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पद्यांश (Poetry Comprehension)

पद्यांश (Poetry Comprehension) is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 35 in a timed practice test to build exam-day speed.

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एक नज़र में

भाग 1 — पद्यांश के प्रश्न क्या परखते हैं

प्रकार प्रश्न का रूप मुख्य कौशल
शाब्दिक भाव "पंक्ति में कवि क्या कहता है?" सरल भावार्थ
केंद्रीय विषय "पद्यांश का मुख्य भाव?" पूरे पद्य का विचार
अलंकार "किस अलंकार का प्रयोग है?" उपमा/रूपक/अनुप्रास आदि
रस "कौन-सा रस है?" स्थायी भाव से रस
बिंब/इंद्रिय "बिंब किस इंद्रिय का?" दृश्य/श्रव्य/स्पर्श आदि
शब्दार्थ "रेखांकित शब्द का अर्थ?" प्रसंग से अर्थ

भाग 2 — पद्यांश पढ़ने की विधि

  1. पूरा पद्यांश दो बार पढ़ो — एक बार शाब्दिक चित्र के लिए, दूसरी बार भाव के लिए। कविता छोटी होती है; दूसरी बार पढ़ना सस्ता और लाभकारी।
  2. हर पंक्ति का गद्य-भावार्थ करो — "दो राहें फूटीं वन में" → जंगल में दो रास्ते अलग हुए; काव्य को सरल गद्य में खोलो।
  3. गहरा भाव पकड़ो — कवि वास्तव में किस बारे में कह रहा है? "दो राहें" = जीवन के निर्णय। सतह = रास्ते; भाव = चुनाव।
  4. रस/अलंकार/बिंब पहचानो — चिह्नों से (जैसे/मानो → उपमा/उत्प्रेक्षा; मूल भाव → रस)।

भाग 3 — भाव/स्वर शब्दावली (सटीक नाम दें)

सकारात्मक नकारात्मक अन्य
हर्ष, उल्लास, आशा विषाद, शोक, निराशा चिंतन, स्मृति
उत्साह, प्रेम, श्रद्धा क्रोध, भय, घृणा वैराग्य, करुणा
विस्मय, गर्व विरह, वेदना शांति, मनन

परीक्षा प्रायः दो समान स्वर (जैसे "शोक" और "विरह") देती है; पंक्ति के विशेष शब्द जिस सूक्ष्म भाव को सिद्ध करें, वही चुनें।

भाग 4 — काव्य में बिंब (इंद्रिय-चित्र)

कवि इंद्रिय-चित्रों से भाव जगाता है:

भाग 5 — एक आदर्श विधि (उदाहरण-तर्क)

मान लीजिए पद्यांश में कवि ढलते सूरज को देखकर जीवन की क्षणभंगुरता पर सोचता है। शाब्दिक प्रश्न "कवि किसे देख रहा है?" का उत्तर सरल है — डूबता सूरजकेंद्रीय भाव प्रश्न "सूरज किसका प्रतीक है?" का उत्तर गहरा है — जीवन की नश्वरता/समय का बीतना, क्योंकि कवि ढलते सूरज को बीतते जीवन से जोड़ता है। रस प्रश्न में, यदि कवि शांत-भाव से चिंतन करता है, तो रस शांत है (निर्वेद), "भयानक" नहीं। अलंकार प्रश्न में "सूरज मानो थक कर सो गया" → उत्प्रेक्षा (मानो) तथा मानवीकरण (सूरज का सोना)। ध्यान दें — शाब्दिक प्रश्न सतह से, भाव-प्रश्न आपके खोले गहरे अर्थ से, और अलंकार-प्रश्न चिह्न से हल होते हैं, और हर उत्तर पंक्तियों से प्रमाणित।

भाग 6 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)

भाग 7 — भावार्थ-पहले विधि ही प्रमुख कुंजी क्यों है

अधिकांश विद्यार्थी पद्यांश से इसलिए घबराते हैं कि वे सीधे "गहरे अर्थ" तक छलाँग लगाना चाहते हैं और या तो अटक जाते हैं या मनमाना अनुमान लगा बैठते हैं। इसका सरल उपचार है — विनम्र भावार्थ। किसी भी व्याख्या से पहले हर पंक्ति को सरल गद्य में खोलिए — कौन, क्या, कहाँ कर रहा है, केवल शाब्दिक स्तर पर। "दो राहें फूटीं पीले वन में" का भावार्थ हुआ "शरद ऋतु के जंगल में दो रास्ते अलग हो गए" — कुछ भी चतुर नहीं, बस स्पष्ट। एक बार शाब्दिक चित्र पक्का हो जाए, तो लाक्षणिक अर्थ प्रायः स्वयं खुल जाता है, क्योंकि प्रतीक और रूपक शाब्दिक चित्र के ऊपर बनते हैं, उसके स्थान पर नहीं — दो रास्ते सचमुच रास्ते भी हैं और जीवन के निर्णय के प्रतीक भी; ढलता दीपक सचमुच दीपक भी है और मिटते जीवन का प्रतीक भी। भावार्थ-पहले विधि आपको दोनों चरम भूलों से बचाती है — केवल शाब्दिक रह जाना (और प्रतीक चूक जाना) तथा अति-कल्पना (पंक्तियों से असमर्थित अर्थ गढ़ना) — क्योंकि यह आपको पृष्ठ पर लिखे से बाँधे रखती है और साथ ही एक कदम गहरे जाने देती है। इसलिए नियम बना लीजिए — किसी पद्यांश-प्रश्न का उत्तर तब तक मत दीजिए जब तक संबंधित पंक्तियों का सरल भावार्थ अपने शब्दों में न कह सकें। इसी सुरक्षित आधार से केंद्रीय भाव, रस, अलंकार और बिंब — सब उत्तर देने योग्य हो जाते हैं, और पद्यांश, जो परीक्षा का सबसे भयप्रद भाग लगता है, सबसे संतोषप्रद बन जाता है।

भाग 8 — इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें

हर अभ्यास-पद्यांश दो बार पढ़ें, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ करें (भाग 2), फिर केंद्रीय भाव, स्वर (भाग 3), बिंब (भाग 4), अलंकार व रस पहचानें। शाब्दिक प्रश्न सतह से और प्रतीक/भाव प्रश्न अपने खोले अर्थ से हल करें, और हर उत्तर पंक्तियों से जोड़ें। भाग 6 के भ्रमों, विशेषकर अति-कल्पना और स्वर-तीव्रता पर ध्यान दें।

एक पंक्ति का सार: पहले हर पंक्ति का सरल गद्य-भावार्थ करो, फिर केंद्रीय भाव, रस, अलंकार व बिंब पहचानो; प्रतीक उतना ही खोलो जितना पंक्तियाँ समर्थन दें, और हर उत्तर पाठ से प्रमाणित करो।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 27 more in the timed practice test.

Q1. इस पद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?

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Answer: B

पूरा पद्यांश वृक्ष द्वारा निःस्वार्थ भाव से छाया, फल व उपकार देने के संदेश पर केन्द्रित है, अतः 'वृक्ष का परोपकार-संदेश' सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है।

Q2. इस पद्यांश में दीपक के माध्यम से कवि कौन-सा जीवन-मूल्य प्रकट करता है?

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Answer: B

दीपक जल-जलकर अपना तन झराकर भी जग को प्रकाश देता है — यह आत्मत्याग द्वारा परहित/परोपकार के मूल्य को दर्शाता है।

Q3. "मत पूछ कहाँ तक चलना है, बस पाँव बढ़ाते जाना है" से कवि का क्या आशय है?

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Answer: A

कवि कहता है कि मंज़िल कितनी दूर है यह पूछने/चिंता करने के बजाय निरंतर कदम बढ़ाते रहना ही श्रेयस्कर है — अर्थात सतत प्रयत्नशीलता।

Q4. "वर्षा में कागज़ की नौका" किस ओर संकेत करती है?

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Answer: A

वर्षा के पानी में कागज़ की नाव तैराना बचपन का एक सहज, निर्मल खेल है; यह बीते दिनों के निर्दोष कौतुक का प्रतीक है।

Q5. इस पद्यांश में बादल के आगमन से उत्पन्न प्रमुख भाव क्या है?

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Answer: B

बादल के बरसने से खेत हँसते हैं, किसान मुस्कुराता है, नदियाँ-कलियाँ-वन सब जीवंत हो उठते हैं — सर्वत्र हर्ष, आशा व जीवन-संचार का भाव है।

Q6. "कल-कल" शब्द में कौन-सा अलंकार विद्यमान है?

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Answer: C

'कल-कल' जल के प्रवाह की ध्वनि का अनुकरण करता पुनरुक्त शब्द है, जिसमें वर्ण-आवृत्ति से अनुप्रास/पुनरुक्तिप्रकाश का सौंदर्य आता है।

Q7. "मौन रहे पर काम करे" पंक्ति किस प्रकार के व्यक्तित्व की ओर संकेत करती है?

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Answer: B

मौन रहकर भी काम करना अर्थात बिना प्रचार-दिखावे के चुपचाप अच्छे कार्य करने वाले निष्काम व्यक्तित्व का संकेत है।

Q8. "धरती की प्यासी पलक, तकती नभ की ओर" में कौन-सा अलंकार प्रमुख है?

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Answer: B

धरती को प्यासी पलकों से आकाश की ओर ताकते हुए मनुष्य-सा दिखाया गया है, अतः जड़ धरती में मानवीय व्यवहार के आरोप से मानवीकरण अलंकार है।

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