पद्यांश (Poetry Comprehension)
पद्यांश (Poetry Comprehension) is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 35 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- अपठित पद्यांश (काव्यांश) में एक छोटी कविता या पद्य-अंश दिया जाता है और उस पर भाव, आशय, शब्दार्थ, अलंकार, बिंब, प्रतीक और शिक्षा के प्रश्न पूछे जाते हैं। उत्तर कविता के भीतर से ही बनते हैं।
- कविता का अर्थ अक्सर शब्दों से गहरा होता है। "दीप" केवल दीया नहीं, आशा भी हो सकता है। इसलिए शाब्दिक अर्थ से ऊपर उठकर लक्षित अर्थ तक जाना ही इस विषय की मुख्य कला है।
- कुंजी है: पहले हर पंक्ति को सरल गद्य में खोलो (भावार्थ), फिर पूरी कविता का भाव पकड़ो, और अंत में अलंकार, बिंब या प्रतीक पहचानो। भाव बिना पंक्ति के आधार के मत चुनो।
- इस पृष्ठ में चार पद्यांश हैं (तीन मौलिक और कबीर का एक दोहा), जिन पर 15 प्रश्न हल सहित हैं, साथ में भाव-शब्दावली, प्रतीक-तालिका, शब्द-शक्ति, भूलें और तीव्र अभ्यास है।
भाग 1 — अपठित पद्यांश क्या है और CUET इसे कैसे पूछता है
Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.
कविता कम शब्दों में अधिक कहती है। इसलिए पद्यांश के प्रश्न केवल "क्या लिखा है" नहीं पूछते, वे पूछते हैं "कवि क्या कहना चाहता है" और "उसने कैसे कहा।" पहला प्रश्न भाव का है, दूसरा शिल्प का। दोनों के लिए अलग उपकरण चाहिए, जिन्हें इस पृष्ठ में क्रम से रखा गया है।
| प्रश्न का रूप | कैसा दिखता है | क्या परखता है |
|---|---|---|
| केंद्रीय भाव | "पद्यांश का मूल भाव" | पूरी कविता का सार |
| पंक्ति का आशय | "रेखांकित पंक्ति से कवि का क्या तात्पर्य" | लाक्षणिक अर्थ |
| शीर्षक या संदेश | "उपयुक्त शीर्षक या शिक्षा" | भाव का सार |
| अलंकार | "किस अलंकार का प्रयोग है" | उपमा, रूपक, मानवीकरण, अनुप्रास आदि |
| बिंब | "किस इंद्रिय का बिंब है" | दृश्य, श्रव्य, स्पर्श आदि |
| प्रतीक | "दीप किसका प्रतीक है" | प्रतीक का प्रसंग |
| भाव या स्वर | आशा, कृतज्ञता, चेतावनी, व्यंग्य | सूक्ष्म भाव |
| शब्दार्थ | "रेखांकित शब्द का अर्थ" | प्रसंग से अर्थ |
| रस या छंद | रस पहचानना, मात्रा गिनना | भाव और लय का ज्ञान |
| भाषा-ज्ञान | पर्याय, विलोम, तत्सम-तद्भव | शब्द-भंडार |
भाग 2 — पढ़ने की विधि, कारण सहित
चरण 1 — कविता दो बार पढ़ो। पहली बार चित्र के लिए (कौन, कहाँ, क्या हो रहा है), दूसरी बार भाव के लिए (कवि कैसा अनुभव कर रहा है)। कविता छोटी होती है, इसलिए दूसरा पाठ समय नहीं खाता, पर समझ बहुत बढ़ाता है।
चरण 2 — हर पंक्ति को सरल गद्य में खोलो। जैसे "रात कितनी ही घनेरी हो, सुबह फिर आएगी" का भावार्थ है "अँधेरा कितना भी गहरा हो, उजाला फिर आएगा।" यह तरीका इसलिए काम करता है कि काव्य की भाषा संकेतों में चलती है और गद्य में खोलने पर विकल्पों से सीधा मिलान हो जाता है।
चरण 3 — संकेत से अर्थ तक पहुँचो। पूछो कि यह वस्तु या दृश्य जीवन के किस अनुभव का संकेत है। रात = कठिन समय, सुबह = नई आशा, दीप = प्रयास। प्रतीक-तालिका (भाग 4) इसमें मदद करती है।
चरण 4 — पूरी कविता का भाव एक वाक्य में बाँधो। चारों पंक्तियाँ मिलकर क्या कहती हैं? यह वाक्य शीर्षक, संदेश और मूल भाव के प्रश्नों का आधार बनता है।
चरण 5 — शिल्प के चिह्न पहचानो। "सा, सी, जैसी" हों तो उपमा, एक वर्ण की आवृत्ति हो तो अनुप्रास, निर्जीव में मानव-क्रिया हो तो मानवीकरण। इसके लिए अलंकार की निर्णय-तालिका काम आती है।
चरण 6 — विकल्प पंक्ति से मिलाओ। जो विकल्प कविता की किसी पंक्ति से जुड़ता है वही चुनो। कविता में कवि ने जो कहा नहीं, उसे अपनी ओर से मत जोड़ो।
भाग 3 — भाव और स्वर की शब्दावली
कविता का स्वर ठीक नाम देकर पहचानना पड़ता है, क्योंकि विकल्पों में प्रायः समान दिखते दो-दो भाव रखे जाते हैं।
| वर्ग | भाव | कब लगाएँ |
|---|---|---|
| सकारात्मक | आशा, उत्साह, उल्लास, प्रसन्नता, गर्व | उजाला, जीत, आगे बढ़ने की बात |
| नकारात्मक | निराशा, विषाद, शोक, भय, क्रोध, घृणा | अँधेरा, हार, हानि, अन्याय |
| स्मृति और चिंतन | स्मृति, पश्चाताप, चिंतन, वैराग्य | बीते समय या जीवन-सत्य की बात |
| करुणा और संवेदना | करुणा, सहानुभूति, कृतज्ञता, ममता | दुखी या उपकारी के प्रति |
| प्रेरणा और संदेश | प्रेरणा, आह्वान, चेतावनी, उपदेश | "उठो, चलो, करो" जैसे संबोधन |
| व्यंग्य | उपहास, कटाक्ष | विरोधी बात को तीखे ढंग से कहना |
सूक्ष्म जोड़े जिनमें परीक्षा भ्रम पैदा करती है: निराशा और विषाद (निराशा आशा खो देना है, विषाद दुख में डूबना), कृतज्ञता और प्रशंसा (कृतज्ञता उपकार का आभार है, प्रशंसा गुण की सराहना), आशा और उत्साह (आशा भविष्य के प्रति विश्वास है, उत्साह कर्म की उमंग), चेतावनी और उपदेश (चेतावनी संभावित हानि की सूचना है, उपदेश सीख देना)। इन जोड़ों में हमेशा पंक्ति के खास शब्द देखो।
भाग 4 — बिंब, प्रतीक और शब्द-शक्ति
बिंब. कवि इंद्रियों को स्पर्श करने वाले चित्र बनाता है। जिस इंद्रिय से चित्र बने वही उसका बिंब है।
| बिंब | इंद्रिय | उदाहरण |
|---|---|---|
| दृश्य | आँख | खेत सोने-से हुए |
| श्रव्य | कान | कोयलों ने गीत गाए |
| स्पर्श | त्वचा | ठंडी हवा का कोमल स्पर्श |
| घ्राण | नाक | गीली मिट्टी की सोंधी गंध |
| स्वाद | जीभ | नीम की कड़वाहट जैसा सच |
| गतिशील | गति की अनुभूति | लहरों का उठना-गिरना |
प्रतीक. प्रतीक वह वस्तु है जो किसी बड़े भाव को स्थानापन्न करती है। प्रसंग देखकर ही अर्थ तय करो।
| प्रतीक | सामान्य अर्थ |
|---|---|
| दीप, दीपक | आशा, ज्ञान, प्रयास |
| अँधेरा, रात | कठिनाई, अज्ञान, निराशा |
| सुबह, भोर | नई आशा, जागरण, नया आरंभ |
| सूर्य | तेज, ऊर्जा, सत्य |
| नदी | जीवन का प्रवाह, गति |
| पर्वत | दृढ़ता या बाधा, प्रसंग के अनुसार |
| पतझड़ | दुख या अंत |
| वसंत | आनंद, नया जीवन |
| पिंजरा | बंधन, पराधीनता |
| पंछी, उड़ान | स्वतंत्रता, आकांक्षा |
| नाव, पतवार | जीवन, कर्म |
| काँटे | बाधाएँ, कष्ट |
शब्द-शक्ति. शब्द अर्थ तीन ढंग से देता है। अभिधा में सीधा, प्रचलित अर्थ मिलता है। लक्षणा में सीधा अर्थ बाधित होने पर उससे जुड़ा दूसरा अर्थ लिया जाता है। व्यंजना में अर्थ संकेत से निकलता है।
| शक्ति | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अभिधा | सीधा, कोशगत अर्थ | सूरज निकल आया (सूरज का उगना) |
| लक्षणा | सीधा अर्थ न बैठे तो संबंधित अर्थ | गंगा में घर है (गंगा के किनारे) |
| व्यंजना | संकेतित, ध्वनित अर्थ | सूरज डूब गया (समय बीत गया, अब चलो) |
कविता में अधिकतर प्रश्न "आशय" और "तात्पर्य" के होते हैं, जो लक्षणा और व्यंजना पर ही टिके हैं। इसीलिए शाब्दिक अर्थ वाला विकल्प प्रायः गलत होता है।
भाग 5 — पद्यांश P1 (आशा) और उसके प्रश्न
पद्यांश P1. रात कितनी ही घनेरी हो, सुबह फिर आएगी; दीप छोटा ही सही, वह राह तो दिखलाएगी। जो थके पर रुक न पाए, मंज़िलें उनको मिलीं; जो डरे अँधियार से, उनकी सुबह सोती रही॥
उदाहरण 1 (मूल भाव). पद्यांश का मूल भाव: (क) रात से भय (ख) कठिनाई में भी आशा और निरंतर प्रयास का महत्त्व (ग) दीपक की महिमा (घ) थकान की पीड़ा। हल: भावार्थ खोलो। पहली दो पंक्तियाँ: अँधेरा कितना भी हो उजाला आएगा, छोटा प्रयास भी रास्ता दिखाता है। अंतिम दो: जो चलते रहे उन्हें मंज़िल मिली, जो डर गए वे अवसर चूक गए। चारों पंक्तियों का साझा संदेश (ख) है। (क) और (घ) विषय के एक पहलू पर, (ग) एक प्रतीक पर आधारित हैं। उत्तर (ख)।
उदाहरण 2 (प्रतीक). "दीप छोटा ही सही" में दीप किसका प्रतीक है? (क) सूर्य का (ख) छोटे प्रयास या आशा का (ग) दीपावली का (घ) अँधेरे का। हल: दीप का काम अँधेरे में राह दिखाना है। "छोटा ही सही" कहकर कवि कहता है कि छोटा प्रयास भी रास्ता दे सकता है। (क) सूर्य बड़ा है, (घ) अँधेरे का विरोधी है। उत्तर (ख)।
उदाहरण 3 (अलंकार). "उनकी सुबह सोती रही" में अलंकार: (क) उपमा (ख) मानवीकरण (ग) यमक (घ) विरोधाभास। हल: सुबह एक समय है, पर कवि उसके सोने की बात करता है, जो मनुष्य की क्रिया है। निर्जीव या अमूर्त पर मानव-क्रिया का आरोप मानवीकरण है। "सा, सी" जैसा वाचक नहीं, इसलिए उपमा नहीं। उत्तर (ख)।
उदाहरण 4 (शब्दार्थ). "घनेरी" का अर्थ: (क) हल्की (ख) गहरी या सघन (ग) लंबी (घ) शांत। हल: घन का अर्थ है गहरा या ठोस, जैसे घनघोर। रात के साथ "घनेरी" का अर्थ गहरी, सघन रात है। उत्तर (ख)।
उदाहरण 5 (भाव). कवि का स्वर: (क) निराशावादी (ख) आशावादी और प्रेरक (ग) व्यंग्यात्मक (घ) चिंतित। हल: पहली पंक्ति से अंत तक आश्वासन है, "आएगी", "दिखलाएगी", और संबोधन पाठक को डटे रहने की ओर ले जाता है। अंतिम पंक्ति में डरने वालों की हानि चेतावनी जैसी है, पर कुल स्वर प्रेरणा का है। उत्तर (ख)।
भाग 6 — पद्यांश P2 (प्रकृति) और उसके प्रश्न
पद्यांश P2. भोर ने घूँघट उठाया, खेत सोने-से हुए, ओस की बूँदें बिखरकर मोतियों जैसी हुईं। पवन ने डाली झुलाई, कोयलों ने गीत गाए, गाँव की हर राह पर फिर जागरण के पल आए॥
उदाहरण 6 (अलंकार). "खेत सोने-से हुए" में अलंकार: (क) रूपक (ख) उपमा (ग) अतिशयोक्ति (घ) यमक। हल: "सोने-से" में "से" वाचक है और खेतों (उपमेय) की तुलना सोने (उपमान) से की गई है। रूपक में वाचक नहीं होता। उत्तर (ख) उपमा।
उदाहरण 7 (अलंकार). "भोर ने घूँघट उठाया" में अलंकार: (क) उपमा (ख) मानवीकरण (ग) अनुप्रास (घ) श्लेष। हल: भोर समय है, पर उसे घूँघट उठाती नववधू की तरह दिखाया गया है। मानव-क्रिया का आरोप है। उत्तर (ख)। यही अलंकार "पवन ने डाली झुलाई" में भी है।
उदाहरण 8 (बिंब). "कोयलों ने गीत गाए" में किस इंद्रिय का बिंब है? (क) दृश्य (ख) श्रव्य (ग) स्पर्श (घ) घ्राण। हल: गीत सुना जाता है, इसलिए कान से जुड़ा श्रव्य बिंब। "खेत सोने-से" दृश्य बिंब है, इन दोनों को मिलाओ मत। उत्तर (ख)।
उदाहरण 9 (भाव). पद्यांश का स्वर: (क) शोक (ख) नए दिन का उल्लास और प्रसन्नता (ग) चिंता (घ) क्रोध। हल: सोने जैसे खेत, मोती जैसी ओस, गीत और जागरण, सब सुखद चित्र हैं। विषाद, चिंता या क्रोध का कोई संकेत नहीं। उत्तर (ख)।
भाग 7 — पद्यांश P3 (श्रम का सम्मान) और उसके प्रश्न
पद्यांश P3. धूप में तपकर पसीना जो बहाता रात-दिन, अन्न के हर दाने में है बस उसी का मौन ऋण। हम सजाते थालियाँ, पर भूल जाते हैं उसे, जो स्वयं भूखा भी रहकर पेट सबका है भरता॥
उदाहरण 10 (आशय). "मौन ऋण" का आशय: (क) चुपचाप चुकाया गया कर्ज़ (ख) वह उपकार जिसका बोझ हम पर है, पर जिसे कोई जताता नहीं (ग) बैंक का कर्ज़ (घ) चुप रहने की सज़ा। हल: ऋण का अर्थ यहाँ धन का कर्ज़ नहीं, उपकार का आभार है। "मौन" इसलिए कि जिसने उपकार किया वह कुछ कहता नहीं। इसलिए शाब्दिक अर्थ वाले (क), (ग), (घ) छूट जाते हैं। उत्तर (ख)।
उदाहरण 11 (संकेत). कविता में "जो धूप में तपकर पसीना बहाता है" किसकी ओर संकेत है? (क) व्यापारी (ख) किसान और श्रमिक (ग) शिक्षक (घ) सैनिक। हल: पंक्ति "अन्न के हर दाने में" और "पेट सबका है भरता" बताती है कि वह अन्न उपजाने वाला है, यानी किसान या श्रमिक। उत्तर (ख)।
उदाहरण 12 (भाव और संदेश). कवि हमसे क्या अपेक्षा करता है? (क) अन्न की बचत (ख) श्रम करने वालों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान (ग) खेती अपनाना (घ) थाली सजाना। हल: "भूल जाते हैं उसे" में कवि की शिकायत है कि हम उसे याद नहीं करते। अपेक्षा याद करना और आभार मानना है। (क) और (ग) कविता में नहीं हैं, (घ) एक उदाहरण का हिस्सा है। उत्तर (ख)।
भाग 8 — पद्यांश P4 (कबीर का दोहा) और उसके प्रश्न
पद्यांश P4. जहाँ दया तहँ धर्म है, जहाँ लोभ तहँ पाप। जहाँ क्रोध तहँ काल है, जहाँ क्षमा तहँ आप॥ (कबीर)
उदाहरण 13 (भावार्थ). दोहे का भावार्थ: (क) दया और क्षमा कमज़ोरी हैं (ख) जहाँ दया है वहाँ धर्म, लोभ है वहाँ पाप, क्रोध है वहाँ विनाश और क्षमा है वहाँ स्वयं परमात्मा का वास (ग) लोभ से धर्म बढ़ता है (घ) क्रोध से शक्ति मिलती है। हल: "तहँ" का अर्थ "वहाँ" है। चारों जोड़ियों को पढ़ो: दया-धर्म, लोभ-पाप, क्रोध-काल, क्षमा-आप (परमात्मा)। (क), (ग), (घ) दोहे के विपरीत हैं। उत्तर (ख)।
उदाहरण 14 (छंद). इस दोहे की पहली पंक्ति की मात्राएँ गिनकर छंद की पुष्टि कीजिए। हल: जहाँ दया तहँ धर्म है: ज1 हाँ2 = 3, द1 या2 = 3, त1 हँ1 = 2, धर्म = ध2 म1 = 3 (धर्म में संयुक्ताक्षर से पहले का ध गुरु), है2; कुल 3+3+2+3+2 = 13। जहाँ लोभ तहँ पाप: ज1 हाँ2 = 3, लो2 भ1 = 3, त1 हँ1 = 2, पा2 प1 = 3; कुल 11। 13 और 11 मात्रा, इसलिए दोहा।
उदाहरण 15 (शिक्षा). इस दोहे की मुख्य सीख: (क) सत्ता की प्राप्ति (ख) दया और क्षमा जैसे गुण अपनाओ तथा लोभ और क्रोध त्यागो (ग) धर्म का प्रचार करो (घ) शत्रु से बदला लो। हल: दोहा दो गुणों (दया, क्षमा) की प्रशंसा और दो दोषों (लोभ, क्रोध) की निंदा करता है, इसलिए सीख है (ख)। (ग) धर्म का प्रचार दोहे में नहीं। (घ) क्षमा के उलट। उत्तर (ख)।
भाग 9 — भ्रामक विकल्प और सामान्य भूलें
| भूल | क्यों लुभाती है | सही बात |
|---|---|---|
| शाब्दिक अर्थ चुनना | शब्द सीधे समझ आते हैं | कविता में लक्षणा और व्यंजना; संकेत से अर्थ लो |
| एक पंक्ति के आधार पर पूरी कविता का भाव तय करना | सबसे अलग पंक्ति याद रहती है | सभी पंक्तियों का साझा संदेश |
| प्रतीक का अर्थ हमेशा एक मानना | तालिका में एक अर्थ दिखता है | प्रसंग देखकर ही तय करो |
| उपमा और रूपक में वाचक न देखना | दोनों में तुलना है | सा, सी, से हों तो उपमा |
| मानवीकरण और रूपक एक समझना | दोनों में आरोप है | मानवीकरण में निर्जीव पर मानव-क्रिया |
| बिंब का नाम ग़लत इंद्रिय से जोड़ना | एक पंक्ति में कई बिंब होते हैं | जिस पद की ओर प्रश्न है, उसकी इंद्रिय देखो |
| कविता में न कही बात जोड़ना | अपने ज्ञान से उत्तर बनता है | उत्तर पंक्ति पर आधारित हो |
| समान दिखते भाव (निराशा, विषाद) में गलत चुनाव | विकल्प पास-पास रखे जाते हैं | पंक्ति के विशेष शब्द देखो |
भाग 10 — तीव्र अभ्यास
| क्र. | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | "पतझड़" किसका प्रतीक है | दुख या अंत का |
| 2 | "भोर" किसका प्रतीक है | नई आशा, जागरण का |
| 3 | "पिंजरे का पंछी" किसका संकेत देता है | पराधीनता या बंधन का |
| 4 | "ठंडी हवा का कोमल स्पर्श" किस इंद्रिय का बिंब है | स्पर्श |
| 5 | "रात भर रोई नदी" में अलंकार | मानवीकरण |
| 6 | "नयन-कमल" में अलंकार | रूपक |
| 7 | "गंगा पर घर है" में शब्द-शक्ति | लक्षणा (गंगा के किनारे) |
| 8 | "सूरज डूब गया" से संकेत | व्यंजना: समय बीत गया |
| 9 | आशा, उल्लास, उत्साह किस वर्ग के भाव हैं | सकारात्मक |
| 10 | "उनकी सुबह सोती रही" का निहित अर्थ | उन्होंने अवसर खो दिया |
| 11 | निराला ने किस छंद को विशेष अपनाया | मुक्त छंद |
| 12 | कविता का आशय किससे तय होता है | पंक्तियों के संकेत और पूरे प्रसंग से |
भाग 11 — अभ्यास-क्रम
| दिन | क्या करें | समय |
|---|---|---|
| 1 | भाग 2 की छह चरण-विधि, भाग 3 का भाव-शब्दकोश | 20 मिनट |
| 2 | भाग 4 के बिंब, प्रतीक और शब्द-शक्ति याद करें | 25 मिनट |
| 3 | P1 और P2 स्वयं हल करें, फिर मिलाएँ | 25 मिनट |
| 4 | P3 और P4 स्वयं हल करें; दोहे की मात्राएँ गिनें | 25 मिनट |
| 5 | पाठ्यपुस्तक की किसी कविता के चार पंक्ति का भावार्थ गद्य में लिखें | 25 मिनट |
| 6 | भाग 10 का तीव्र अभ्यास और अलंकार की निर्णय-तालिका दोहराएँ | 20 मिनट |
| 7 | प्रश्न-बैंक से दो पद्यांश, समय-सीमा पाँच मिनट प्रति पद्यांश | 30 मिनट |
रोज़ एक कविता की चार पंक्तियों का भावार्थ और एक प्रतीक या बिंब लिखने की आदत डालो। यही अभ्यास पद्यांश के प्रश्नों का सीधा रूप है।
भाग 12 — यह विषय कहाँ जुड़ता है
पद्यांश के शिल्प-प्रश्नों के लिए अलंकार और रस और छंद आधार हैं। पठन-समझ की सामान्य विधि अपठित गद्यांश में है, और शब्दार्थ के प्रश्नों में अनेकार्थी शब्द तथा पर्यायवाची शब्द सीधे काम आते हैं। कविता में आई कहावतों के आशय के लिए लोकोक्तियाँ पढ़िए।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 27 more in the timed practice test.
Q1. इस पद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
पूरा पद्यांश वृक्ष द्वारा निःस्वार्थ भाव से छाया, फल व उपकार देने के संदेश पर केन्द्रित है, अतः 'वृक्ष का परोपकार-संदेश' सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है।
Q2. इस पद्यांश में दीपक के माध्यम से कवि कौन-सा जीवन-मूल्य प्रकट करता है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
दीपक जल-जलकर अपना तन झराकर भी जग को प्रकाश देता है — यह आत्मत्याग द्वारा परहित/परोपकार के मूल्य को दर्शाता है।
Q3. "मत पूछ कहाँ तक चलना है, बस पाँव बढ़ाते जाना है" से कवि का क्या आशय है?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
कवि कहता है कि मंज़िल कितनी दूर है यह पूछने/चिंता करने के बजाय निरंतर कदम बढ़ाते रहना ही श्रेयस्कर है — अर्थात सतत प्रयत्नशीलता।
Q4. "वर्षा में कागज़ की नौका" किस ओर संकेत करती है?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
वर्षा के पानी में कागज़ की नाव तैराना बचपन का एक सहज, निर्मल खेल है; यह बीते दिनों के निर्दोष कौतुक का प्रतीक है।
Q5. इस पद्यांश में बादल के आगमन से उत्पन्न प्रमुख भाव क्या है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
बादल के बरसने से खेत हँसते हैं, किसान मुस्कुराता है, नदियाँ-कलियाँ-वन सब जीवंत हो उठते हैं — सर्वत्र हर्ष, आशा व जीवन-संचार का भाव है।
Q6. "कल-कल" शब्द में कौन-सा अलंकार विद्यमान है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
'कल-कल' जल के प्रवाह की ध्वनि का अनुकरण करता पुनरुक्त शब्द है, जिसमें वर्ण-आवृत्ति से अनुप्रास/पुनरुक्तिप्रकाश का सौंदर्य आता है।
Q7. "मौन रहे पर काम करे" पंक्ति किस प्रकार के व्यक्तित्व की ओर संकेत करती है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
मौन रहकर भी काम करना अर्थात बिना प्रचार-दिखावे के चुपचाप अच्छे कार्य करने वाले निष्काम व्यक्तित्व का संकेत है।
Q8. "धरती की प्यासी पलक, तकती नभ की ओर" में कौन-सा अलंकार प्रमुख है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
धरती को प्यासी पलकों से आकाश की ओर ताकते हुए मनुष्य-सा दिखाया गया है, अतः जड़ धरती में मानवीय व्यवहार के आरोप से मानवीकरण अलंकार है।
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