गद्यांश (Prose Comprehension)
गद्यांश (Prose Comprehension) is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 50 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- अपठित गद्यांश में एक ऐसा गद्य-अंश दिया जाता है जो आपने पहले नहीं पढ़ा, और उस पर कई प्रश्न पूछे जाते हैं। पाठ्यक्रम से कुछ याद नहीं करना होता, हर उत्तर गद्यांश के भीतर से मिलता है। यह सीधे आपकी पठन-समझ की परीक्षा है।
- प्रश्न चार तरह के होते हैं: मुख्य भाव या शीर्षक, गद्यांश से सीधा तथ्य, अनुमान और निष्कर्ष, और भाषा-ज्ञान (शब्दार्थ, पर्याय, विलोम, उपसर्ग-प्रत्यय, वाक्य-रचना)। कथात्मक गद्यांश में पात्र का चरित्र और भाव भी पूछा जाता है।
- कुंजी है: पहले पूरा गद्यांश एक बार पढ़कर उसका केंद्रीय विचार पकड़ो, फिर हर प्रश्न का उत्तर गद्यांश की किसी पंक्ति से प्रमाणित करो। जो उत्तर किसी पंक्ति से नहीं जुड़ता वह अनुमान है।
- इस पृष्ठ में तीन मौलिक गद्यांश हैं (सूचनात्मक, विचारात्मक और कथात्मक), जिन पर 14 प्रश्न हल सहित हैं, साथ में भ्रामक विकल्पों की पहचान, भूलों की तालिका और तीव्र अभ्यास है।
भाग 1 — अपठित गद्यांश क्या है और CUET इसे कैसे पूछता है
Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.
अपठित का अर्थ है जो पढ़ा न गया हो। गद्यांश आपके पाठ्यक्रम से नहीं आता, इसलिए रटकर उत्तर नहीं दिया जा सकता। इसके बदले दो कौशल काम आते हैं: पढ़ते समय लेखक का मुख्य विचार पकड़ना और प्रश्न का उत्तर पंक्ति से जोड़कर देना। इस विषय में अंक इसलिए अधिक सुरक्षित हैं कि एक ही गद्यांश से कई प्रश्न बनते हैं। एक बार गद्यांश ठीक से समझ लिया तो कई प्रश्न एक साथ हल हो जाते हैं।
| गद्यांश का प्रकार | कैसा होता है | पढ़ते समय क्या खोजें |
|---|---|---|
| तथ्यात्मक या सूचनात्मक | विज्ञान, पर्यावरण, समाज, अर्थ जैसे विषय पर जानकारी | मुख्य बात, कारण, परिणाम, सुझाव |
| विचारात्मक | लेखक अपना मत रखता है, तर्क देता है | लेखक का पक्ष और उसके तर्क |
| कथात्मक | कोई घटना या पात्र, संवाद के साथ | घटना का क्रम, पात्र का स्वभाव, भाव |
| साहित्यिक | भावपूर्ण, लाक्षणिक भाषा | भाव, प्रतीक, कथन का आशय |
| प्रश्न का रूप | कैसा दिखता है |
|---|---|
| शीर्षक | "इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक होगा" |
| मुख्य भाव या संदेश | "गद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है" |
| तथ्य | "गद्यांश के अनुसार..." |
| अनुमान या निष्कर्ष | "गद्यांश से क्या निष्कर्ष निकलता है" |
| आशय | "रेखांकित पंक्ति का आशय" |
| असत्य कथन | "निम्न में कौन-सा कथन गद्यांश से सिद्ध नहीं होता" |
| लेखक का दृष्टिकोण | "लेखक का स्वर कैसा है" |
| शब्दार्थ और भाषा | पर्याय, विलोम, उपसर्ग-प्रत्यय, शब्द-भेद, वाक्य-रचना |
| पात्र और भाव (कथात्मक) | "इस घटना से माँ के स्वभाव का क्या पता चलता है" |
भाग 2 — पढ़ने की विधि, कारण सहित
चरण 1 — पहले पूरा गद्यांश एक बार पढ़ो, प्रश्न बाद में। कारण यह है कि प्रश्न पहले पढ़ोगे तो गद्यांश टुकड़ों में पढ़ोगे और समग्र भाव छूट जाएगा। शीर्षक और मुख्य भाव के प्रश्न पूरे गद्यांश पर ही निर्भर होते हैं।
चरण 2 — पढ़ते हुए केंद्रीय विचार को एक वाक्य में बाँधो। जैसे: "जल घट रहा है और हर नागरिक को उसे बचाना है।" यह एक वाक्य शीर्षक, मुख्य भाव और दृष्टिकोण, तीनों प्रश्नों की आधी राह पार करा देता है।
चरण 3 — संकेत-शब्दों पर रुको। "किंतु, परंतु, इसलिए, अतः, वस्तुतः, यदि... तो" जैसे शब्द बताते हैं कि लेखक अपना असली मत कहाँ रखता है। बाद वाली बात प्रायः अधिक महत्त्वपूर्ण होती है।
चरण 4 — हर प्रश्न पर लौटकर संबंधित पंक्ति ढूँढ़ो। स्मृति पर भरोसा मत करो। गद्यांश की पंक्ति सामने रखकर उत्तर चुनो, क्योंकि स्मृति में लेखक की बात और अपना विचार मिल जाते हैं।
चरण 5 — चार में से तीन विकल्प काटो। पहले सबसे स्पष्ट गलत को काटो (चरम शब्द, विषय-बाहर), फिर आधे-सही को, फिर बचे हुए दो में पंक्ति से मिलान करो।
चरण 6 — भाषा-ज्ञान के प्रश्न अंत में या पहले हल कर लो। शब्दार्थ और उपसर्ग-प्रत्यय पर आधारित प्रश्नों के लिए गद्यांश की पंक्ति दोबारा नहीं देखनी पड़ती, इसलिए ये सबसे तेज़ अंक हैं।
अभ्यास के लिए एक लक्ष्य रखो: एक गद्यांश पर पाँच से छह मिनट, जिसमें डेढ़ मिनट पढ़ना और बाकी समय प्रश्न। शुरू में अधिक लगेगा, पर अभ्यास से घटता जाता है।
भाग 3 — हर प्रश्न-प्रकार की तकनीक
| प्रश्न | तकनीक | कारण |
|---|---|---|
| शीर्षक | वह विकल्प जो पूरे गद्यांश को समेटे, न बहुत छोटा, न बहुत बड़ा | संकीर्ण शीर्षक एक पंक्ति का होता है, व्यापक शीर्षक विषय से बाहर चला जाता है |
| मुख्य भाव | पहले और अंतिम वाक्य, फिर संकेत-शब्द वाला वाक्य | लेखक प्रायः आरंभ में विषय और अंत में निष्कर्ष रखता है |
| तथ्य | प्रश्न के मुख्य शब्द को गद्यांश में खोजो, उत्तर उसके पास है | तथ्य-प्रश्न में उत्तर सीधे लिखा होता है |
| निष्कर्ष | पंक्ति से एक तार्किक कदम आगे | दो-तीन कदम की छलाँग गद्यांश से बाहर चली जाती है |
| आशय | रेखांकित पंक्ति को सरल शब्दों में बदलो, फिर विकल्प से मिलाओ | लाक्षणिक भाषा का शाब्दिक अर्थ प्रायः गलत होता है |
| असत्य कथन | तीन सही कथन पंक्तियों से सिद्ध करो, जो न सधे वही उत्तर | इस प्रश्न में उलटी सोच चाहिए, यानी जो सिद्ध नहीं होता |
| दृष्टिकोण | उन शब्दों को देखो जो लेखक के भाव बताते हैं | चेतावनी, प्रशंसा, व्यंग्य, चिंता सब शब्द-चयन से झलकते हैं |
| पात्र का स्वभाव | क्रिया और संवाद से अनुमान लगाओ | कथात्मक गद्यांश में स्वभाव कथन से नहीं, क्रिया से दिखता है |
| शब्दार्थ | प्रसंग से अर्थ तय करो | एक ही शब्द के प्रसंग के अनुसार कई अर्थ होते हैं |
भाग 4 — भ्रामक विकल्पों को पहचानिए
| प्रकार | कैसा दिखता है | क्यों ग़लत है |
|---|---|---|
| चरम शब्द | सदा, कभी नहीं, सब, केवल, एकमात्र | गद्यांश प्रायः निरपेक्ष दावे नहीं करता |
| बाहर से सही | सामान्य ज्ञान में सच, पर गद्यांश में नहीं | प्रश्न पूछता है कि गद्यांश क्या कहता है, दुनिया क्या कहती है यह नहीं |
| आधा सही | पहला भाग मेल खाए, दूसरा बदल दिया गया | पूरे विकल्प को पढ़कर ही मिलान करना होता है |
| उलटा | गद्यांश के शब्द वही, पर भाव उलटा | शब्दों की परिचितता से धोखा होता है |
| विषय-बाह्य | गद्यांश ने जो उठाया ही नहीं | उत्तर पंक्ति पर आधारित होना चाहिए |
| अति-संकीर्ण | एक उदाहरण को पूरा संदेश बना दिया | शीर्षक और मुख्य भाव पूरे गद्यांश के होते हैं |
| अति-व्यापक | गद्यांश के विषय से बड़ा दावा | गद्यांश उतना नहीं कहता |
भाग 5 — गद्यांश A (सूचनात्मक) और उसके प्रश्न
गद्यांश A. जल केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं है, वह खेत, कारखाने और जंगल, सबकी साँस है। फिर भी हम नल खुला छोड़ देते हैं, वर्षा के जल को नालियों में बह जाने देते हैं और धरती के भीतर से जल निरंतर खींचते जाते हैं। भूमि के नीचे जल के भंडार को भरने में बहुत लंबा समय लगता है, जबकि हम उसे थोड़े ही वर्षों में खाली कर देते हैं। यदि हमने वर्षा-जल को रोकना, कुओं और तालाबों को सँभालना तथा पानी का मितव्ययी उपयोग करना नहीं सीखा, तो आने वाली पीढ़ी के लिए जल केवल कहानियों में बचेगा। जल-संरक्षण किसी एक संस्था का नहीं, प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उदाहरण 1 (शीर्षक). उपयुक्त शीर्षक: (क) जल की कहानियाँ (ख) जल-संरक्षण: हर नागरिक का दायित्व (ग) भूजल का इतिहास (घ) वर्षा के लाभ। हल: गद्यांश का आरंभ जल के महत्त्व से, मध्य हमारी लापरवाही से और अंतिम वाक्य नागरिक के दायित्व से है। (क) केवल एक वाक्यांश "कहानियों में बचेगा" पर आधारित है। (ग) इतिहास की बात कहीं नहीं। (घ) वर्षा केवल उपाय का हिस्सा है। (ख) पूरे गद्यांश को समेटता है। उत्तर (ख)।
उदाहरण 2 (तथ्य). गद्यांश के अनुसार भूजल घटने का कारण: (क) वर्षा का न होना (ख) जल का निरंतर अत्यधिक दोहन और संरक्षण की उपेक्षा (ग) कुओं का सूख जाना (घ) जंगलों की कमी। हल: पंक्ति है "धरती के भीतर से जल निरंतर खींचते जाते हैं" और "थोड़े ही वर्षों में खाली कर देते हैं"। (क) और (घ) गद्यांश में कारण के रूप में नहीं आए। (ग) कुओं को सँभालना उपाय है, कारण नहीं। उत्तर (ख)।
उदाहरण 3 (निष्कर्ष). गद्यांश से कौन-सा निष्कर्ष निकलता है? (क) केवल सरकार जल बचा सकती है (ख) आदतें न बदलीं तो भावी पीढ़ी को जल-संकट होगा (ग) भूजल कभी नहीं भरता (घ) कारखाने जल के सबसे बड़े शत्रु हैं। हल: "यदि हमने... नहीं सीखा, तो आने वाली पीढ़ी के लिए जल केवल कहानियों में बचेगा", यह सीधे (ख) बनता है। (क) गद्यांश के अंतिम वाक्य के उलट है। (ग) में "कभी नहीं" चरम शब्द है, जबकि गद्यांश कहता है कि भरने में लंबा समय लगता है। (घ) कारखानों को शत्रु बताने की बात नहीं की गई। उत्तर (ख)।
उदाहरण 4 (शब्दार्थ). "मितव्ययी उपयोग" का अर्थ: (क) अधिक खर्च (ख) सोच-समझकर कम खर्च (ग) बिना खर्च (घ) चोरी से उपयोग। हल: मित का अर्थ कम, व्यय का अर्थ खर्च, और ई प्रत्यय "वाला" का अर्थ देता है। मितव्ययी = कम और सोच-समझकर खर्च करने वाला। उत्तर (ख)।
उदाहरण 5 (दृष्टिकोण). लेखक का स्वर: (क) निराशापूर्ण (ख) चेतावनी देने वाला और ज़िम्मेदारी जगाने वाला (ग) व्यंग्यात्मक (घ) तटस्थ विवरण। हल: "यदि... तो" वाली शर्त चेतावनी है और अंतिम वाक्य ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है। लेखक समाधान भी बताता है, इसलिए निराश नहीं। उत्तर (ख)।
भाग 6 — गद्यांश B (विचारात्मक) और उसके प्रश्न
गद्यांश B. समय ऐसा धन है जिसे खर्च तो सब करते हैं, पर कमाता कोई नहीं। बीता हुआ क्षण न बाज़ार में मिलता है, न प्रार्थना से लौटता है। जो विद्यार्थी आज का काम कल पर टालता है, वह वस्तुतः अपने भविष्य से ऋण लेता है, और उस ऋण का ब्याज उसे चिंता तथा हड़बड़ी के रूप में चुकाना पड़ता है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर क्षण को काम से भर दिया जाए। विश्राम और खेल भी आवश्यक हैं, किंतु वे योजना के भीतर होने चाहिए, योजना के विरुद्ध नहीं। समय का सच्चा प्रबंधन यही है कि हम जानें कि कब क्या करना है।
उदाहरण 6 (आशय). "समय ऐसा धन है जिसे खर्च तो सब करते हैं, पर कमाता कोई नहीं" का आशय: (क) समय बेचा जा सकता है (ख) समय सबका बीतता है, पर कोई उसे बढ़ा नहीं सकता (ग) धन समय से अधिक मूल्यवान है (घ) सब समय व्यर्थ गँवाते हैं। हल: पंक्ति के आगे लेखक कहता है कि बीता क्षण लौटता नहीं। यानी समय को बढ़ाया या वापस लाया नहीं जा सकता। (क) और (ग) में गद्यांश के विपरीत बात है। (घ) "सब" चरम शब्द है। उत्तर (ख)।
उदाहरण 7 (तथ्य). टालने वाला विद्यार्थी "भविष्य से ऋण" लेता है, तो उसका ब्याज क्या है? (क) जुर्माना (ख) चिंता और हड़बड़ी (ग) धन की हानि (घ) शिक्षक की डाँट। हल: गद्यांश में स्पष्ट लिखा है "ब्याज उसे चिंता तथा हड़बड़ी के रूप में चुकाना पड़ता है"। उत्तर (ख)।
उदाहरण 8 (असत्य कथन). गद्यांश के अनुसार कौन-सा कथन सही नहीं है? (क) विश्राम योजना के भीतर होना चाहिए (ख) बीता समय लौटाया जा सकता है (ग) कल पर टालना हानिकारक है (घ) हर क्षण काम से भरना आवश्यक नहीं। हल: (क) अंतिम भाग से सिद्ध, (ग) ऋण वाली पंक्ति से सिद्ध, (घ) "इसका अर्थ यह नहीं कि..." से सिद्ध। (ख) "बीता क्षण न बाज़ार में मिलता है, न प्रार्थना से लौटता है" के विपरीत है। उत्तर (ख)।
उदाहरण 9 (भाषा). "वस्तुतः" का अर्थ: (क) शायद (ख) वास्तव में (ग) अंततः (घ) प्रायः। हल: वस्तुतः = वस्तु + तः (प्रत्यय), अर्थ "असल में"। प्रसंग में भी "वह वास्तव में अपने भविष्य से ऋण लेता है" ठीक बैठता है। उत्तर (ख)।
उदाहरण 10 (भाषा). "विश्राम" का विलोम: (क) आराम (ख) श्रम (ग) शांति (घ) निद्रा। हल: विश्राम का अर्थ ही आराम है। उसका उलटा काम या परिश्रम, यानी श्रम। (क), (ग), (घ) समान अर्थ वाले हैं, इसलिए ग़लत। उत्तर (ख)।
भाग 7 — गद्यांश C (कथात्मक) और उसके प्रश्न
गद्यांश C. रात के ग्यारह बज चुके थे। सरला की माँ ने दूसरी बार आवाज़ दी, "बेटी, अब तो सो जा।" सरला ने किताब से सिर उठाए बिना कहा, "बस यह अध्याय पूरा कर लूँ, माँ।" माँ कुछ देर चुपचाप खड़ी रही। फिर रसोई से दूध का गिलास लाकर उसने मेज़ पर रख दिया और बत्ती की ओर बढ़ता अपना हाथ रोक लिया। उसकी आँखों में थकान थी, पर होंठों पर संतोष की हल्की-सी रेखा, मानो वह अपनी अधूरी पढ़ाई को बेटी की किताबों में पूरा होते देख रही हो।
उदाहरण 11 (अनुमान). माँ का बत्ती की ओर बढ़ता हाथ रोक लेना दर्शाता है: (क) माँ थक गई थी (ख) माँ ने बेटी की लगन का सम्मान किया (ग) माँ को पढ़ाई पसंद नहीं थी (घ) दूध ठंडा हो रहा था। हल: पहले माँ ने दो बार सोने को कहा, पर अब बत्ती बंद करने का हाथ रोक लिया। यह व्यवहार का बदलाव है। वह बेटी को पढ़ने देना चाहती है और दूध लाकर साथ भी दे रही है। (क) थकान आँखों में है, पर हाथ रोकने का कारण नहीं। (ग) गद्यांश के विपरीत। (घ) बत्ती से कोई संबंध नहीं। उत्तर (ख)।
उदाहरण 12 (पात्र का गुण). सरला के चरित्र का गुण: (क) आलस्य (ख) लगन (ग) लापरवाही (घ) हठ। हल: वह रात ग्यारह बजे भी अध्याय पूरा करने पर अड़ी है, पर यह माँ की बात का अपमान नहीं, पढ़ाई के प्रति निष्ठा है। उसने "बस यह अध्याय" कहकर माँ से अनुमति माँगी है। इसलिए (ख) लगन। (घ) हठ तब होता जब वह माँ की बात अनसुनी करती।
उदाहरण 13 (निहित अर्थ). "अपनी अधूरी पढ़ाई को बेटी की किताबों में पूरा होते देख रही हो" से क्या संकेत मिलता है? (क) माँ अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई थी और बेटी में अपना सपना पूरा होता देखती है (ख) माँ बहुत पढ़ी-लिखी है (ग) बेटी माँ से डरती है (घ) माँ पढ़ाई छुड़वाना चाहती है। हल: "अधूरी पढ़ाई" का सीधा अर्थ है पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी। संतोष की रेखा से पता चलता है कि वह बेटी की पढ़ाई में अपना अधूरा सपना पूरा होता देख रही है। (ख) और (घ) इस वाक्य के विपरीत हैं। (ग) का कोई आधार नहीं। उत्तर (क)।
उदाहरण 14 (शीर्षक). उपयुक्त शीर्षक: (क) रात की थकान (ख) माँ की मौन प्रेरणा (ग) दूध का गिलास (घ) अध्याय का अंत। हल: पूरे गद्यांश में माँ बिना कुछ कहे बेटी का साथ देती है। (क), (ग) केवल एक ब्योरे पर आधारित हैं, (घ) घटना का हिस्सा है, भाव नहीं। उत्तर (ख)।
भाग 8 — भाषा-ज्ञान के प्रश्न कैसे हल करें
गद्यांश से बने भाषा-प्रश्नों में शब्द का अर्थ प्रसंग से आता है, इसलिए उसकी रचना देखना सबसे तेज़ तरीका है।
| गद्यांश का शब्द | रचना | क्या पूछा जा सकता है |
|---|---|---|
| संरक्षण | सम् + रक्षण | उपसर्ग: सम्; विलोम: विनाश या उपेक्षा |
| निरंतर | निः + अंतर, विसर्ग का र् होना | अर्थ: लगातार; विलोम: रुक-रुककर |
| दायित्व | दायी + त्व | प्रत्यय: त्व; पर्याय: ज़िम्मेदारी |
| मितव्ययी | मित + व्यय + ई | अर्थ और प्रत्यय |
| वस्तुतः | वस्तु + तः | अर्थ: वास्तव में |
| प्रत्येक | प्रति + एक, यण संधि | संधि-विच्छेद |
| उपयोग | उप + योग | उपसर्ग और विलोम: दुरुपयोग |
| विश्राम | वि + श्राम | विलोम: श्रम |
भाग 9 — सामान्य भूलें
| भूल | क्यों लुभाती है | सही बात |
|---|---|---|
| प्रश्न पहले पढ़कर गद्यांश में उत्तर ढूँढ़ना | समय बचता लगता है | मुख्य भाव के प्रश्न चूक जाते हैं; पहले गद्यांश |
| सबसे सुंदर लगने वाला विकल्प चुनना | भाषा सुंदर लगती है | उत्तर वही जो पंक्ति से सिद्ध हो |
| दुनिया का सच चुन लेना | विकल्प सचमुच सही होता है | प्रश्न गद्यांश से पूछा जाता है |
| शीर्षक में एक उदाहरण पकड़ लेना | उदाहरण याद रह जाता है | शीर्षक पूरे गद्यांश का |
| असत्य कथन वाले प्रश्न में सही कथन चुन लेना | प्रश्न को जल्दी पढ़ना | "सही नहीं", "सिद्ध नहीं" ध्यान से पढ़ो |
| चरम शब्द वाले विकल्प का चयन | दृढ़ कथन प्रभावशाली लगता है | सदा, कभी नहीं जैसे शब्द प्रायः ग़लत |
| शब्दार्थ में सबसे प्रचलित अर्थ चुनना | परिचित अर्थ तुरंत याद आता है | प्रसंग और रचना देखो |
| कथात्मक में अपना अनुमान जोड़ना | कहानी पर अपनी कल्पना चढ़ती है | केवल वही मानो जो क्रिया या संवाद से झलके |
भाग 10 — तीव्र अभ्यास (हर अंश पर एक प्रश्न)
| क्र. | छोटा अंश | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|---|
| 1 | "विज्ञान ने मनुष्य को सुविधाएँ दीं, पर संतोष नहीं।" | मुख्य भाव | सुविधाओं से संतोष नहीं मिलता |
| 2 | "वृक्ष लगाने वाला अपने लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए लगाता है।" | निष्कर्ष | वृक्षारोपण भावी पीढ़ी के हित का काम है |
| 3 | "अंक सफलता का एक पैमाना हैं, पूरा जीवन नहीं।" | लेखक का दृष्टिकोण | संतुलित: अंक महत्त्वपूर्ण पर निर्णायक नहीं |
| 4 | "यदि सब अपने घर के आगे सफ़ाई रखें, तो पूरा मोहल्ला स्वच्छ रहेगा।" | निष्कर्ष | सामूहिक स्वच्छता व्यक्तिगत प्रयासों से बनती है |
| 5 | "वह चुपचाप उठा, कमरे में टहला और फिर उसी जगह आ बैठा।" | मन:स्थिति | बेचैनी या उलझन |
| 6 | विकल्प में "सदा" या "कभी नहीं" हो | संकेत | प्रायः गलत (चरम शब्द) |
| 7 | "परिश्रम" के लिए पर्याय | भाषा | मेहनत या श्रम |
| 8 | "निर्भय" का उपसर्ग | भाषा | निः (निर्) |
भाग 11 — अभ्यास-क्रम
| दिन | क्या करें | समय |
|---|---|---|
| 1 | भाग 2 की छह चरण-विधि और भाग 3 की तालिका पढ़ें | 20 मिनट |
| 2 | भाग 4 के भ्रामक विकल्प याद करें; गद्यांश A स्वयं हल करें, फिर मिलाएँ | 25 मिनट |
| 3 | गद्यांश B स्वयं हल करें; भाग 8 की तालिका दोहराएँ | 25 मिनट |
| 4 | गद्यांश C स्वयं हल करें; पात्र का स्वभाव क्रिया से पहचानने का अभ्यास | 25 मिनट |
| 5 | अख़बार या पत्रिका से एक अनुच्छेद चुनकर उसका शीर्षक और सार लिखें | 25 मिनट |
| 6 | प्रश्न-बैंक से दो गद्यांश, समय-सीमा छह मिनट प्रति गद्यांश | 20 मिनट |
| 7 | गलत उत्तरों का विश्लेषण: कौन-सा भ्रामक प्रकार था, यह लिखें | 30 मिनट |
रोज़ एक अनुच्छेद पढ़कर उसका मुख्य विचार एक वाक्य में लिखने की आदत सबसे अधिक काम की है। एक महीने में पठन की गति और समझ दोनों सुधर जाती हैं।
भाग 12 — यह विषय कहाँ जुड़ता है
गद्यांश के भाषा-प्रश्नों में पर्यायवाची शब्द, विलोम शब्द और उपसर्ग और प्रत्यय सीधे काम आते हैं। प्रसंग से शब्द का अर्थ तय करने के लिए अनेकार्थी शब्द पढ़िए। कविता पर आधारित प्रश्नों के लिए अपठित पद्यांश की विधि देखिए, और गद्यांश में आई कहावतों का आशय समझने के लिए लोकोक्तियाँ।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 42 more in the timed practice test.
Q1. 'संचार के साधनों ने सारे संसार को एक छोटे-से गाँव में बदल दिया' — इस कथन का अभिप्राय है—
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Answer: B
इसका अभिप्राय है कि संचार-साधनों के कारण दूरस्थ लोग भी सहज ही परस्पर जुड़ गए हैं, मानो सारा संसार एक छोटा गाँव हो।
Q2. 'जो व्यक्ति आज का कार्य कल पर टालता रहता है, वह अपने भविष्य को दरिद्र बना रहा होता है' — इस कथन से लेखक का तात्पर्य है कि—
▸ Show answer & explanation
Answer: C
यहाँ 'दरिद्र' का प्रयोग आर्थिक नहीं, अपितु लाक्षणिक रूप में हुआ है — टालमटोल से व्यक्ति भविष्य के संभावित अवसर और सफलता खो देता है।
Q3. लेखक के अनुसार धन और समय में मूल अंतर क्या है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि नष्ट धन परिश्रम से फिर पाया जा सकता है, परंतु बीता हुआ क्षण किसी मूल्य पर नहीं लौटाया जा सकता।
Q4. 'अनुशासन स्वतंत्रता का विरोधी नहीं, बल्कि उसका सच्चा रक्षक है' — इस कथन का तात्पर्य है—
▸ Show answer & explanation
Answer: C
लेखक का तात्पर्य है कि अनुशासन स्वच्छंदता पर अंकुश लगाकर वास्तविक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, अतः वह उसका विरोधी नहीं रक्षक है।
Q5. 'बूँद-बूँद से घड़ा भरता है' लोकोक्ति यहाँ किस भाव को पुष्ट करती है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
यह लोकोक्ति इस भाव को पुष्ट करती है कि छोटे-छोटे किंतु निरंतर किए गए प्रयासों से अंततः बड़ी उपलब्धि प्राप्त होती है।
Q6. लेखक के अनुसार वृक्ष किस अर्थ में 'उदार' हैं?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
गद्यांश में वृक्षों को इसलिए उदार कहा गया क्योंकि वे बिना किसी अपेक्षा के मनुष्य को छाया, फल और आश्रय देते रहते हैं।
Q7. गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन लेखक के विचारों के विरुद्ध है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
लेखक भाग्यवाद की आलोचना करते हैं और कर्म पर बल देते हैं; अतः 'केवल भाग्य ही पर्याप्त है' कथन उनके विचारों के विरुद्ध है।
Q8. इस गद्यांश में लेखक का समग्र दृष्टिकोण क्या है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
लेखक न तो विज्ञान की एकपक्षीय प्रशंसा करते हैं न निंदा; वे इसे तटस्थ उपकरण मानते हैं जिसका परिणाम मनुष्य के विवेक पर निर्भर है।
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