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Exam Topic CUET Hindi · 102 30 practice MCQs

लोकोक्तियाँ

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एक नज़र में

भाग 1 — लोकोक्ति क्या है और CUET इसे कैसे पूछता है

Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.

लोकोक्ति दो शब्दों से बनी है: लोक (जनसाधारण) और उक्ति (कथन)। यानी वह कथन जो आम लोगों के लंबे अनुभव से निकला और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहा। इसे कहावत भी कहते हैं। यह अपने-आप में पूरा वाक्य होती है, इसलिए इसे जैसे का तैसा बोला जाता है। इसका रूप, वचन और काल नहीं बदलते।

परीक्षा में यह विषय इसलिए पसंद किया जाता है कि इसमें रटंत और समझ दोनों की जाँच होती है। जिसने केवल अर्थ रटे हैं वह स्थिति वाले प्रश्न में फँसता है, और जिसने केवल भाव समझा है वह अधूरी कहावत की पूर्ति में चूकता है। इसलिए दोनों तैयारी चाहिए।

प्रश्न का प्रकार कैसा दिखता है क्या परखता है
अर्थ पूछना "थोथा चना बाजे घना" का अर्थ क्या है? कहावत का भाव
स्थिति से कहावत एक छोटी घटना देकर पूछना कि कौन-सी कहावत बैठती है भाव पहचानकर लागू करना
पूर्ति "दूध का जला ..." को पूरा कीजिए कहावत का ठीक रूप
सूची मिलान कहावतें सूची I में, अर्थ सूची II में अर्थ और कहावत की जोड़ी
मुहावरा या लोकोक्ति चार विकल्पों में से लोकोक्ति चुनना पूर्ण वाक्य और वाक्यांश का भेद
समान भाव वाली कहावत "कर्मफल" बताने वाली कहावत चुनना भाव के आधार पर वर्गीकरण
अशुद्ध रूप पहचानना "थोथा चना बजे घना" जैसे बदले हुए रूप में से सही रूप कहावत की शब्द-रचना

भाग 2 — मुहावरा और लोकोक्ति में भेद

इन दोनों का भेद सीधे भी पूछा जाता है और विकल्प चुनने में भी काम आता है। सबसे भरोसेमंद जाँच यह है: उसे अपने वाक्य में डालकर देखो। मुहावरे को वाक्य में ढालने पर उसका रूप बदलता है (नाक में दम करना, नाक में दम कर दिया), जबकि लोकोक्ति ज्यों की त्यों रहती है।

आधार मुहावरा लोकोक्ति
रूप वाक्यांश, अपने-आप में अधूरा पूरा वाक्य
प्रयोग क्रिया का रूप बदलकर वाक्य में जुड़ता है अपने रूप में स्वतंत्र, वाक्य के बीच उद्धरण की तरह आती है
अर्थ विशेष अर्थ देता है (आँखें खुलना = सच्चाई समझ आना) पूरी सीख या अनुभव कहता है
काल, वचन, लिंग बदलते हैं नहीं बदलते
काम भाषा में रंग और ज़ोर लाना उदाहरण या प्रमाण की तरह बात की पुष्टि करना
उदाहरण हवा से बातें करना, आँखों का तारा जैसी करनी वैसी भरनी, नाच न जाने आँगन टेढ़ा

एक और संकेत: जो अंश "करना, होना, देना, लेना, खाना" जैसी क्रिया पर समाप्त होकर वाक्य में रूप बदल सकता है, वह प्रायः मुहावरा है। "दाल में काला होना", "गागर में सागर भरना", "आँखें खुलना" इसी कारण मुहावरे हैं, कहावत नहीं। परीक्षा में यही तीन-चार वाक्यांश विकल्पों में रखकर भ्रम पैदा किया जाता है।

भाग 3 — हल करने की विधि, कारण सहित

चरण 1 — शब्दों का सीधा चित्र छोड़ो। कहावत प्रतीक में बोलती है। "चिड़िया खेत चुग गई" में चिड़िया, खेत और पछतावा तीनों प्रतीक हैं। यदि आप चिड़िया पर अटक गए तो अर्थ हाथ से निकल जाएगा। इसलिए पहले पूछो कि यह किस जीवन-स्थिति का चित्र है।

चरण 2 — भाव को एक शब्द में बाँधो। हर कहावत के पीछे एक भाव होता है: पछतावा, दिखावा, कर्मफल, लोभ, छिपा शत्रु, संतोष, घमंड, असमर्थता, अवसर चूकना। एक शब्द इसलिए, क्योंकि परीक्षा में स्थिति की भाषा बदल जाती है पर उसका भाव वही रहता है।

चरण 3 — विकल्पों को भाव से छानो। चार विकल्पों में प्रायः दो ही भाव के निकट होते हैं। दो में से एक का अर्थ उलटा या अधूरा होता है। केवल उन दो को आमने-सामने रखो।

चरण 4 — निकट जोड़ों का सूक्ष्म भेद देखो। "थोथा चना बाजे घना" और "अधजल गगरी छलकत जाए" दोनों दिखावे की हैं, पर पहली में भीतर कुछ न होना (खोखला व्यक्ति) और दूसरी में थोड़ा ज्ञान होकर उसका प्रदर्शन (अल्पज्ञ) मुख्य है। भाग 5 में ऐसे जोड़े अलग से दिए हैं।

चरण 5 — पूर्ति में शब्द-क्रम और तुक को सहारा बनाओ। अधिकतर कहावतों में तुक होती है (करनी-भरनी, चना-घना, साथ-हाथ)। विकल्प में जो भी अंश तुक से मेल न खाए, वह प्रायः गलत होता है।

चरण 6 — अंतिम जाँच। चुनी हुई कहावत को दी हुई स्थिति में बैठाकर पढ़ो। यदि वाक्य स्वाभाविक लगे और अर्थ पूरा हो जाए तो उत्तर पक्का।

भाग 4 — भाव के अनुसार कहावतें (याद करने के लिए समूह)

कहावतें अलग-अलग याद करने से भूलती हैं और भाव के समूह में याद करने से टिकती हैं। हर समूह के सामने भाव का एक शब्द रखा है, वही आपकी चाबी है।

भाव लोकोक्तियाँ सार
पछतावा, अवसर चूकना अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत; का बरखा जब कृषि सुखानी; समय चूकि पुनि का पछताने समय बीतने पर पछताना बेकार
दिखावा, अल्पज्ञान थोथा चना बाजे घना; अधजल गगरी छलकत जाए; ऊँची दुकान फीका पकवान; नाम बड़े और दर्शन छोटे बाहर शोर या शान, भीतर कम गुण
कर्म और फल जैसी करनी वैसी भरनी; बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय; जैसा बोओगे वैसा काटोगे कर्म के अनुसार फल
अपनी कमी का दोष दूसरे पर नाच न जाने आँगन टेढ़ा; उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे अयोग्यता या दोष छिपाकर दूसरों पर डालना
छिपा शत्रु, भीतरी भेद घर का भेदी लंका ढाए; मुँह में राम बगल में छुरी अपने ही या ऊपर से मित्र बनकर हानि
बलवान का अधिकार जिसकी लाठी उसकी भैंस; समरथ को नहिं दोष गुसाईं शक्तिशाली को कोई नहीं रोकता
कथनी और करनी हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और; जो गरजते हैं वे बरसते नहीं; पर उपदेश कुशल बहुतेरे कहना कुछ, करना कुछ
संकट मोल लेना आ बैल मुझे मार; ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर जान-बूझकर विपत्ति बुलाना या फिर डर छोड़ना
थोड़े से बहुत की आशा ऊँट के मुँह में जीरा; एक अनार सौ बीमार; खोदा पहाड़ निकली चुहिया साधन कम और माँग अधिक, या मेहनत बड़ी फल छोटा
सहारा, संतोष डूबते को तिनके का सहारा; भागते भूत की लँगोटी ही सही कठिन समय में थोड़ा भी बहुत
मूर्खों को समझाना भैंस के आगे बीन बजाए भैंस खड़ी पगुराय; बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद; अंधे के आगे रोवे अपना दीदा खोवे नासमझ को गुण या बात की कद्र नहीं
लालच और हानि आधी छोड़ सारी को धावे आधी रहे न सारी पावे; लालच बुरी बला है अधिक पाने के चक्कर में जो है वह भी खोना
दोहरा लाभ आम के आम गुठलियों के दाम; एक पंथ दो काज एक काम से दो फल
सावधानी और अनुभव दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है; जल में रहकर मगर से बैर पुरानी चोट से सतर्कता, या बड़े से टकराव में हानि
सीमा में रहना जितनी चादर हो उतने पैर पसारो; तेते पाँव पसारिए जेते लांबी सौर आय के भीतर खर्च
क्षणिक सुख चार दिन की चाँदनी फिर अँधेरी रात; दूर के ढोल सुहावने सुख थोड़े दिन का, दूर से सब सुंदर
अकारण दखल मान न मान मैं तेरा मेहमान अपनी ओर से जबरन जुड़ना
प्रत्यक्ष और प्रमाण हाथ कंगन को आरसी क्या; पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या जो सामने है उसे प्रमाण नहीं चाहिए
आरंभ में गुण होनहार बिरवान के होत चीकने पात होनहार की झलक शुरू से मिलती है
झगड़े की जड़ एक हाथ से ताली नहीं बजती; न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी दोनों पक्षों का हाथ, कारण मिटाओ तो काम मिटे
अपनी चीज़ की कद्र न होना घर की मुर्गी दाल बराबर घर की वस्तु या घर के गुणी की कद्र नहीं
पास ही कमी चिराग तले अँधेरा जहाँ से सबसे अधिक रोशनी की आशा, वहीं अँधेरा
अपने ही गुणगान अपने मुँह मियाँ मिट्ठू खुद अपनी प्रशंसा करना
अयोग्य को ऊँचा पद अंधों में काना राजा; कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली कम योग्य का बड़ा बन जाना, या दो असमान की तुलना
अज्ञान और अहंकार सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है; रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई पूर्वाग्रह, या हार पर भी अकड़
अपराधी की घबराहट चोर की दाढ़ी में तिनका दोषी स्वयं सशंक रहता है
अचानक लाभ बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा बिना प्रयास संयोग से मिलना
नकद का महत्त्व नौ नकद न तेरह उधार निश्चित थोड़ा भला, अनिश्चित बहुत नहीं

इन कहावतों में कुछ का अर्थ प्रसंग से बदल जाता है। जैसे "ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर" का भाव है कि जब कठिन काम में उतर ही गए तो अब बाधाओं से घबराना नहीं चाहिए। इसे "आ बैल मुझे मार" से अलग रखो, जिसमें बिना ज़रूरत विपत्ति बुलाना है।

भाग 5 — मिलते-जुलते जोड़े और उनका भेद

परीक्षा में दो-दो समान कहावतें एक ही प्रश्न में रखकर भ्रम पैदा किया जाता है। भेद पकड़ने के लिए हर जोड़े का केंद्रीय शब्द याद रखो।

जोड़ा पहली का भाव दूसरी का भाव पहचान का शब्द
थोथा चना बाजे घना / अधजल गगरी छलकत जाए गुणहीन व्यक्ति अधिक शोर करता है थोड़ा जानने वाला अधिक दिखाता है खोखला बनाम अल्पज्ञ
आ बैल मुझे मार / ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर अनावश्यक विपत्ति न्योतना खतरा उठा लिया तो डर कैसा अनजाने में न्योता बनाम सोचकर उतरना
दूर के ढोल सुहावने / घर की मुर्गी दाल बराबर दूर की चीज़ अच्छी लगती है अपनी चीज़ की कद्र नहीं दूर बनाम पास
अब पछताए होत क्या / का बरखा जब कृषि सुखानी हानि के बाद पछताना सहायता तब बेकार जब काम बिगड़ चुका खुद का पछतावा बनाम देर से आई मदद
अंधों में काना राजा / कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली कम योग्य होकर भी अधिक योग्य गिना जाना दो असमान की तुलना न होना बड़प्पन बनाम तुलना
जैसी करनी वैसी भरनी / बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा कर्म के अनुसार फल बिना कर्म के संयोग से फल अर्जित बनाम अचानक
मुँह में राम बगल में छुरी / हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और ऊपर मित्र, भीतर शत्रु कहना कुछ, करना कुछ छल से हानि बनाम दोहरा आचरण
ऊँट के मुँह में जीरा / खोदा पहाड़ निकली चुहिया आवश्यकता से बहुत कम मिलना परिश्रम बड़ा, फल छोटा मात्रा की कमी बनाम फल की कमी

भाग 6 — हल सहित उदाहरण

उदाहरण 1 (अर्थ). "नाच न जाने आँगन टेढ़ा" का अर्थ चुनिए: (क) नाचना बहुत कठिन होता है (ख) अपनी अयोग्यता छिपाने के लिए साधन या परिस्थिति को दोष देना (ग) आँगन टेढ़ा बनवाना (घ) नाचने की इच्छा न होना। हल: चित्र में नाचने वाला नाचना नहीं जानता और दोष आँगन को दे रहा है। भाव है "अपनी कमी दूसरे पर डालना"। (क) और (घ) में यह भाव नहीं है, (ग) शाब्दिक अर्थ है। उत्तर (ख)।

उदाहरण 2 (स्थिति). परीक्षा से एक रात पहले रोहन किताब पलटते हुए बोला, "काश साल भर पढ़ा होता।" कौन-सी कहावत बैठेगी? हल: भाव है अवसर निकल जाने के बाद पछतावा। कहावत है अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। यदि विकल्प में "का बरखा जब कृषि सुखानी" भी हो तो ध्यान दो कि वह देर से मिली सहायता पर ज़्यादा बैठती है, यहाँ पछतावा रोहन का अपना है।

उदाहरण 3 (स्थिति). सभा में नेता बड़े-बड़े वादे करता रहा, पर काम के समय कहीं दिखा नहीं। हल: भाव है कथनी और करनी का अंतर, केवल बोलना। यहाँ जो गरजते हैं वे बरसते नहीं ठीक बैठती है (गरजना = बोलना, बरसना = करना)। "थोथा चना बाजे घना" भी दिखावे की है, पर वह गुणहीन व्यक्ति के शोर पर है, वादा न निभाने पर नहीं।

उदाहरण 4 (समान जोड़े में चुनाव). कंप्यूटर के दो शब्द सीखकर नया कर्मचारी सबको ज्ञान देने लगा। (क) थोथा चना बाजे घना (ख) अधजल गगरी छलकत जाए। हल: यहाँ उसे थोड़ा आता है और वह उसका प्रदर्शन कर रहा है। यह अल्पज्ञता का दिखावा है। उत्तर (ख), क्योंकि अधजल गगरी का भाव ही यह है कि थोड़ा भरा घड़ा अधिक छलकता है।

उदाहरण 5 (स्थिति). बदमाश पड़ोसी के बेटे से जानते हुए भी उसने झगड़ा मोल ले लिया। हल: जान-बूझकर विपत्ति बुलाना। उत्तर आ बैल मुझे मार। चेतावनी: "ओखली में सिर दिया" भी विपत्ति की है, पर वह उस स्थिति पर है जहाँ कठिन काम चुन लिया और अब पीछे नहीं हटना है।

उदाहरण 6 (मुहावरा या लोकोक्ति). निम्न में लोकोक्ति कौन-सी है? (क) आँखें खुलना (ख) सिर पर पैर रखकर भागना (ग) एक अनार सौ बीमार (घ) हवा से बातें करना। हल: (क), (ख), (घ) तीनों वाक्यांश हैं और वाक्य में रूप बदलकर आते हैं (आँखें खुल गईं, हवा से बातें करता है)। (ग) अपने-आप में पूरा वाक्य है और इसका रूप स्थिर है। उत्तर (ग)।

उदाहरण 7 (पूर्ति). "दूध का जला ______" को पूरा कीजिए। हल: पूरी कहावत है दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है। इसका भाव है कि एक बार धोखा खाया व्यक्ति आगे हर चीज़ में सावधान रहता है। दूध गर्म होता है, छाछ ठंडी, फिर भी वह फूँकता है, इसी में कहावत का तर्क है।

उदाहरण 8 (सूची मिलान). सूची I: (1) हाथ कंगन को आरसी क्या (2) घर का भेदी लंका ढाए (3) डूबते को तिनके का सहारा (4) एक हाथ से ताली नहीं बजती। सूची II: (क) भीतरी व्यक्ति से हानि (ख) झगड़े में दोनों पक्ष जिम्मेदार (ग) प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं (घ) संकट में थोड़ी मदद भी बहुत। हल: (1) कंगन सामने हाथ में है, आईना क्यों चाहिए, इसलिए (ग)। (2) घर का भेदी = भीतर का आदमी, इसलिए (क)। (3) डूबता व्यक्ति तिनके को भी पकड़ता है, इसलिए (घ)। (4) ताली दो हाथ से बजती है, इसलिए (ख)। सही मेल: 1-ग, 2-क, 3-घ, 4-ख।

उदाहरण 9 (स्थिति). किसान ने गन्ना बेचा और उसकी खोई भी बेचकर अलग कमाई कर ली। हल: एक ही वस्तु से दो लाभ। उत्तर आम के आम गुठलियों के दाम। आम का फल भी बिके और गुठली भी, यही दोहरा लाभ है।

उदाहरण 10 (स्थिति). गाँव में केवल एक व्यक्ति दसवीं पास था, और सब उसे बहुत बड़ा विद्वान मानते थे। हल: योग्यता कम है पर आसपास उससे भी कम होने से वह श्रेष्ठ गिना जा रहा है। उत्तर अंधों में काना राजा।

उदाहरण 11 (स्थिति). कक्षा में खिड़की टूटने की बात उठते ही मोहन बिना पूछे सफ़ाई देने लगा। हल: दोषी मन स्वयं घबराता है। उत्तर चोर की दाढ़ी में तिनका। यहाँ "दाल में काला" मत चुनना, क्योंकि वह मुहावरा है और मोहन की घबराहट पर नहीं, स्थिति के संदेहास्पद होने पर बैठता है।

उदाहरण 12 (अर्थ). "नौ नकद न तेरह उधार" का भाव क्या है? हल: नकद के नौ रुपये उधार के तेरह से अच्छे हैं, क्योंकि उधार का भरोसा नहीं। भाव है निश्चित थोड़ा, अनिश्चित अधिक से भला। यदि विकल्प में "अधिक कमाने के लिए उधार देना" हो तो वह उलटा है।

उदाहरण 13 (सावधानी). पहली बार ठगे जाने के बाद वह हर अनजान व्यक्ति से सशंकित रहने लगा। (क) आ बैल मुझे मार (ख) दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँककर पीता है (ग) जैसी करनी वैसी भरनी (घ) खोदा पहाड़ निकली चुहिया। हल: पुरानी चोट से आई सतर्कता का भाव (ख) में है। (क) जान-बूझकर विपत्ति, (ग) कर्मफल, (घ) बड़ा श्रम छोटा फल। उत्तर (ख)।

उदाहरण 14 (स्थिति). पहलवान को भरपेट खाने की जगह एक छोटी रोटी दे दी गई। हल: आवश्यकता की तुलना में बहुत कम। उत्तर ऊँट के मुँह में जीरा। ऊँट बड़ा पशु है और जीरा बहुत थोड़ा। "खोदा पहाड़ निकली चुहिया" यहाँ नहीं बैठती, क्योंकि उसमें परिश्रम के बाद छोटा फल है।

भाग 7 — सामान्य भूलें

भूल क्यों लुभाती है सही बात
शब्दों के चित्र से अर्थ निकालना ओखली, बैल, ढोल सब देखे हुए हैं अर्थ प्रतीकात्मक है, भाव पकड़ो
दाल में काला होना को लोकोक्ति मानना कहावत जैसा लगता है और बहुत प्रचलित है यह क्रिया पर बना मुहावरा है, रूप बदलता है
गागर में सागर भरना को लोकोक्ति मानना इसमें तुक-सा संतुलन है यह भी वाक्यांश, यानी मुहावरा है
अधूरी कहावत को अपने शब्दों से पूरा करना अर्थ समझ आ गया तो रूप भी पक्का लगता है कहावत का रूप निश्चित है, तुक देखो
समान भाव वाली दो कहावतों में एक चुन लेना दोनों ठीक लगती हैं केंद्रीय शब्द देखो: खोखला बनाम अल्पज्ञ
अनुमान से उलटा अर्थ चुनना विकल्प शब्दों के प्रयोग से मिलते-जुलते होते हैं उलटा अर्थ अक्सर विकल्प की चाल है; भाव से जाँचो
लोकोक्ति में वचन या काल बदल देना वाक्य में सहज लगे लोकोक्ति ज्यों की त्यों रखी जाती है
बिन-तुक वाले विकल्प को अच्छा मानना अर्थ ठीक लगता है तुकांत कहावत का अशुद्ध रूप तुक से पकड़ में आता है

भाग 8 — तीव्र अभ्यास (30 सेकंड प्रति प्रश्न)

पहले उत्तर ढककर स्वयं बताइए, फिर तालिका से मिलाइए।

क्र. प्रश्न उत्तर
1 "बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद" का भाव गुणहीन व्यक्ति को गुण की पहचान नहीं
2 जो थोड़े में बहुत दिखाए, भीतर कुछ नहीं थोथा चना बाजे घना
3 "जैसी करनी ______" पूर्ति वैसी भरनी
4 "न रहेगा बाँस ______" पूर्ति न बजेगी बाँसुरी
5 एक पद के लिए सौ दावेदार एक अनार सौ बीमार
6 शक्तिशाली का ही अधिकार चलना जिसकी लाठी उसकी भैंस
7 "का बरखा जब कृषि सुखानी" का भाव अवसर निकलने पर सहायता बेकार
8 मित्र बनकर भीतर से हानि पहुँचाना मुँह में राम बगल में छुरी
9 "आ बैल मुझे मार" का अर्थ जान-बूझकर विपत्ति बुलाना
10 कौन मुहावरा है: दाल में काला / एक हाथ से ताली नहीं बजती दाल में काला (वाक्यांश)
11 बिना प्रयास संयोग से लाभ बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा
12 "दूर के ढोल सुहावने" का भाव दूर की वस्तु या स्थिति अच्छी लगती है
13 हालत बिगड़ गई पर अकड़ बनी रही रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई
14 घर की चीज़ की कद्र न होना घर की मुर्गी दाल बराबर
15 "जितनी चादर हो उतने ______" पूर्ति पैर पसारो
16 भागते भूत की लँगोटी ही सही का भाव जो मिल जाए उसी में संतोष

भाग 9 — अभ्यास-क्रम (सात दिन)

दिन क्या करें समय
1 भाग 4 के पहले आठ समूह पढ़कर हर कहावत का एक शब्द का भाव लिखें 25 मिनट
2 भाग 4 के शेष समूह; अपने शब्दों में हर कहावत की एक स्थिति सोचें 25 मिनट
3 भाग 5 के जोड़े, केंद्रीय शब्द कॉपी में लिखें; फिर मुहावरे-लोकोक्ति का भेद दोहराएँ 20 मिनट
4 भाग 6 के उदाहरण उत्तर ढककर स्वयं हल करें 25 मिनट
5 भाग 8 की तालिका बिना देखे करें, फिर गलतियाँ अलग लिखें 15 मिनट
6 अधूरी कहावतों की पूर्ति, पाँच-पाँच तुक वाली कहावतें लिखें 20 मिनट
7 सभी गलत रहे उत्तरों की दोहराई और 20 प्रश्नों की समयबद्ध परीक्षा (प्रश्न-बैंक से) 30 मिनट

सबसे प्रभावी आदत यह है कि कोई भी नई कहावत पढ़ते ही उसके लिए अपनी एक स्थिति सोचो। यही अभ्यास परीक्षा के "स्थिति से कहावत" वाले प्रश्न का सीधा रूप है।

भाग 10 — यह विषय कहाँ जुड़ता है

लोकोक्ति और मुहावरे एक-दूसरे के पूरक हैं; दोनों का अंतर इस पृष्ठ में है और मुहावरों का पूरा संग्रह मुहावरे में है। समान भाव वाले शब्दों का अभ्यास पर्यायवाची शब्द से पक्का होता है, और उलटे अर्थ की समझ विलोम शब्द में बनती है। अपठित गद्यांश में भी कहावतें अक्सर लेखक के आशय को समझाने के लिए आती हैं; उसकी विधि अपठित गद्यांश में है।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 22 more in the timed practice test.

Q1. "थोथा चना बाजे घना" लोकोक्ति किस प्रकार के व्यक्ति पर लागू होती है?

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Answer: A

इस कहावत का भाव है कि जैसे खोखला चना अधिक खड़खड़ाता है, वैसे ही कम गुण वाला व्यक्ति अधिक बढ़-चढ़कर बातें और दिखावा करता है।

Q2. "बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद" लोकोक्ति का अर्थ है—

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Answer: A

इस कहावत का भाव है कि जिस व्यक्ति में किसी वस्तु के गुणों को परखने की योग्यता या समझ न हो, वह उसका वास्तविक मूल्य नहीं जान सकता।

Q3. मोहन ने पहले स्वयं झगड़ा शुरू किया और बाद में स्वयं ही शांति की बात करने लगा। इस आचरण के लिए उपयुक्त लोकोक्ति है—

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Answer: B

यहाँ शांति-प्रिय आचरण को व्यक्त करने हेतु "आप भला तो जग भला" उपयुक्त है, जिसका भाव है कि जो स्वयं भला होता है, उसे संसार भी भला दिखता है।

Q4. किसान ने पूरी फसल एक ही व्यापारी को बेचने का सौदा कर लिया; बाद में दूसरा व्यापारी अधिक दाम देने आया तो किसान कुछ न कर सका। दूरदर्शिता की कमी पर चोट करने वाली उपयुक्त लोकोक्ति है—

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Answer: D

"बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय" का भाव है कि जैसा कर्म या निर्णय करोगे वैसा ही फल मिलेगा; बिना सोचे किए सौदे का परिणाम किसान को भुगतना पड़ा।

Q5. "खोदा पहाड़ निकली चुहिया" लोकोक्ति किस स्थिति को व्यक्त करती है?

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Answer: A

इस कहावत का भाव है कि किसी कार्य में बहुत अधिक परिश्रम और साधन लगाने के बावजूद नाममात्र का या नगण्य परिणाम प्राप्त होना।

Q6. सेठ जी सबके सामने दान-धर्म की बड़ी बातें करते हैं, पर घर के नौकर को महीनों वेतन नहीं देते। इस दोहरे आचरण के लिए उपयुक्त लोकोक्ति है—

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Answer: A

"हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और" का भाव है कि किसी का दिखावा कुछ और तथा वास्तविक आचरण कुछ और हो—सेठ जी का व्यवहार यही दर्शाता है।

Q7. "चोर की दाढ़ी में तिनका" लोकोक्ति का भाव क्या है?

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Answer: A

इस कहावत का भाव है कि दोषी व्यक्ति मन में भयभीत रहता है और अपने ही हाव-भाव या असावधानी से अपना अपराध प्रकट कर देता है।

Q8. "नाम बड़े और दर्शन छोटे" लोकोक्ति का सही अर्थ है—

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Answer: A

इस कहावत का भाव है कि किसी की कीर्ति या प्रसिद्धि बहुत हो, परंतु वास्तविक गुण, योग्यता अथवा प्रदर्शन उतना प्रभावशाली न हो।

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