अलंकार
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एक नज़र में
- अलंकार का अर्थ है आभूषण। जैसे गहने शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, वैसे अलंकार काव्य की भाषा और अर्थ की शोभा बढ़ाते हैं। मुख्य भेद दो हैं: शब्दालंकार (शब्द की ध्वनि या आवृत्ति पर टिके) और अर्थालंकार (अर्थ और तुलना पर टिके)।
- CUET में पंक्ति देकर अलंकार पूछा जाता है। साथ में लक्षण से अलंकार, सूची मिलान, उपमा के अंग और यमक-श्लेष या उपमा-रूपक जैसे भ्रमित जोड़ों का भेद भी आता है।
- कुंजी है पहचान-चिह्न: एक वर्ण दोहराया गया (अनुप्रास), एक शब्द दो बार अलग अर्थ में (यमक), एक शब्द के कई अर्थ साथ-साथ (श्लेष), जैसे-सा (उपमा), आरोप (रूपक), मानो-जनु (उत्प्रेक्षा)।
- इस पृष्ठ में निर्णय-तालिका, 14 हल सहित उदाहरण, भ्रम वाले जोड़ों का भेद, भूलों की तालिका और 16 प्रश्नों का तीव्र अभ्यास है।
भाग 1 — अलंकार क्या है और CUET इसे कैसे पूछता है
Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.
कविता केवल सूचना नहीं देती, वह भाव को चमकदार ढंग से कहती है। यह चमक दो तरह से आती है। या तो शब्दों की बनावट से (ध्वनि का दोहराव, एक शब्द का कई अर्थों में खेलना), या अर्थ की बनावट से (तुलना, कल्पना, बढ़ा-चढ़ाकर कहना, निर्जीव में जान डालना)। पहली को शब्दालंकार कहते हैं, दूसरी को अर्थालंकार। एक आसान जाँच है: यदि पंक्ति के किसी शब्द को उसके पर्यायवाची से बदलने पर अलंकार चला जाए तो वह शब्दालंकार है, और बना रहे तो अर्थालंकार।
| प्रश्न का रूप | कैसा दिखता है | क्या करना है |
|---|---|---|
| पंक्ति से अलंकार | काव्य-पंक्ति देकर चार नाम | पहचान-चिह्न खोजना |
| लक्षण से अलंकार | "उपमेय पर उपमान का आरोप" किसका लक्षण है? | लक्षण का मुख्य शब्द पकड़ना |
| सूची मिलान | अलंकार सूची I में, पंक्तियाँ सूची II में | हर पंक्ति पर निर्णय-तालिका लगाना |
| उपमा के अंग | उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक पहचानना | पंक्ति को चार भागों में बाँटना |
| भ्रमित जोड़े | यमक या श्लेष, उपमा या रूपक | भेद का निर्णायक शब्द याद रखना |
| वर्ग-प्रश्न | अनुप्रास किस वर्ग का है | शब्दालंकार या अर्थालंकार |
| सही कथन | अलंकार के बारे में कथन | लक्षण से मिलान |
भाग 2 — शब्दालंकार
| अलंकार | लक्षण | उदाहरण | पहचान |
|---|---|---|---|
| अनुप्रास | एक ही वर्ण (व्यंजन) या वर्णों की आवृत्ति | तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए | त की बार-बार आवृत्ति |
| यमक | एक शब्द दो या अधिक बार आए और हर बार अर्थ अलग हो | कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय (बिहारी) | कनक = धतूरा और सोना |
| श्लेष | एक शब्द के एक साथ कई अर्थ, जो सभी प्रसंग में बैठते हैं | रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून (रहीम) | पानी = चमक, इज़्ज़त, जल |
| पुनरुक्तिप्रकाश | एक ही शब्द दोहराया जाए, अर्थ वही रहे, भाव गहरा हो | मधुर-मधुर मेरे दीपक जल (महादेवी वर्मा) | शब्द दोहराव, अर्थ-भेद नहीं |
| वीप्सा | आश्चर्य, घृणा, शोक आदि दिखाने के लिए शब्द की आवृत्ति | छि: छि:! तुम्हें शर्म नहीं आती? | भाव के उद्गार के साथ आवृत्ति |
अनुप्रास के प्रकार. अनुप्रास का सामान्य अर्थ वर्ण-आवृत्ति है, पर परीक्षा में पाँच उपभेद पूछे जाते हैं। छेकानुप्रास में अनेक वर्णों की आवृत्ति केवल एक बार होती है। वृत्यनुप्रास में एक या अनेक वर्ण अनेक बार आते हैं। लाटानुप्रास में शब्द या वाक्यांश दोहराया जाता है और अर्थ वही रहता है, पर अन्वय बदलने से भाव बदल जाता है। श्रुत्यनुप्रास में एक ही उच्चारण-स्थान के वर्ण आते हैं, जैसे कंठ्य या तालव्य वर्ण। अंत्यानुप्रास में पंक्ति के अंत की तुक मिलती है, जैसे "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥" (तुलसीदास) में सागर-उजागर।
यमक और श्लेष का निर्णायक भेद. यमक में शब्द हर बार एक ही अर्थ में आता है और अलग-अलग स्थान पर अर्थ बदलता है (पहला कनक धतूरा, दूसरा कनक सोना)। श्लेष में एक ही स्थान पर शब्द के सारे अर्थ साथ-साथ काम करते हैं। इसलिए "रहिमन पानी राखिए" में पानी का अर्थ किसी एक जगह एक नहीं, तीनों अर्थ (चमक, इज़्ज़त, जल) एक साथ प्रसंग में लगते हैं। शब्द की गिनती से तय मत करो, यह देखो कि अर्थ हर बार अलग है (यमक) या एक साथ कई (श्लेष)।
भाग 3 — अर्थालंकार
| अलंकार | लक्षण | उदाहरण | पहचान |
|---|---|---|---|
| उपमा | उपमेय की उपमान से समानता बताई जाए | मुख चंद्रमा के समान सुंदर है | जैसे, सा, सी, से, सम, समान, सरिस |
| रूपक | उपमेय को उपमान ही कह दिया जाए, भेद मिट जाए | चरण-कमल बंदौं हरि राई | वाचक नहीं, अभेद-कथन |
| उत्प्रेक्षा | उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना | निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ (तुलसी) | मानो, जनु, मनु, जानो, मनहुँ |
| अतिशयोक्ति | किसी बात को लोक-सीमा से बहुत बढ़ाकर कहना | आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार; राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार | असंभव बढ़ाव |
| मानवीकरण | निर्जीव या प्रकृति में मानव के भाव और क्रियाएँ | मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना) | मेघ का बन-ठनकर आना |
| विरोधाभास | देखने में विरोध, पर अर्थ में सत्य | ज्यों-ज्यों बूड़े श्याम रंग त्यों-त्यों उज्ज्वल होय (बिहारी) | श्याम रंग में डूबे तो उज्ज्वल |
| संदेह | उपमेय में उपमान का संदेह बना रहे | सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है | कि, या, अथवा से संदेह का भाव |
| भ्रांतिमान | समानता के कारण एक को दूसरा समझ लेना | नाक का मोती अधर की कांति से, बीज दाड़िम का समझकर भ्रांति से | भूल से सचमुच दूसरा मान लेना |
| अन्योक्ति | बात किसी और के बहाने किसी और पर कही जाए | माली आवत देखकर कलियाँ करें पुकार | कलियाँ कहकर जीवों की बात |
| उपमेयोपमा | उपमेय और उपमान दोनों को बारी-बारी एक-दूसरे की उपमा देना | मुख चंद्र-सा सुंदर है, चंद्र मुख-सा | दोनों बारी-बारी उपमान |
उपमा के चार अंग. पंक्ति "सागर-सा गंभीर उसका मन" में चार चीज़ें हैं: उपमेय (जिसकी तुलना हो, मन), उपमान (जिससे तुलना हो, सागर), साधारण धर्म (दोनों में समान गुण, गंभीर), और वाचक शब्द (तुलना बताने वाला, सा)। चारों हों तो पूर्णोपमा कहलाती है। इनमें से कोई अंग न दिया हो तो लुप्तोपमा। रूपक और उत्प्रेक्षा में वाचक अलग रूप में दिखता है, इसीलिए वही निर्णायक है।
भाग 4 — निर्णय-तालिका (पंक्ति देखते ही पूछने वाले प्रश्न)
हर पंक्ति पर इन्हीं प्रश्नों को क्रम से पूछो। क्रम का तर्क यह है कि पहले सबसे आसानी से दिखने वाली चीज़ें (ध्वनि और शब्द की आवृत्ति) जाँची जाती हैं, फिर वाचक शब्द, फिर भाव की बनावट।
| क्रम | प्रश्न | हाँ तो | नहीं तो |
|---|---|---|---|
| 1 | क्या कोई वर्ण (व्यंजन) बार-बार आया है? | अनुप्रास (जाँच: कहीं यमक तो नहीं) | आगे |
| 2 | क्या कोई शब्द एक से अधिक बार आया और हर बार अर्थ अलग है? | यमक | आगे |
| 3 | क्या एक ही शब्द के एक साथ कई अर्थ लगते हैं? | श्लेष | आगे |
| 4 | क्या शब्द दोहराया गया है पर अर्थ वही है? | पुनरुक्तिप्रकाश या वीप्सा (उद्गार हो तो वीप्सा) | आगे |
| 5 | क्या जैसे, सा, सी, सम, सरिस जैसा तुलना-शब्द है? | उपमा | आगे |
| 6 | क्या मानो, जनु, मनु, जानो जैसा कल्पना-शब्द है? | उत्प्रेक्षा | आगे |
| 7 | क्या उपमेय को ही उपमान कह दिया गया (चरण = कमल)? | रूपक | आगे |
| 8 | क्या निर्जीव या प्रकृति मनुष्य की तरह चल, बोल या सोच रही है? | मानवीकरण | आगे |
| 9 | क्या बात बहुत बढ़ाकर, असंभव तक कह दी गई? | अतिशयोक्ति | आगे |
| 10 | क्या देखने में दो बातें टकराती हैं पर अर्थ में सही हैं? | विरोधाभास | आगे |
| 11 | क्या कि, या, अथवा से अनिश्चय बना है? | संदेह | आगे |
| 12 | क्या भूल से एक को दूसरा समझ लिया गया? | भ्रांतिमान | आगे |
| 13 | क्या बात किसी और के बहाने किसी और पर है? | अन्योक्ति | अन्य अलंकार देखो |
भाग 5 — उलझाने वाले जोड़ों का भेद
| जोड़ा | भेद का निर्णायक शब्द | उदाहरण |
|---|---|---|
| यमक / श्लेष | यमक में हर बार एक अर्थ, अलग-अलग; श्लेष में एक साथ कई | कनक कनक: यमक; पानी: श्लेष |
| अनुप्रास / यमक | अनुप्रास में वर्ण की आवृत्ति, यमक में शब्द की आवृत्ति और अर्थ-भेद | तट तमाल: अनुप्रास |
| उपमा / रूपक | उपमा में समानता और वाचक; रूपक में अभेद, वाचक नहीं | मुख चंद्र-सा: उपमा; मुख-चंद्र: रूपक |
| रूपक / उत्प्रेक्षा | रूपक में निश्चित अभेद; उत्प्रेक्षा में मानो-जनु से संभावना | चरण-कमल: रूपक; चरण मानो कमल: उत्प्रेक्षा |
| उपमा / उत्प्रेक्षा | उपमा में समानता का दावा; उत्प्रेक्षा में केवल कल्पना | कमल-सा नेत्र: उपमा; मानो कमल हो: उत्प्रेक्षा |
| रूपक / मानवीकरण | रूपक में एक वस्तु का दूसरी पर आरोप; मानवीकरण में निर्जीव पर मानव-क्रिया | जीवन-नौका: रूपक; नदी मुस्कुराई: मानवीकरण |
| संदेह / भ्रांतिमान | संदेह में उलझन बनी रहती है; भ्रांतिमान में एक को पक्का दूसरा मान लिया | यह मुख है या चंद्र: संदेह |
| पुनरुक्तिप्रकाश / वीप्सा | उद्गार, घृणा, शोक या आश्चर्य के साथ दोहराव हो तो वीप्सा | धीरे-धीरे पुनरुक्तिप्रकाश है; "छि: छि:!" वीप्सा है |
| विरोधाभास / अतिशयोक्ति | विरोधाभास में बात उल्टी दिखकर सच; अतिशयोक्ति में बात बढ़ा-चढ़ाई | बिहारी की श्याम रंग वाली पंक्ति: विरोधाभास |
भाग 6 — हल सहित उदाहरण
उदाहरण 1. "तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए" में अलंकार पहचानिए। हल: पंक्ति में त वर्ण बार-बार आया है: तरनि, तनूजा, तट, तमाल, तरुवर। कोई शब्द दोहराया नहीं गया और अर्थ-भेद नहीं है। उत्तर अनुप्रास।
उदाहरण 2. "कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय। वा खाये बौराय जग वा पाये बौराय॥" हल: कनक शब्द दो बार आया है। पहले कनक का अर्थ धतूरा, दूसरे का सोना। शब्द दोहराया और अर्थ बदला, इसलिए यमक। यदि अर्थ एक साथ कई हों तो श्लेष होता, यहाँ हर स्थान पर एक अर्थ है।
उदाहरण 3. "काली घटा का घमंड घटा।" हल: घटा दो बार आया है। पहले घटा का अर्थ बादल, दूसरे का कम हुआ। शब्द-आवृत्ति और अर्थ-भेद, अतः यमक।
उदाहरण 4. "रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून॥" हल: पानी के अर्थ तीनों प्रसंग में साथ चलते हैं: मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए इज़्ज़त, चूने के लिए जल। हर अर्थ एक साथ प्रसंग में बैठता है, इसलिए श्लेष।
उदाहरण 5. "मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।" के चारों अंग बताइए और अलंकार पहचानिए। हल: उपमेय मुख, उपमान चंद्रमा, साधारण धर्म सुंदर, वाचक के समान। चारों अंग मौजूद, इसलिए पूर्णोपमा (उपमा)।
उदाहरण 6. "चरण-कमल बंदौं हरि राई।" हल: चरण को कमल कहा गया है और कोई वाचक नहीं है। उपमेय में उपमान का अभेद आरोप है, इसलिए रूपक। यदि "चरण कमल-से कोमल" होता तो उपमा होती।
उदाहरण 7. "लता भवन ते प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ। निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ॥" हल: "जनु" कल्पना का वाचक है। दोनों भाइयों के निकलने में बादलों से निकले दो चंद्रमाओं की संभावना की गई है। उत्तर उत्प्रेक्षा।
उदाहरण 8. "आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार। राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार॥" हल: सोचने के क्षण भर में नदी पार कर लेना लोक-सीमा से बाहर की बात है। बढ़ा-चढ़ाकर कहने का भाव है, इसलिए अतिशयोक्ति।
उदाहरण 9. "मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।" हल: बादलों को अतिथि की तरह सज-धजकर आते दिखाया गया है। निर्जीव पर मनुष्य की क्रिया, इसलिए मानवीकरण।
उदाहरण 10. "या अनुरागी चित्त की गति समुझै नहिं कोय। ज्यों-ज्यों बूड़े श्याम रंग त्यों-त्यों उज्ज्वल होय॥" हल: श्याम रंग में डूबने से उज्ज्वल होना ऊपर से विरोध है, पर अर्थ में कृष्ण-भक्ति में मन के निर्मल होने की बात सही है। उत्तर विरोधाभास।
उदाहरण 11. "सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।" हल: यहाँ तय नहीं हो पा रहा कि साड़ी में नारी है या नारी में साड़ी। "कि" से अनिश्चय बना है। उत्तर संदेह।
उदाहरण 12. "मधुर-मधुर मेरे दीपक जल।" हल: शब्द "मधुर" दोहराया गया है, पर अर्थ दोनों बार वही है और केवल भाव गहरा किया गया है। उत्तर पुनरुक्तिप्रकाश। यमक नहीं, क्योंकि अर्थ-भेद नहीं है।
उदाहरण 13. "माला फेरत जुग भया फिरा न मन का फेर। कर का मन का डार दे मन का मनका फेर॥" (कबीर) हल: "मन का" और "मनका" में ध्वनि समान है। मन का = हृदय का, मनका = माला का दाना। ध्वनि की आवृत्ति के साथ अर्थ-भेद है, इसलिए यमक।
उदाहरण 14. "सागर-सा गंभीर उसका मन" में अलंकार और उपमा के अंग बताइए। हल: वाचक "सा" है, इसलिए उपमा। उपमेय मन, उपमान सागर, साधारण धर्म गंभीर, वाचक सा। चारों अंग हैं, इसलिए पूर्णोपमा।
भाग 7 — सामान्य भूलें
| भूल | क्यों लुभाती है | सही बात |
|---|---|---|
| शब्द दोहराया तो यमक कह देना | यमक का नाम सबसे पहले याद आता है | अर्थ-भेद देखो; अर्थ वही तो पुनरुक्तिप्रकाश |
| पानी जैसे शब्द की गिनती करके श्लेष को यमक मानना | शब्द कई बार आया है | कई अर्थ एक साथ हैं तो श्लेष |
| तुलना दिखी तो हमेशा उपमा | "सा" और "जैसे" सबसे चर्चित वाचक हैं | वाचक न हो और अभेद हो तो रूपक |
| मानो हो तो रूपक मान लेना | कल्पना भी रूपक जैसी लगती है | मानो, जनु हों तो उत्प्रेक्षा |
| अनुप्रास में स्वर की आवृत्ति को भी गिनना | ध्वनि की आवृत्ति एक-सी लगती है | अनुप्रास में व्यंजन-वर्ण की आवृत्ति |
| हर प्रकृति-चित्रण को मानवीकरण कहना | प्रकृति और मानव दोनों कविता में आते हैं | निर्जीव में मानवीय क्रिया या भाव हो तभी |
| अतिशयोक्ति को विरोधाभास | दोनों में बात अटपटी लगती है | विरोधाभास में बात अटपटी पर सच; अतिशयोक्ति में बात अविश्वसनीय |
| शब्दालंकार-अर्थालंकार का वर्ग उलटना | दोनों नाम मिलते-जुलते हैं | अनुप्रास, यमक, श्लेष शब्दालंकार; उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा अर्थालंकार |
भाग 8 — तीव्र अभ्यास (20 सेकंड प्रति पंक्ति)
| क्र. | पंक्ति या प्रश्न | अलंकार या उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | पीपर पात सरिस मन डोला | उपमा (सरिस = समान) |
| 2 | कमल-सा कोमल उसका हृदय | उपमा |
| 3 | वह तो चलता-फिरता विश्वकोश है | रूपक |
| 4 | मानो आकाश ने तारे बिखेर दिए हों | उत्प्रेक्षा |
| 5 | चंचल चपला चमकती चारों ओर | अनुप्रास (च की आवृत्ति) |
| 6 | पवन ने धीरे से फूलों के कान में कुछ कहा | मानवीकरण |
| 7 | घर-घर, धीरे-धीरे, बार-बार | पुनरुक्तिप्रकाश |
| 8 | उसकी भूख इतनी बढ़ी कि पूरा गाँव खाकर भी न मिटे | अतिशयोक्ति |
| 9 | पानी में मीन पियासी | विरोधाभास |
| 10 | यह मुख है या चंद्रमा? | संदेह |
| 11 | मुख-चंद्र | रूपक |
| 12 | हाय! हाय! यह क्या हो गया! | वीप्सा |
| 13 | अनुप्रास किस वर्ग का अलंकार है | शब्दालंकार |
| 14 | जो अलंकार बिना वाचक के उपमेय को उपमान कह दे | रूपक |
| 15 | जब शब्द दो बार आए और अर्थ भिन्न हों | यमक |
| 16 | उपमा के कितने अंग होते हैं | चार: उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक |
भाग 9 — अभ्यास-क्रम
| दिन | क्या करें | समय |
|---|---|---|
| 1 | भाग 2 की शब्दालंकार तालिका और यमक-श्लेष का भेद; हर अलंकार की एक अपनी पंक्ति लिखें | 25 मिनट |
| 2 | भाग 3 की अर्थालंकार तालिका पढ़ें और वाचक शब्दों की सूची कॉपी में लिखें | 25 मिनट |
| 3 | भाग 4 की निर्णय-तालिका बिना देखे लिखकर दोहराएँ | 20 मिनट |
| 4 | भाग 5 के जोड़ों के लिए अपनी-अपनी पंक्ति बनाएँ | 25 मिनट |
| 5 | भाग 6 के उदाहरण उत्तर ढककर हल करें | 25 मिनट |
| 6 | भाग 8 का तीव्र अभ्यास, 20 सेकंड प्रति पंक्ति | 15 मिनट |
| 7 | पाठ्यपुस्तक की कविताओं की 10 पंक्तियाँ लेकर अलंकार पहचानें; फिर प्रश्न-बैंक की समयबद्ध परीक्षा | 30 मिनट |
सबसे अच्छा अभ्यास यह है कि जो भी कविता पढ़ो, उसकी हर पंक्ति पर निर्णय-तालिका के पहले दो-तीन प्रश्न पूछ लो। एक सप्ताह में अलंकार अपने-आप दिखने लगते हैं।
भाग 10 — यह विषय कहाँ जुड़ता है
अलंकार काव्य के सौंदर्य का एक पक्ष है; दूसरा पक्ष भाव और लय है, जिसके लिए रस और छंद पढ़िए। अपठित काव्यांश में अलंकार के प्रश्न सीधे आते हैं, उनके लिए अपठित पद्यांश की विधि देखिए। शब्द के अर्थ-भेद की समझ अनेकार्थी शब्द से पक्की होती है, जो यमक और श्लेष के भेद में सीधे काम आती है।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.
Q1. "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून" — यहाँ 'पानी' शब्द एक ही बार आकर 'चमक', 'इज्जत' और 'जल' तीनों अर्थ दे रहा है। इस पंक्ति में अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
एक ही शब्द 'पानी' एक बार प्रयुक्त होकर अनेक अर्थ (चमक, सम्मान, जल) दे रहा है। एक शब्द के एक प्रयोग में अनेक अर्थ निकलने पर श्लेष अलंकार होता है।
Q2. "नभ मंडल छाया मरुस्थल-सा" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
▸ Show answer & explanation
Answer: D
यहाँ 'नभ मंडल' (उपमेय) की तुलना 'मरुस्थल' (उपमान) से 'सा' वाचक शब्द द्वारा की गई है। समानता दर्शाने वाले शब्द से तुलना होने पर उपमा अलंकार होता है।
Q3. "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो" में रतन रूपी राम-नाम धन की बात है। अब "उषा सुनहले तीर बरसाती" वाली शैली में — "लो यह लतिका भी भर लाई, मधु मुकुल नवल रस गागरी" — यहाँ लता को रस की गागर भर लाने वाली नायिका के रूप में दिखाया गया है। मुख्य अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
यहाँ जड़ 'लता' पर मानवीय क्रिया (नायिका की तरह रस की गागर भर लाना) का आरोप है। प्रकृति पर मानवीय आचरण आरोपित होने से मानवीकरण अलंकार होता है।
Q4. "दीरघ दाघ निदाघ के, जागत जामिनि जाम" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
इसमें 'द', 'ज' आदि वर्णों की आवृत्ति (दीरघ, दाघ, निदाघ; जागत, जामिनि, जाम) हुई है। एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने पर अनुप्रास अलंकार होता है।
Q5. "सुबरन को खोजत फिरत, कवि, कामी, अरु चोर" — यहाँ 'सुबरन' शब्द एक ही प्रयोग में कवि के लिए 'सुंदर वर्ण/अक्षर', कामी के लिए 'सुंदर स्त्री' और चोर के लिए 'सोना' — तीन अर्थ दे रहा है। अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
'सुबरन' शब्द एक ही बार प्रयुक्त होकर तीन भिन्न अर्थ (सुंदर वर्ण, सुंदर स्त्री, सोना) दे रहा है। एक शब्द के एक प्रयोग में अनेक अर्थ निकलने पर श्लेष अलंकार होता है।
Q6. "तीनों बेर खाती थीं, वे तीन बेर खाती हैं" — यहाँ 'बेर' शब्द एक बार 'समय/बार' और दूसरी बार 'बेर का फल' अर्थ में आया है। अलंकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: C
'बेर' शब्द दो बार आया है — पहली बार 'बार/समय' (तीनों बार) और दूसरी बार 'बेर फल'। शब्द की आवृत्ति में भिन्न अर्थ होने पर यमक अलंकार होता है।
Q7. "बंदौ गुरु पद पदुम परागा" — इस पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
इसमें 'प' वर्ण की बार-बार आवृत्ति (पद, पदुम, परागा) हुई है। एक ही व्यंजन वर्ण की आवृत्ति होने पर अनुप्रास अलंकार होता है।
Q8. "मुख मयंक सम मंजु मनोहर" — इस पंक्ति में कौन-कौन से अलंकार हैं, परन्तु 'सम' शब्द के कारण प्रमुख अलंकार कौन-सा है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
यहाँ 'मुख' (उपमेय) की तुलना 'मयंक' अर्थात् चंद्रमा (उपमान) से 'सम' (समान) वाचक शब्द द्वारा की गई है। समानतावाचक शब्द से तुलना होने पर उपमा अलंकार होता है (साथ में 'म' की आवृत्ति से अनुप्रास भी है, पर 'सम' के कारण प्रमुख उपमा है)।
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