गद्यांश (Prose Comprehension)
गद्यांश (Prose Comprehension) is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 50 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- अपठित गद्यांश में एक गद्य-अवतरण देकर उस पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं — मुख्य भाव, शीर्षक, विशिष्ट तथ्य, शब्दार्थ और निष्कर्ष। यह CUET हिंदी का सर्वाधिक अंक-भार वाला भाग है, क्योंकि एक गद्यांश पर अनेक प्रश्न आते हैं।
- यह कोई पूर्व-ज्ञान नहीं माँगता — सब उत्तर गद्यांश के भीतर से मिलते हैं। यह आपकी पठन-समझ की परीक्षा है।
- विश्वसनीय विधि है — पहले गद्यांश को ध्यान से पढ़ो, फिर हर प्रश्न का उत्तर गद्यांश की पंक्ति से दो — बाहरी ज्ञान या अनुमान से कभी नहीं।
- परीक्षा-सत्य: +5 / −1। हर उत्तर गद्यांश से प्रमाणित हो; "बाहर सही पर गद्यांश में नहीं" वाला विकल्प सबसे बड़ा जाल है।
भाग 1 — प्रश्नों के प्रकार
| प्रकार | प्रश्न का रूप | उत्तर कैसे दें |
|---|---|---|
| मुख्य भाव/शीर्षक | "गद्यांश का मुख्य भाव/उपयुक्त शीर्षक" | पूरे गद्यांश का केंद्रीय विचार |
| विशिष्ट तथ्य | "गद्यांश के अनुसार X क्या है?" | संबंधित पंक्ति खोजकर |
| अनुमान/निष्कर्ष | "गद्यांश से क्या निष्कर्ष निकलता है?" | पंक्ति से एक तार्किक कदम |
| शब्दार्थ | "रेखांकित शब्द का अर्थ" | प्रसंग के अनुसार अर्थ |
| भाव/उद्देश्य | "लेखक का उद्देश्य/दृष्टिकोण" | गद्यांश का समग्र भाव |
भाग 2 — पठन की विधि (संरचना पहले)
- पूरा गद्यांश एक बार सहज गति से पढ़ो — हर कठिन शब्द पर रुको मत; विषय, लेखक का दृष्टिकोण और संरचना पकड़ो।
- केंद्रीय विचार पहचानो — गद्यांश किस बारे में है, और लेखक क्या कहना चाहता है?
- मुख्य व सहायक वाक्य अलग करो — आरंभ/अंत के वाक्य प्रायः मूल भाव रखते हैं; बीच में उदाहरण।
- फिर प्रश्नों पर जाओ — हर प्रश्न के लिए संबंधित पंक्ति पर लौटो; केवल स्मृति से उत्तर मत दो।
भाग 3 — प्रत्येक प्रकार की तकनीक
- मुख्य भाव/शीर्षक: वह विकल्प चुनो जो पूरे गद्यांश को समेटे — न बहुत संकीर्ण (एक उदाहरण), न बहुत व्यापक (गद्यांश से बाहर)।
- विशिष्ट तथ्य: प्रश्न के मुख्य शब्द को गद्यांश में खोजो; उत्तर वहीं समीप होता है। "सब/सदा/केवल" जैसे चरम शब्दों से सावधान।
- अनुमान: उत्तर कहा नहीं गया पर पंक्ति से एक कदम दूर; बड़ी छलाँग वाला विकल्प छोड़ो।
- शब्दार्थ: आस-पास के शब्दों (परिभाषा, विरोध, उदाहरण) से अर्थ तय करो; शब्द का सर्वाधिक प्रचलित अर्थ ज़रूरी नहीं।
- उद्देश्य/दृष्टिकोण: गद्यांश के समग्र स्वर से तय करो — समर्थन, आलोचना, तटस्थता।
भाग 4 — भ्रामक विकल्प (पहचानें और छोड़ें)
- चरम शब्द — "सदा, कभी नहीं, सब, केवल"; गद्यांश प्रायः निरपेक्ष दावे नहीं करता।
- बाहर सही, गद्यांश में नहीं — सामान्य ज्ञान में सही पर इस गद्यांश से असमर्थित कथन।
- आधा-सही — पहला भाग गद्यांश से मेल खाए, दूसरा भाग बदल दे; पूरा विकल्प पढ़ो।
- विषय-बाह्य — ऐसा विचार जो गद्यांश ने उठाया ही नहीं।
- उल्टा — गद्यांश के विपरीत, पर उसी के शब्दों से परिचित दिखने वाला।
भाग 5 — एक आदर्श विधि (उदाहरण-तर्क)
मान लीजिए गद्यांश कहता है कि वृक्ष पर्यावरण-संतुलन के लिए अनिवार्य हैं, पर अंधाधुंध कटाई से उनकी संख्या घट रही है। "मुख्य भाव" के लिए "वृक्ष केवल लकड़ी देते हैं" विकल्प संकीर्ण है; "प्रकृति सुंदर है" बहुत व्यापक; जबकि "वृक्ष पर्यावरण के लिए अनिवार्य हैं और उनका संरक्षण ज़रूरी है" पूरे गद्यांश को समेटता है — यही सही है। "विशिष्ट तथ्य" प्रश्न "वृक्ष क्यों घट रहे हैं?" के लिए गद्यांश में "कटाई" शब्द खोजिए और उसी पंक्ति से उत्तर लीजिए, न कि किसी प्रशंसनीय-से दिखने वाले विकल्प से। हर बार ध्यान रहे — उत्तर के समर्थन में गद्यांश की एक पंक्ति आपके पास होनी चाहिए; यदि नहीं, तो वह उत्तर अभी मिला नहीं।
भाग 6 — हल किए हुए लघु-उदाहरण
- प्रश्न "उपयुक्त शीर्षक" → पूरे गद्यांश का भाव चुनो, एक पैराग्राफ का नहीं। ✔
- प्रश्न "गद्यांश के अनुसार…" → उत्तर पंक्ति में दिया है; खोजो, अनुमान मत लगाओ। ✔
- विकल्प में "सदा/केवल" → चरम शब्द का संकेत, प्रायः ग़लत। ✘
- प्रश्न "निष्कर्ष" → पंक्ति से एक तार्किक कदम; बड़ी छलाँग छोड़ो। ✔
- "रेखांकित शब्द का अर्थ" → प्रसंग से तय करो। ✔
- विकल्प "बाहर सही पर गद्यांश में अनुपस्थित" → छोड़ो। ✘
- "आधा-सही" विकल्प जिसका दूसरा भाग उलटा हो → छोड़ो। ✘
- "लेखक का दृष्टिकोण" → गद्यांश के समग्र स्वर से। ✔
भाग 7 — प्रमाण-आधारित पठन ही सफलता की कुंजी क्यों है
अपठित गद्यांश में उच्च अंक पाने वाले विद्यार्थियों और शेष में सबसे बड़ा अंतर एक आदत का है — उत्तर स्मृति या सामान्य ज्ञान से नहीं, बल्कि गद्यांश की पंक्ति से देना। कमज़ोर विद्यार्थी गद्यांश पढ़कर एक धुँधली धारणा बना लेता है और फिर उसी धारणा से मिलते विकल्प चुनता है — और यही वह जाल है जो परीक्षा बिछाती है, क्योंकि "बाहर सही" या "ठीक-सा लगने वाला" विकल्प हमेशा आरामदेह प्रतीत होता है। कुशल विद्यार्थी हर प्रश्न को प्रमाण की माँग मानता है — वह गद्यांश पर लौटता है, संबंधित पंक्ति खोजता है, और केवल वही विकल्प चुनता है जिसे वह पंक्ति समर्थन देती है। आरंभ के एक-दो प्रश्नों में यह धीमा लगता है, फिर तेज़ हो जाता है, क्योंकि आपको पता चल जाता है कि गद्यांश अपने मुख्य भाव कहाँ रखता है (आरंभिक/अंतिम वाक्य) और तथ्य कहाँ (उदाहरणों में)। प्रमाण-आधारित पठन चरम-शब्द वाले जाल को भी स्वतः निरस्त कर देता है — यदि गद्यांश कहता है "अनेक विद्वान मानते हैं" और विकल्प कहता है "सभी विद्वान मानते हैं", तो पंक्ति से मिलान करते ही अंतर दिख जाता है। इसलिए हर प्रश्न पर मन-ही-मन यह वाक्य पूरा करने का अभ्यास कीजिए — "उत्तर X है क्योंकि गद्यांश में लिखा है…" — यदि आप इसे किसी वास्तविक पंक्ति से पूरा नहीं कर पाते, तो उत्तर अभी पक्का नहीं हुआ। यही एक अनुशासन गद्यांश को अनुमान के खेल से निकालकर निश्चित खोज में बदल देता है, जहाँ सही उत्तर गद्यांश में ही बैठा प्रतीक्षा कर रहा होता है।
भाग 8 — इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें
प्रश्नों के प्रकार (भाग 1) और उनकी तकनीकें (भाग 3) समझें, भ्रामक विकल्पों की सूची (भाग 4) याद रखें, और सबसे बढ़कर प्रमाण-आधारित पठन (भाग 7) का अभ्यास करें — हर उत्तर के लिए एक पंक्ति। समयबद्ध गद्यांश हल करें, पहले तथ्य/शब्दार्थ फिर मुख्य भाव/निष्कर्ष, और हर ग़लती पर देखें कि कौन-सा जाल आपको लगा।
एक पंक्ति का सार: गद्यांश को संरचना के लिए एक बार पढ़ो, फिर हर उत्तर गद्यांश की पंक्ति से दो; मुख्य भाव के लिए पूरा गद्यांश और तथ्य के लिए ठीक पंक्ति देखो, और चरम/विषय-बाह्य/"बाहर-सही" विकल्प छोड़ो।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 42 more in the timed practice test.
Q1. 'संचार के साधनों ने सारे संसार को एक छोटे-से गाँव में बदल दिया' — इस कथन का अभिप्राय है—
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Answer: B
इसका अभिप्राय है कि संचार-साधनों के कारण दूरस्थ लोग भी सहज ही परस्पर जुड़ गए हैं, मानो सारा संसार एक छोटा गाँव हो।
Q2. 'जो व्यक्ति आज का कार्य कल पर टालता रहता है, वह अपने भविष्य को दरिद्र बना रहा होता है' — इस कथन से लेखक का तात्पर्य है कि—
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Answer: C
यहाँ 'दरिद्र' का प्रयोग आर्थिक नहीं, अपितु लाक्षणिक रूप में हुआ है — टालमटोल से व्यक्ति भविष्य के संभावित अवसर और सफलता खो देता है।
Q3. लेखक के अनुसार धन और समय में मूल अंतर क्या है?
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Answer: B
गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि नष्ट धन परिश्रम से फिर पाया जा सकता है, परंतु बीता हुआ क्षण किसी मूल्य पर नहीं लौटाया जा सकता।
Q4. 'अनुशासन स्वतंत्रता का विरोधी नहीं, बल्कि उसका सच्चा रक्षक है' — इस कथन का तात्पर्य है—
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Answer: C
लेखक का तात्पर्य है कि अनुशासन स्वच्छंदता पर अंकुश लगाकर वास्तविक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, अतः वह उसका विरोधी नहीं रक्षक है।
Q5. 'बूँद-बूँद से घड़ा भरता है' लोकोक्ति यहाँ किस भाव को पुष्ट करती है?
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Answer: B
यह लोकोक्ति इस भाव को पुष्ट करती है कि छोटे-छोटे किंतु निरंतर किए गए प्रयासों से अंततः बड़ी उपलब्धि प्राप्त होती है।
Q6. लेखक के अनुसार वृक्ष किस अर्थ में 'उदार' हैं?
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Answer: C
गद्यांश में वृक्षों को इसलिए उदार कहा गया क्योंकि वे बिना किसी अपेक्षा के मनुष्य को छाया, फल और आश्रय देते रहते हैं।
Q7. गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन लेखक के विचारों के विरुद्ध है?
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Answer: C
लेखक भाग्यवाद की आलोचना करते हैं और कर्म पर बल देते हैं; अतः 'केवल भाग्य ही पर्याप्त है' कथन उनके विचारों के विरुद्ध है।
Q8. इस गद्यांश में लेखक का समग्र दृष्टिकोण क्या है?
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Answer: C
लेखक न तो विज्ञान की एकपक्षीय प्रशंसा करते हैं न निंदा; वे इसे तटस्थ उपकरण मानते हैं जिसका परिणाम मनुष्य के विवेक पर निर्भर है।
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