभ्यास करें।
एक पंक्ति का सार: अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं; शब्दालंकार ध्वनि/शब्द की आवृत्ति से (अनुप्रास, यमक, श्लेष) और अर्थालंकार वाचक-चिह्न से पहचानो — जैसे/सी (उपमा), आरोप (रूपक), मानो/जनु (उत्प्रेक्षा)।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.
Q1. "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून" — यहाँ 'पानी' शब्द एक ही बार आकर 'चमक', 'इज्जत' और 'जल' तीनों अर्थ दे रहा है। इस पंक्ति में अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
एक ही शब्द 'पानी' एक बार प्रयुक्त होकर अनेक अर्थ (चमक, सम्मान, जल) दे रहा है। एक शब्द के एक प्रयोग में अनेक अर्थ निकलने पर श्लेष अलंकार होता है।
Q2. "नभ मंडल छाया मरुस्थल-सा" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
▸ Show answer & explanation
Answer: D
यहाँ 'नभ मंडल' (उपमेय) की तुलना 'मरुस्थल' (उपमान) से 'सा' वाचक शब्द द्वारा की गई है। समानता दर्शाने वाले शब्द से तुलना होने पर उपमा अलंकार होता है।
Q3. "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो" में रतन रूपी राम-नाम धन की बात है। अब "उषा सुनहले तीर बरसाती" वाली शैली में — "लो यह लतिका भी भर लाई, मधु मुकुल नवल रस गागरी" — यहाँ लता को रस की गागर भर लाने वाली नायिका के रूप में दिखाया गया है। मुख्य अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
यहाँ जड़ 'लता' पर मानवीय क्रिया (नायिका की तरह रस की गागर भर लाना) का आरोप है। प्रकृति पर मानवीय आचरण आरोपित होने से मानवीकरण अलंकार होता है।
Q4. "दीरघ दाघ निदाघ के, जागत जामिनि जाम" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
इसमें 'द', 'ज' आदि वर्णों की आवृत्ति (दीरघ, दाघ, निदाघ; जागत, जामिनि, जाम) हुई है। एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने पर अनुप्रास अलंकार होता है।
Q5. "सुबरन को खोजत फिरत, कवि, कामी, अरु चोर" — यहाँ 'सुबरन' शब्द एक ही प्रयोग में कवि के लिए 'सुंदर वर्ण/अक्षर', कामी के लिए 'सुंदर स्त्री' और चोर के लिए 'सोना' — तीन अर्थ दे रहा है। अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
'सुबरन' शब्द एक ही बार प्रयुक्त होकर तीन भिन्न अर्थ (सुंदर वर्ण, सुंदर स्त्री, सोना) दे रहा है। एक शब्द के एक प्रयोग में अनेक अर्थ निकलने पर श्लेष अलंकार होता है।
Q6. "तीनों बेर खाती थीं, वे तीन बेर खाती हैं" — यहाँ 'बेर' शब्द एक बार 'समय/बार' और दूसरी बार 'बेर का फल' अर्थ में आया है। अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: C
'बेर' शब्द दो बार आया है — पहली बार 'बार/समय' (तीनों बार) और दूसरी बार 'बेर फल'। शब्द की आवृत्ति में भिन्न अर्थ होने पर यमक अलंकार होता है।
Q7. "बंदौ गुरु पद पदुम परागा" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
इसमें 'प' वर्ण की बार-बार आवृत्ति (पद, पदुम, परागा) हुई है। एक ही व्यंजन वर्ण की आवृत्ति होने पर अनुप्रास अलंकार होता है।
Q8. "मुख मयंक सम मंजु मनोहर" — इस पंक्ति में कौन-कौन से अलंकार हैं, परन्तु 'सम' शब्द के कारण प्रमुख अलंकार कौन-सा है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
यहाँ 'मुख' (उपमेय) की तुलना 'मयंक' अर्थात् चंद्रमा (उपमान) से 'सम' (समान) वाचक शब्द द्वारा की गई है। समानतावाचक शब्द से तुलना होने पर उपमा अलंकार होता है (साथ में 'म' की आवृत्ति से अनुप्रास भी है, पर 'सम' के कारण प्रमुख उपमा है)।
🔒 32 more questions
Attempt all 40 अलंकार questions in real NTA exam format with timer and instant scoring.
Start practice test →