अनेकार्थी व श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द
अनेकार्थी व श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 30 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- अनेकार्थी शब्द वे हैं जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं और सही अर्थ का निर्णय वाक्य का प्रसंग करता है, जैसे कनक = सोना भी, धतूरा भी; कर = हाथ, किरण, टैक्स, सूँड।
- CUET में दो तरह के प्रश्न आते हैं: शब्द के सभी अर्थ पहचानना, और वाक्य में रेखांकित शब्द का उस वाक्य में बैठने वाला अर्थ चुनना। कभी "इनमें अर्थ नहीं है" वाला प्रश्न भी आता है।
- कुंजी: प्रत्येक अर्थ को वाक्य में रखकर देखना (प्रतिस्थापन-परीक्षण) और सबसे प्रचलित अर्थ पर आँख मूँदकर न रुकना।
- अनेकार्थी शब्दों का ज्ञान काव्य के श्लेष अलंकार की पहचान में भी काम आता है, इसलिए यह पृष्ठ दो विषयों को एक साथ मज़बूत करता है।
भाग 1 — अनेकार्थी शब्द की समझ और प्रश्न का तरीका
Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.
शब्द के कई अर्थ क्यों होते हैं? संस्कृत में कई शब्द किसी वस्तु के गुण के आधार पर नाम बने, और एक ही गुण कई वस्तुओं में मिला, इसलिए एक शब्द कई वस्तुओं का नाम बन गया। "हरि" में हरने वाले का भाव भी है और भूरे-सुनहरे रंग का भी, इसीलिए वह विष्णु, इंद्र, सिंह, सूर्य, घोड़ा और बंदर, सबके लिए चल पड़ा। इसी तरह लोक में शब्द नए अर्थ भी लेते हैं: "पानी" का अर्थ जल है, पर आब (चमक) और इज़्ज़त भी हो गया। इसलिए अनेकार्थी शब्द हमें याद दिलाते हैं कि शब्दकोश-अर्थ अधूरा है, प्रसंग ही अर्थ तय करता है।
प्रश्न में फँसने के दो कारण। पहला, आप सबसे प्रचलित अर्थ पर रुक जाते हैं: "सोना" का अर्थ स्वर्ण याद है, पर वाक्य "बच्चा रात को जल्दी सोता है" में यह नींद है। दूसरा, आप केवल एक अर्थ जानते हैं, इसलिए दूसरा अर्थ विकल्प में आने पर पहचान नहीं पाते। इसलिए तैयारी में पहले शब्द के सब अर्थ पक्के करो, फिर प्रसंग से चुनना सीखो।
| चरण | क्या करें | क्यों |
|---|---|---|
| 1 | रेखांकित शब्द के जितने अर्थ याद हों, मन में सजा लो | विकल्पों में प्रायः कम प्रचलित अर्थ ही सही होता है |
| 2 | वाक्य के कर्ता, क्रिया और आसपास के संज्ञा-शब्द देखो | वे ही संकेत देते हैं (राजा, हाथी, सूर्य, खेत, काव्य) |
| 3 | हर विकल्प को शब्द की जगह रखकर वाक्य दोबारा पढ़ो (प्रतिस्थापन) | जो वाक्य बेतुका हो जाए, वह अर्थ ग़लत |
| 4 | एक से अधिक विकल्प बैठें तो वाक्य का भाव (धार्मिक, सैन्य, प्राकृतिक, शासकीय) देखो | भाव ही दो समान-से अर्थों में अंतर करता है |
| 5 | उत्तर चुनकर वाक्य एक बार फिर पढ़ो | सामान्य ग़लतियाँ पुनर्पाठ में पकड़ आ जाती हैं |
भाग 2 — CUET में अनेकार्थी के प्रश्न-प्रकार
| प्रकार | नमूना | हल का तरीका | कारण |
|---|---|---|---|
| सभी अर्थ | "कनक के अर्थ हैं" | उन अर्थों वाला विकल्प चुनो जो दोनों शामिल करे | शब्द के सभी अर्थ पक्के हों तभी पूरा विकल्प पहचाना जाता है |
| वाक्य में अर्थ | "पानी बचाओ, पानी रखो" में दोनों "पानी" | हर बार प्रसंग देखो | एक वाक्य में एक ही शब्द के दो अर्थ हो सकते हैं |
| अपवर्जन | "इनमें कौन 'कर' का अर्थ नहीं है" | हर विकल्प को "कर" का ज्ञात अर्थ मानकर जाँचो | तीन अर्थ सही और एक असंबंधित होता है |
| दो वाक्यों में एक शब्द | "दोनों वाक्यों में 'आम' का अर्थ" | वाक्य अलग-अलग पढ़ो | एक में फल, दूसरे में साधारण |
| श्लेष-संबंधित | "इस पंक्ति में किस शब्द में श्लेष है" | जिस शब्द के दो अर्थ दोनों जगह बैठें | श्लेष का आधार ही अनेकार्थी शब्द है |
भाग 3 — प्रकृति, पौराणिक और काव्य-प्रयुक्त अनेकार्थी शब्द
| शब्द | अर्थ | प्रयोग-वाक्य (अर्थ कोष्ठक में) |
|---|---|---|
| हरि | विष्णु, इंद्र, सिंह, सूर्य, घोड़ा, बंदर | हरि भक्तों के रक्षक हैं (विष्णु)। वन में हरि दहाड़ा (सिंह)। |
| अर्क | सूर्य, मदार (आक) का पौधा, रस या सत्त | अर्क की किरणें खेत पर पड़ीं (सूर्य)। वैद्य ने गुलाब का अर्क दिया (रस)। |
| कनक | सोना, धतूरा | कनक के कंगन चमक रहे थे (सोना)। कनक को खाने से नशा होता है (धतूरा)। |
| अंबर | आकाश, वस्त्र | अंबर में तारे चमके (आकाश)। उसने पीत अंबर पहना (वस्त्र)। |
| घन | बादल, हथौड़ा, घना, ठोस | घन गरजे और वर्षा हुई (बादल)। लोहार ने घन चलाया (हथौड़ा)। |
| जलज | कमल, शंख, मोती, मछली | सरोवर में जलज खिला था (कमल)। |
| पतंग | कागज़ की पतंग, पतंगा (कीट), पक्षी, सूर्य | बच्चे छत पर पतंग उड़ा रहे थे (पतंग)। पतंग दीपक पर मँडराया (कीट)। |
| नग | पर्वत, वृक्ष, रत्न या नगीना | हिमालय नगराज है (पर्वत)। अँगूठी में नग जड़ा था (रत्न)। |
| पय | दूध, जल | शिशु ने पय पिया (दूध)। नदी का पय निर्मल है (जल)। |
| सारंग | हिरन, मोर, बादल, हाथी, कमल | सारंग वन में कुलाँचे भर रहा था (हिरन)। |
| द्विज | ब्राह्मण, पक्षी, दाँत | द्विज प्रातः चहचहाने लगे (पक्षी)। द्विज ने यज्ञ कराया (ब्राह्मण)। |
| सोम | चंद्रमा, अमृत, सोमवार, एक वैदिक पेय | सोम की चाँदनी फैल गई (चंद्रमा)। आज सोम है (दिन)। |
| सुधा | अमृत, चूना | देवताओं ने सुधा का पान किया (अमृत)। दीवार पर सुधा पोती गई (चूना)। |
| मधु | शहद, वसंत, एक असुर | मधु से औषधि बनती है (शहद)। मधु ऋतु आ गई (वसंत)। |
| नाग | साँप, हाथी | नाग ने फन उठाया (साँप)। नाग वन में विचर रहा था (हाथी)। |
| गो | गाय, किरण, इंद्रिय, पृथ्वी | गो-सेवा पुण्य है (गाय)। सूर्य की गो फैली (किरण)। |
| हंस | हंस पक्षी, आत्मा, सूर्य | हंस मानसरोवर में तैरता है (पक्षी)। हंस उड़ गया, काया रह गई (आत्मा)। |
भाग 4 — जीवन और भाषा में रोज़ आने वाले अनेकार्थी शब्द
| शब्द | अर्थ | प्रयोग-वाक्य (अर्थ कोष्ठक में) |
|---|---|---|
| कर | हाथ, किरण, टैक्स, सूँड | उसने कर जोड़े (हाथ)। सरकार ने कर बढ़ाया (टैक्स)। हाथी ने कर उठाया (सूँड)। |
| काल | समय, मृत्यु, यमराज | काल किसी का सगा नहीं (मृत्यु)। यह काल बड़ा कठिन है (समय)। |
| पद | पैर, ओहदा, कविता की पंक्ति, शब्द | उसने पद छुए (पैर)। उन्हें उच्च पद मिला (ओहदा)। सूर के पद मधुर हैं (गीत)। |
| पानी | जल, चमक या आब, इज़्ज़त | खेत में पानी भरा है (जल)। रहीम ने पानी राखने की सीख दी (इज़्ज़त)। |
| बाल | केश, बच्चा, अनाज की बाली | उसने बाल कटवाए (केश)। बाल-मन चंचल होता है (बच्चा)। |
| कल | बीता हुआ दिन, आने वाला दिन, मशीन, चैन | कल वह आया था (बीता दिन)। बिना कल के चैन नहीं (चैन)। |
| चाल | गति, ढंग, चालाकी | उसकी चाल मस्त है (गति)। यह शत्रु की चाल है (चालाकी)। |
| फल | खाया जाने वाला फल, परिणाम, भाले या तीर की नोक | आम मीठा फल है (फल)। परिश्रम का फल मीठा होता है (परिणाम)। |
| हल | खेत जोतने का औज़ार, समाधान | किसान हल चला रहा है (औज़ार)। गणित का हल निकाला (समाधान)। |
| आम | एक फल, साधारण या सामान्य | उसे आम पसंद है (फल)। यह आम बात है (साधारण)। |
| तीर | बाण, किनारा | शिकारी का तीर निशाने पर लगा (बाण)। नदी के तीर पर मेला है (किनारा)। |
| उत्तर | जवाब, एक दिशा, बाद का | प्रश्न का उत्तर दो (जवाब)। हिमालय उत्तर में है (दिशा)। |
| सोना | स्वर्ण, नींद लेना | सोना महँगा हुआ (स्वर्ण)। बच्चा सोना चाहता है (नींद)। |
| अंक | गोद, संख्या, नाटक का भाग, चिह्न | माँ ने शिशु को अंक में लिया (गोद)। परीक्षा में अच्छे अंक आए (संख्या)। |
| राशि | ढेर, ज्योतिष की राशि, धनराशि | अन्न की राशि लगी थी (ढेर)। उसने बड़ी राशि दान की (धन)। |
| वंश | कुल या खानदान, बाँस | वह रघुवंश में जन्मा (कुल)। वंश से बाँसुरी बनती है (बाँस)। |
| बल | शक्ति, सेना | बल का प्रयोग मत करो (शक्ति)। शत्रु का बल भारी था (सेना)। |
| अर्थ | मतलब, धन, प्रयोजन | शब्द का अर्थ बताओ (मतलब)। अर्थ के बिना काम नहीं चलता (धन)। |
| दल | समूह या पार्टी, पंखुड़ी या पत्ता, सेना | फूल का दल कोमल है (पंखुड़ी)। खिलाड़ियों का दल जीता (समूह)। |
| पक्ष | ओर या तरफ़, पखवाड़ा, पंख | शुक्ल पक्ष में चाँद बढ़ता है (पखवाड़ा)। उसने मेरा पक्ष लिया (ओर)। |
| वार | दिन (सोमवार आदि), प्रहार, बार | रविवार का वार छुट्टी का है (दिन)। शत्रु ने पीछे से वार किया (प्रहार)। |
भाग 5 — भाव और दर्शन के अनेकार्थी शब्द
| शब्द | अर्थ | प्रयोग-वाक्य (अर्थ कोष्ठक में) |
|---|---|---|
| धर्म | कर्तव्य, पुण्य, स्वभाव, मत या मार्ग | पुत्र का धर्म सेवा करना है (कर्तव्य)। अग्नि का धर्म जलाना है (स्वभाव)। |
| माया | धन, भ्रम, छल | माया के पीछे मत भाग (धन)। संसार माया है (भ्रम)। |
| रस | स्वाद, द्रव या रस, काव्य का रस, आनंद | आम का रस मीठा है (द्रव)। कविता में शृंगार रस है (काव्य-रस)। |
| वर्ण | अक्षर, रंग, जाति या वर्ग | हिंदी में वर्ण दो प्रकार के हैं (अक्षर)। वस्त्र का वर्ण पीला है (रंग)। |
| गति | चाल, दशा, मोक्ष | रेलगाड़ी की गति तेज़ है (चाल)। जीवात्मा को सद्गति मिले (मोक्ष)। |
| जड़ | मूल, मूर्ख, अचेतन | पेड़ की जड़ गहरी है (मूल)। वह जड़ बुद्धि है (मूर्ख)। |
| भूत | बीता हुआ काल, प्रेत, प्राणी, पंचतत्व | क्रिया का भूत काल (बीता)। भूत से मत डरो (प्रेत)। |
| योग | जोड़, ध्यान-साधना, संयोग | दो और तीन का योग पाँच है (जोड़)। रोज़ योग करो (साधना)। |
| मान | सम्मान, माप, घमंड | उसे मान मिला (सम्मान)। वह मान में अकड़ा है (घमंड)। |
| श्री | लक्ष्मी, शोभा, संपत्ति, आदरसूचक | श्री राम वन गए (आदरसूचक)। नगर की श्री बढ़ी (शोभा)। |
| अक्षर | वर्ण, ईश्वर, कभी नष्ट न होने वाला | अक्षर सुंदर लिखो (वर्ण)। ब्रह्म अक्षर है (अविनाशी)। |
| गुरु | शिक्षक, बृहस्पति, भारी, बड़ा | गुरु ने ज्ञान दिया (शिक्षक)। यह वस्तु गुरु है (भारी)। |
| वर | दूल्हा, श्रेष्ठ, वरदान | वर ने वधू को वरमाला पहनाई (दूल्हा)। देवता ने वर दिया (वरदान)। |
| तात | पिता, पूज्य व्यक्ति, प्रिय संबोधन | तात की आज्ञा माननी चाहिए (पिता)। तात, चलो (प्रिय संबोधन)। |
| कुल | वंश, सब मिलाकर | वह उच्च कुल का है (वंश)। कुल सौ विद्यार्थी हैं (सब मिलाकर)। |
| मति | बुद्धि, राय या मत | मति शुद्ध रखो (बुद्धि)। मेरी मति है कि चलें (राय)। |
भाग 6 — हल सहित उदाहरण
| क्र. | प्रश्न | उत्तर | हल और कारण |
|---|---|---|---|
| 1 | "किसान ने खेत में हल चलाया।" में "हल" का अर्थ: समाधान, खेत जोतने का औज़ार, उत्तर, सवाल | खेत जोतने का औज़ार | "खेत" और "चलाया" संकेत देते हैं। समाधान का प्रयोग "निकाला" या "ढूँढा" के साथ होता है। |
| 2 | "राजा ने प्रजा से कर लिया।" में "कर" का अर्थ: हाथ, किरण, टैक्स, सूँड | टैक्स | राजा-प्रजा के साथ कर लेना कर-संग्रह का वाक्य है। हाथ के साथ "जोड़ना", किरण के साथ "पड़ना" और सूँड के साथ "उठाना" आता है। |
| 3 | "बच्चा रात को सोता है।" में "सोना" से तात्पर्य है: स्वर्ण, नींद लेना, पीला रंग, आभूषण | नींद लेना | "सोता है" क्रिया-रूप है। स्वर्ण का अर्थ संज्ञा "सोना" में आता है, क्रिया में नहीं। |
| 4 | "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय" में पहला और दूसरा "कनक": | धतूरा और सोना | कवि कहता है कि सोने में धतूरे से सौ गुना अधिक नशा है। एक ही शब्द के दो बार आने और दो अलग अर्थ देने से यहाँ यमक अलंकार बनता है। |
| 5 | "सूर की कविता के पद अनूठे हैं।" में "पद": पैर, ओहदा, गीत, स्थान | गीत | कविता के प्रसंग में पद = काव्य-गीत या छंद। पैर "छूना" के साथ आता है। |
| 6 | "उसने पीत अंबर पहना और शृंगार किया।" में "अंबर" का अर्थ: आकाश, वस्त्र, बादल, रंग | वस्त्र | "पहना" क्रिया वस्त्र के साथ ही आती है; आकाश या बादल पहने नहीं जाते। "पीत" उसका रंग बता रहा है, शब्द का अर्थ नहीं। |
| 7 | "उसने पाँच अंक पाए।" में "अंक": गोद, संख्या/नंबर, नाटक का अंक, चिह्न | संख्या/नंबर | परीक्षा में पाना संख्या से जुड़ा है। |
| 8 | "सरोवर में जलज खिला।" में "जलज": कमल, मछली, शंख, मोती | कमल | "खिला" के साथ केवल कमल बैठता है। |
| 9 | "तात की आज्ञा पाकर राम वन को चले।" में "तात": पिता, भाई, मित्र, गुरु | पिता | पारिवारिक प्रसंग और आज्ञा का भाव पिता की ओर संकेत करता है। |
| 10 | "हरि ने गजराज की रक्षा की।" में "हरि": सिंह, बंदर, विष्णु, सर्प | विष्णु | गजराज की रक्षा का प्रसंग (गज-ग्राह कथा) विष्णु से जुड़ा है। |
| 11 | "वह उच्च कुल का है।" में "कुल": वंश, कुल जोड़, किनारा, नगर | वंश | "उच्च ... का है" वंश का संकेत देता है। |
| 12 | "विद्यालय में कुल सौ विद्यार्थी हैं।" में "कुल": वंश, सब मिलाकर, किनारा, परिवार | सब मिलाकर | संख्या के साथ आने से कुल योग का अर्थ। |
| 13 | निम्न में "पय" का अर्थ नहीं है: दूध, जल, पानी, अग्नि | अग्नि | पय के दो अर्थ दूध और जल हैं। पानी जल का ही पर्याय है। |
| 14 | "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून" में अलंकार: | श्लेष | "पानी" शब्द के तीन अर्थ हैं, इज़्ज़त, चमक और जल। एक शब्द के एकाधिक अर्थ एक ही स्थान पर हैं, यही श्लेष है। |
भाग 7 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)
| जाल | क्यों आकर्षक लगता है | सच क्या है |
|---|---|---|
| सबसे प्रचलित अर्थ चुनना | पहला अर्थ तुरंत याद आता है | परीक्षा में प्रायः कम प्रचलित अर्थ पूछा जाता है; पूरा वाक्य पढ़कर निर्णय लो |
| एक अर्थ देखकर रुकना | एक विकल्प ठीक लगा | अन्य विकल्प को भी वाक्य में रखकर देखो; शायद वह बेहतर बैठे |
| "हरि" केवल विष्णु | धार्मिक प्रसंग की आदत | हरि = सिंह, सूर्य, घोड़ा, बंदर भी |
| "कर" केवल हाथ | रोज़मर्रा का अर्थ | कर = टैक्स, किरण, सूँड भी |
| "सोना" संज्ञा-क्रिया का भ्रम | शब्द एक है | सोना (स्वर्ण) संज्ञा, सोना (नींद लेना) क्रिया |
| पर्याय और अनेकार्थी का भेद | दोनों में कई शब्द | पर्याय = कई शब्द, एक अर्थ; अनेकार्थी = एक शब्द, कई अर्थ |
| श्लेष और यमक का भेद | दोनों में शब्द दोहराव या दो अर्थ | यमक में शब्द बार-बार आता है (अर्थ भिन्न); श्लेष में शब्द एक बार आकर दो अर्थ देता है |
| वार और बार का भ्रम | उच्चारण पास-पास | वार (दिन, प्रहार) और बार (दफ़ा, समय) अलग शब्द हैं; वर्तनी ध्यान से पढ़ो |
भाग 8 — श्लेष से अनेकार्थी का रिश्ता
श्लेष का अर्थ है "चिपका हुआ"। जब एक ही शब्द एक बार आकर दो या अधिक अर्थ देता है, तब श्लेष अलंकार होता है। इस अलंकार का आधार ही अनेकार्थी शब्द हैं।
| पंक्ति | श्लेष वाला शब्द | अर्थ |
|---|---|---|
| रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून। | पानी | मनुष्य के लिए इज़्ज़त, मोती के लिए चमक, चूने के लिए जल |
| चरन धरत चिंता करत, चितवत चारों ओर। सुबरन को खोजत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर। | सुबरन | कवि के लिए सुंदर वर्ण (अक्षर), व्यभिचारी के लिए सुंदर रंग-रूप, चोर के लिए सोना |
इसीलिए अनेकार्थी शब्द पढ़ते समय सावधान रहो। यदि किसी काव्य-पंक्ति में एक ही शब्द दो प्रसंगों में सटीक बैठे, तो वहाँ श्लेष हो सकता है।
भाग 9 — रैपिड अभ्यास: 20 प्रश्न और उत्तर
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | "नग" के दो अर्थ | पर्वत, रत्न |
| 2 | "द्विज" का अर्थ "पक्षी" है या "देवता"? | पक्षी |
| 3 | "पय" किसका पर्याय है | दूध, जल |
| 4 | "कनक" का अर्थ (सोना के अतिरिक्त) | धतूरा |
| 5 | "हरि" का अर्थ "बंदर" के लिए सही है या ग़लत? | सही |
| 6 | "वंश" के दो अर्थ | कुल, बाँस |
| 7 | "अर्क" का अर्थ (सूर्य के अतिरिक्त) | मदार का पौधा, रस |
| 8 | "सुधा" का अर्थ (अमृत के अतिरिक्त) | चूना |
| 9 | "जड़" के तीन अर्थ | मूल, मूर्ख, अचेतन |
| 10 | "पद" के तीन अर्थ | पैर, ओहदा, काव्य-पंक्ति |
| 11 | "आम" के दो अर्थ | फल, साधारण |
| 12 | "तीर" के दो अर्थ | बाण, किनारा |
| 13 | "उत्तर" के तीन अर्थ | जवाब, दिशा, बाद का |
| 14 | "गति" का अर्थ (चाल के अतिरिक्त) | दशा, मोक्ष |
| 15 | "कल" के तीन अर्थ | बीता दिन, आने वाला दिन, चैन/मशीन |
| 16 | "बल" के दो अर्थ | शक्ति, सेना |
| 17 | "योग" के तीन अर्थ | जोड़, साधना, संयोग |
| 18 | "मधु" के तीन अर्थ | शहद, वसंत, एक असुर |
| 19 | "वर" के तीन अर्थ | दूल्हा, श्रेष्ठ, वरदान |
| 20 | "तात" का अर्थ | पिता |
भाग 10 — अभ्यास-दिनचर्या
| दिन | क्या करें | समय |
|---|---|---|
| 1 | भाग 3 की तालिका: अर्थ ढककर लिखो | 25 मिनट |
| 2 | भाग 4: कर, काल, पद, पानी, बाल को प्रसंग-वाक्यों के साथ दोहराओ | 25 मिनट |
| 3 | भाग 5: धर्म, रस, योग, गुरु, वर | 20 मिनट |
| 4 | भाग 6 के उदाहरण बिना उत्तर देखे हल करो | 20 मिनट |
| 5 | भाग 8: श्लेष वाली पंक्तियाँ पढ़ो | 15 मिनट |
| 6 | भाग 9 का रैपिड अभ्यास 10 मिनट में हल करो | 10 मिनट |
| 7 | सप्ताह की सभी ग़लतियाँ दोहराओ | 15 मिनट |
एक और अभ्यास सुझाव: प्रत्येक बहुअर्थी शब्द के लिए दो वाक्य स्वयं बनाओ, जिनमें अर्थ अलग हों (जैसे "कर": हाथ और टैक्स)। जो अर्थ वाक्य में बैठ गया, वह स्थायी याद बन जाता है।
भाग 11 — यह विषय आगे कहाँ जुड़ता है
- पर्यायवाची शब्द: पर्याय में एक अर्थ के कई शब्द और अनेकार्थी में एक शब्द के कई अर्थ, दोनों को साथ पढ़ो।
- अलंकार: श्लेष और यमक की पहचान इसी पर टिकी है।
- गद्यांश: शब्द के प्रसंगानुसार अर्थ वाले प्रश्न।
- पद्यांश: कवि का प्रयुक्त शब्द किस अर्थ में है, यह पूछा जाता है।
Practice questions
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Q1. 'बल' और 'वल' से भिन्न, 'बात' अनेकार्थी न होकर 'पानी' अनेकार्थी है। 'पानी' का निम्नलिखित में से कौन-सा अर्थ नहीं है?
▸ Show answer & explanation
Answer: D
'पानी' अनेकार्थी शब्द है जिसके अर्थ हैं — जल, इज्जत/प्रतिष्ठा (पानी उतरना) तथा चमक/आभा (मोती का पानी)। 'वायु' इसका अर्थ नहीं है।
Q2. अनेकार्थी शब्द 'पतंग' के निम्नलिखित में से कौन-से सभी अर्थ सही हैं?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
'पतंग' अनेकार्थी शब्द है जिसके अर्थ हैं — सूर्य, हवा में उड़ने वाली गुड्डी तथा टिड्डा/पतिंगा। अन्य विकल्पों में असंगत अर्थ हैं।
Q3. 'ग्रह' और 'गृह' युग्म में 'गृह' का सही अर्थ क्या है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'गृह' का अर्थ घर या मकान है, जबकि 'ग्रह' का अर्थ आकाशीय पिंड (जैसे मंगल, शनि) होता है।
Q4. इस वाक्य में रेखांकित शब्द का उपयुक्त अर्थ चुनिए: "वर्षा ऋतु में 'अंबर' मेघों से ढक जाता है।"
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'अंबर' अनेकार्थी शब्द है जिसके अर्थ आकाश, वस्त्र तथा एक सुगंधित द्रव्य हैं। मेघों के संदर्भ में यहाँ 'आकाश' अर्थ उपयुक्त है।
Q5. 'अपेक्षा' और 'उपेक्षा' युग्म में 'उपेक्षा' का सही अर्थ है—
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'उपेक्षा' का अर्थ अनदेखी, तिरस्कार या उदासीनता है, जबकि 'अपेक्षा' का अर्थ आशा या तुलना में होता है।
Q6. अनेकार्थी शब्द 'घन' का निम्नलिखित में से कौन-सा अर्थ नहीं है?
▸ Show answer & explanation
Answer: D
'घन' के अर्थ हैं — बादल, हथौड़ा, सघन/घना तथा गणित में किसी संख्या का तीसरा घात। 'कमल' इसका अर्थ नहीं है।
Q7. इस वाक्य में रेखांकित शब्द का उपयुक्त अर्थ चुनिए: "न्यायाधीश ने निष्पक्ष होकर 'फल' सुनाया।"
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'फल' अनेकार्थी शब्द है जिसके अर्थ वृक्ष का फल, परिणाम/नतीजा तथा लाभ हैं। न्यायाधीश के निर्णय के संदर्भ में 'परिणाम/नतीजा' अर्थ उपयुक्त है।
Q8. 'कुल' और 'कूल' युग्म में 'कूल' का सही अर्थ क्या है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'कूल' का अर्थ नदी का किनारा या तट है, जबकि 'कुल' का अर्थ वंश, परिवार अथवा समस्त होता है।
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