Home / CUET Subjects / Hindi / पर्यायवाची शब्द
Exam Topic CUET Hindi · 102 35 practice MCQs

पर्यायवाची शब्द

पर्यायवाची शब्द is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 35 in a timed practice test to build exam-day speed.

⏱️ Timed practice test ⚡ Flashcards ← All Hindi topics

एक नज़र में

भाग 1 — पर्यायवाची के प्रश्न को कैसे समझें और कैसे हल करें

Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.

पर्याय का अर्थ क्या है? "पर्याय" का मूल भाव है "एक के स्थान पर दूसरा"। जिस शब्द को वाक्य में बिना अर्थ बदले दूसरे शब्द से बदला जा सके, वह उसका पर्याय है। पर यहाँ एक बारीकी समझ लो: दो शब्द ठीक-ठीक एक नहीं होते। "नदी" और "सरिता" एक ही वस्तु के नाम हैं, इसलिए पर्याय हैं; "नदी" और "समुद्र" दोनों जल से जुड़े हैं, पर वस्तुएँ अलग हैं, इसलिए पर्याय नहीं। परीक्षा इसी अंतर को परखती है।

हिंदी में पर्याय इतने क्यों हैं? तीन स्रोत हैं। पहला, संस्कृत से आए तत्सम शब्द (अग्नि, हस्त, सूर्य)। दूसरा, उन्हीं से बने तद्भव शब्द (आग, हाथ, सूरज)। तीसरा, विदेशी शब्द (आफ़ताब, दरिया, इंसान)। एक वस्तु के लिए तीनों धाराओं के शब्द मिलकर पर्यायों की लंबी सूची बना देते हैं। इसके अलावा संस्कृत में एक वस्तु को उसके गुण या कर्म के आधार पर नाम दिए गए, इसलिए एक ही सूर्य को दिन करने वाला (दिनकर), प्रकाश की खान (भास्कर) और अदिति का पुत्र (आदित्य) कहा गया। जब आप शब्द का यह निर्माण-कारण समझ लेते हैं, तो वह रटना नहीं पड़ता, समझ में बैठ जाता है।

चरण क्या करें क्यों
1 प्रश्न का शब्द पढ़ो और उसका वही अर्थ मन में तय करो जो प्रसंग माँग रहा है कई शब्द अनेकार्थी हैं (हरि, कर, अंबर); अर्थ तय किए बिना विकल्प देखना भटकाता है
2 विकल्प देखने से पहले अपना कम से कम एक पर्याय सोच लो विकल्पों में रखे संबंधित शब्द तब आकर्षक नहीं लगते
3 विकल्पों में वही चुनो जो उसी वस्तु का नाम हो संबंधित (बादल/वर्षा) और समान (बादल/मेघ) का अंतर यहीं पकड़ा जाता है
4 "नहीं है" वाले प्रश्न में हर विकल्प को एक-एक कर जाँचो तीन पर्याय और एक अलग शब्द होता है; एक भी पर्याय पर शंका हो तो बाकी तीन से मिलाओ
5 मूल शब्द की बनावट देखो (वारि+द, जल+धि) बनावट अर्थ बता देती है और भ्रमित जोड़ों में निर्णायक होती है

भाग 2 — CUET में पर्यायवाची के प्रश्न-प्रकार

प्रकार कैसा दिखता है कैसे सोचें क्यों यह तरीका
सीधा "कमल का पर्यायवाची है" वही वस्तु जिसके नाम में जल/कीचड़ से जन्म का भाव हो (पंकज, जलज, नीरज) कमल के अधिकांश नाम "जल/पंक में जन्मा" अर्थ से बने हैं
उलटा "दिनकर किसका पर्याय है?" दिन+कर (करने वाला) = सूर्य शब्द को तोड़ने से मूल शब्द मिलता है
अपवर्जन "इनमें कौन पर्याय नहीं है" तीन विकल्प एक परिवार के होंगे, चौथा किसी और वस्तु का परिवार पहचानते ही बाहरी शब्द निकल आता है
प्रसंग "वन में ___ दहाड़ा" रिक्त स्थान की क्रिया या संबंध से वस्तु पहचानो बहुअर्थी शब्दों में वाक्य ही अर्थ तय करता है
लिंग-भेद "पुत्री का पर्याय" आत्मजा, तनया, सुता (स्त्रीलिंग रूप) आत्मज और आत्मजा में एक मात्रा का अंतर पूरा अर्थ बदल देता है

भाग 3 — प्रकृति और ब्रह्मांड के उच्च-आवृत्ति पर्याय

इन शब्दों के पर्याय CUET और अन्य परीक्षाओं में सबसे बार आते हैं। तालिका में वाक्य इसलिए दिया है कि शब्द प्रयोग के साथ याद रहे।

शब्द पर्यायवाची प्रयोग-वाक्य
सूर्य रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, भास्कर, आदित्य, प्रभाकर, मार्तंड, सविता प्रभाकर के उदय होते ही कमल खिल उठे।
चंद्रमा चंद्र, शशि, इंदु, राकेश, सुधाकर, निशाकर, मयंक, हिमांशु, विधु पूर्णिमा की रात निशाकर अपनी पूरी कला में था।
जल नीर, वारि, सलिल, अंबु, तोय, उदक, पय, जीवन प्यासे पथिक ने सलिल पीकर राहत पाई।
अग्नि आग, अनल, पावक, वह्नि, कृशानु, हुताशन वह्नि की लपटें दूर तक दिखाई दे रही थीं।
वायु हवा, पवन, समीर, अनिल, मारुत, समीरण, वात भोर की शीतल समीर तन-मन को ताज़ा कर गई।
पृथ्वी धरा, धरती, भूमि, वसुधा, वसुंधरा, अवनि, मही, धरणी, मेदिनी वसुधा पर हरियाली की चादर बिछी थी।
आकाश गगन, नभ, अंबर, व्योम, अंतरिक्ष, आसमान नभ में काले बादल उमड़ आए।
बादल मेघ, घन, जलधर, जलद, वारिद, पयोद, नीरद, अंबुद वारिद गरजे तो किसानों के चेहरे खिल गए।
समुद्र सागर, सिंधु, जलधि, उदधि, रत्नाकर, पयोधि, अर्णव रत्नाकर के किनारे जहाज़ लंगर डाले खड़े थे।
नदी सरिता, तटिनी, तरंगिणी, आपगा, निम्नगा, दरिया तटिनी कल-कल करती सागर की ओर बह रही थी।
वृक्ष पेड़, पादप, तरु, विटप, द्रुम द्रुम की छाया में थके राही ने विश्राम किया।
पर्वत पहाड़, गिरि, अचल, नग, शैल, भूधर, अद्रि हिमालय जैसा गिरि भारत का प्रहरी है।
कमल पंकज, जलज, नीरज, सरोज, राजीव, अरविंद, पद्म, कंज सरोवर में सरोज खिले थे।
किरण रश्मि, मयूख, अंशु, दीधिति प्रातः की पहली रश्मि पर्वत-शिखर पर पड़ी।
बिजली विद्युत, चपला, दामिनी, तड़ित, सौदामिनी, क्षणप्रभा दामिनी कौंधी और पल भर को सब उजला हो गया।

भाग 4 — समय, प्रकाश, मनोभाव और वस्तुएँ

शब्द पर्यायवाची प्रयोग-वाक्य
रात रात्रि, निशा, रजनी, यामिनी, विभावरी, शर्वरी, क्षपा, तमी रजनी बीती और उषा की लाली फैल गई।
दिन दिवस, वासर, दिवा उस दिवस पूरे नगर में उत्सव था।
प्रकाश उजाला, रोशनी, आलोक, ज्योति दीपक का आलोक कुटिया में फैल गया।
अंधकार तम, तिमिर, अँधेरा, ध्वांत सूर्य निकला तो तिमिर भाग गया।
अमृत सुधा, पीयूष, अमिय देवताओं ने सुधा का पान किया।
विष ज़हर, गरल, हलाहल, कालकूट नीलकंठ ने हलाहल पी लिया।
दूध दुग्ध, पय, क्षीर, गोरस नन्हा बालक दुग्ध पीकर सो गया।
सोना स्वर्ण, कनक, कंचन, हेम, हिरण्य, सुवर्ण स्वर्ण के आभूषण दमक रहे थे।
वन जंगल, अरण्य, कानन, विपिन, अटवी राम ने चौदह वर्ष कानन में बिताए।
घर गृह, भवन, निकेतन, आलय, आवास, सदन, धाम अतिथि के लिए सदन के द्वार सदा खुले रहे।
तालाब सर, सरोवर, तड़ाग, जलाशय, पोखर, ताल तड़ाग के जल में कमल तैर रहे थे।
नौका नाव, नैया, तरणी, पोत, डोंगी मल्लाह की तरणी मझधार में पहुँच गई।
तलवार असि, खड्ग, कृपाण, करवाल, शमशीर वीर ने म्यान से खड्ग खींच ली।
बाण तीर, शर, सायक, विशिख, इषु अर्जुन का शर सीधे लक्ष्य पर लगा।
युद्ध लड़ाई, रण, समर, संग्राम, जंग रण-भूमि में वीरों ने अद्भुत साहस दिखाया।
क्रोध कोप, रोष, गुस्सा, आक्रोश रोष में आकर उसने सब कह डाला।
दुख कष्ट, पीड़ा, व्यथा, वेदना, संताप, क्लेश माँ की व्यथा देखकर सब द्रवित हो गए।
अहंकार घमंड, दंभ, अभिमान, गर्व, मद, दर्प दर्प ने रावण का सर्वनाश कर दिया।
इच्छा चाह, अभिलाषा, कामना, लालसा, आकांक्षा, मनोरथ उसकी एक ही अभिलाषा थी, देश की सेवा।
यश कीर्ति, ख्याति, प्रसिद्धि, नाम कीर्ति दूर-दूर तक फैल गई।
आश्चर्य विस्मय, अचंभा, हैरानी, ताज्जुब जादू देखकर सब विस्मय में पड़ गए।
शोभा छवि, सुषमा, आभा, कांति, छटा उपवन की सुषमा देखते ही बनती थी।

भाग 5 — देवता, संबंध, मनुष्य और शरीर

शब्द पर्यायवाची प्रयोग-वाक्य
ईश्वर परमात्मा, प्रभु, भगवान, जगदीश, परमेश्वर, विधाता जगदीश की कृपा से सब कार्य बने।
ब्रह्मा विधाता, पितामह, चतुर्मुख, कमलासन, प्रजापति कमलासन ने सृष्टि की रचना की।
विष्णु हरि, नारायण, माधव, केशव, गोविंद, जनार्दन, चक्रपाणि चक्रपाणि ने भक्त की पुकार सुनी।
शिव शंकर, महादेव, भोलेनाथ, नीलकंठ, त्रिलोचन, शंभु, पशुपति, चंद्रशेखर शंभु का ध्यान करते ही मन शांत हो गया।
गणेश गजानन, लंबोदर, विनायक, एकदंत, गणपति हर शुभ कार्य में विनायक का स्मरण होता है।
इंद्र सुरपति, देवराज, पुरंदर, शक्र, मघवा, वासव देवराज ने वर्षा की आज्ञा दी।
कृष्ण मोहन, गिरधर, कन्हैया, घनश्याम, मुरारी, गोपाल, वासुदेव गिरधर ने गोवर्धन उठाकर ग्रामवासियों की रक्षा की।
लक्ष्मी श्री, रमा, कमला, पद्मा, इंदिरा, हरिप्रिया रमा की कृपा से घर धन-धान्य से भर गया।
सरस्वती शारदा, भारती, वीणापाणि, वाणी, वागीश्वरी, हंसवाहिनी वीणापाणि की वंदना से सभा आरंभ हुई।
गंगा भागीरथी, जाह्नवी, मंदाकिनी, सुरसरि, देवनदी, त्रिपथगा भागीरथी के तट पर आरती हो रही थी।
राजा नृप, नरेश, भूपति, भूप, महीप, नरपति, भूपाल नरेश ने प्रजा के हित में आदेश दिया।
स्त्री नारी, महिला, औरत, वनिता, ललना, कामिनी, रमणी वनिता-आश्रम में निराश्रित स्त्रियों को सहारा मिलता है।
पुत्र बेटा, सुत, तनय, आत्मज, नंदन दशरथ के सुत राम वन गए।
पुत्री बेटी, सुता, तनया, आत्मजा, दुहिता जनक की सुता सीता कहलाईं।
माता माँ, जननी, अंबा, जनयित्री जननी का ऋण कोई नहीं चुका सकता।
पिता जनक, तात, बाप, पितृ तात की आज्ञा मानकर वह चल पड़ा।
भाई भ्राता, सहोदर, बंधु भ्राता के प्रेम में उसने सब त्याग दिया।
मित्र दोस्त, सखा, सुहृद, साथी, सहचर, मीत सखा सुदामा का आदर कृष्ण ने स्वयं किया।
शत्रु दुश्मन, रिपु, अरि, वैरी, विपक्षी रिपु को पराजित कर सेना लौटी।
विद्वान पंडित, ज्ञानी, मनीषी, प्राज्ञ, कोविद मनीषी की वाणी में गहरी सूझ थी।
बुद्धि मति, मेधा, प्रज्ञा, धी, अक्ल मेधा तीव्र हो तो पाठ शीघ्र याद होता है।
आँख नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, अक्षि, दृग, नैन माँ के लोचन आँसुओं से भर आए।
कान कर्ण, श्रवण, श्रोत्र कर्ण ने कवच-कुंडल दान कर दिए।
हाथ कर, हस्त, पाणि उसने पाणि जोड़कर क्षमा माँगी।
पैर पग, चरण, पाद, पाँव गुरु के चरण छूकर शिष्य ने आशीर्वाद लिया।
शरीर देह, तन, काया, गात, वपु, कलेवर स्वस्थ काया ही सबसे बड़ा धन है।
मुख मुँह, आनन, वदन मुख पर मुस्कान खिल उठी।

भाग 6 — पशु-पक्षी और जीव-जगत

शब्द पर्यायवाची प्रयोग-वाक्य
हाथी गज, कुंजर, हस्ती, द्विप, मतंग, करी कुंजर की चिंघाड़ से जंगल गूँज उठा।
घोड़ा अश्व, हय, तुरंग, घोटक, वाजि, सैंधव राणा का तुरंग हवा से बातें करता था।
सिंह शेर, केसरी, वनराज, मृगराज, मृगेंद्र वनराज की दहाड़ से पशु काँप उठे।
साँप सर्प, अहि, भुजंग, नाग, व्याल, उरग, फणी भुजंग ने फन उठा लिया।
पक्षी खग, विहग, पंछी, द्विज, नभचर विहग प्रातः चहचहाने लगे।
मोर मयूर, शिखी, केकी, नीलकंठ वर्षा देख मयूर नाच उठा।
कोयल कोकिला, पिक, कोकिल, परभृत कोकिला की कूक से अमराई गूँज उठी।
बंदर कपि, वानर, मर्कट, कीश कपि हनुमान ने लंका को जला दिया।
मछली मीन, मत्स्य, झष मीन जल के बिना तड़प उठती है।
गाय धेनु, गौ, सुरभि, गैया धेनु बछड़े को चाट रही थी।
भौंरा भ्रमर, मधुकर, मधुप, अलि, षट्पद, द्विरेफ मधुप फूल-फूल पर मँडरा रहा था।
फूल पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून, गुल उपवन में कुसुम महक रहे थे।
पत्ता पत्र, पर्ण, दल, पात पतझड़ में पर्ण झर गए।

भाग 7 — हल सहित उदाहरण

हर उदाहरण में सिर्फ उत्तर नहीं, यह भी देखो कि उत्तर तक पहुँचा कैसे और गलत विकल्प क्यों छँटे।

क्र. प्रश्न उत्तर हल और कारण
1 "अनिल" का पर्यायवाची है: अग्नि, पवन, जल, पृथ्वी पवन अनिल वायु का नाम है। अनल (अग्नि) देखने में पास का शब्द है, यही जाल है। याद रखने का तरीका: अनिल में "नि" है तो "निःश्वास" जैसी हवा; अनल में "ल" है तो "ज्वाला" की लपट।
2 "वारिद" का अर्थ है: समुद्र, बादल, नदी, जल बादल वारि (जल) + द (देने वाला) = जल देने वाला, यानी बादल। समुद्र के लिए वारिधि (जल को धारण करने वाला) शब्द है।
3 "सुधाकर" किसका पर्याय है: सूर्य, चंद्रमा, अग्नि, पवन चंद्रमा सुधा (अमृत) का आकर (खान) = अमृत की खान, यानी चंद्रमा। दिनकर (दिन करने वाला) सूर्य होता है, इसलिए दोनों में भ्रम न करें।
4 निम्न में "रात" का पर्याय नहीं है: निशा, यामिनी, विभावरी, दिवा दिवा निशा, यामिनी और विभावरी रात के नाम हैं। दिवा दिन का नाम है, इसलिए वही बाहरी शब्द है।
5 निम्न में "कमल" का पर्याय नहीं है: पंकज, सरोज, नीरज, सरित सरित सरित (नदी) है। पंकज (पंक में जन्मा), सरोज (सर में जन्मा), नीरज (नीर में जन्मा) कमल के नाम हैं।
6 "कुंजर" का पर्याय है: घोड़ा, हाथी, साँप, शेर हाथी कुंजर हाथी का नाम है। साँप के लिए भुजंग, घोड़े के लिए तुरंग, शेर के लिए केसरी आते हैं।
7 "पुरंदर" किसका पर्याय है: इंद्र, शिव, कृष्ण, ब्रह्मा इंद्र पुर (नगर या दुर्ग) को तोड़ने वाला। इंद्र के पर्याय: सुरपति, देवराज, शक्र, पुरंदर, मघवा।
8 पुत्री का पर्यायवाची है: आत्मज, तनय, सुता, सुत सुता आत्मज, तनय और सुत पुत्र (पुल्लिंग) के रूप हैं। पुत्री के स्त्रीलिंग रूप: सुता, तनया, आत्मजा, दुहिता।
9 वाक्य: "वन में ___ की दहाड़ गूँजी।" उपयुक्त पर्याय: कपि, वनराज, कुंजर, भुजंग वनराज दहाड़ सिंह की होती है। वनराज सिंह का पर्याय है। कपि की चीख, कुंजर की चिंघाड़ और भुजंग की फुफकार होती है।
10 "पावक" का पर्याय है: अग्नि, पवित्र, जल, वायु अग्नि पावक, अनल, वह्नि और हुताशन अग्नि के नाम हैं। "पावन" पवित्र का अर्थ देता है, पर यहाँ पावक पूछा गया है।
11 "आदित्य" किसका पर्याय है: सूर्य, इंद्र, चंद्र, वायु सूर्य अदिति के पुत्र के रूप में सूर्य का नाम आदित्य है। भानु, रवि, भास्कर और आदित्य एक ही परिवार के शब्द हैं।
12 "द्विरेफ" किसका पर्याय है: भौंरा, चींटी, मधुमक्खी, तितली भौंरा भौंरे के नाम: भ्रमर, मधुप, अलि, षट्पद, द्विरेफ। चारों में उसी का नाम चुनना है।
13 "तरणी" के पर्याय में आएगा: नाव, पर्वत, कमल, नदी नाव तरणी नौका का नाम है, जो नदी को तैरकर पार कराए। सूर्य के लिए "तरणि" (ह्रस्व इ) अलग शब्द है, इसलिए मात्रा देखकर उत्तर दो।
14 "सहोदर" का पर्याय है: भाई, पड़ोसी, मित्र, गुरु भाई सह+उदर, यानी एक ही उदर (गर्भ) से जन्मा। इसलिए भाई।

भाग 8 — सामान्य भ्रम (ट्रैप) और उनसे बचाव

जाल क्यों आकर्षक लगता है सच क्या है
अनल बनाम अनिल दोनों दिखने में एक-से हैं अनल = अग्नि, अनिल = वायु
वारिद बनाम वारिधि दोनों में "वारि" है वारिद = बादल (जल देने वाला), वारिधि = समुद्र (जल रखने वाला)
जलज, जलद, जलधि तीनों "जल" से शुरू होते हैं जलज = कमल, जलद = बादल, जलधि = समुद्र
दिनकर बनाम निशाकर दोनों "कर" पर समाप्त दिनकर = सूर्य, निशाकर = चंद्रमा
पावक बनाम पावन शुरू के अक्षर समान पावक = अग्नि, पावन = पवित्र
नीर बनाम नीड़ उच्चारण में पास नीर = जल, नीड़ = घोंसला
संबंधित बनाम समानार्थी दोनों एक ही प्रसंग से जुड़े हैं बादल का पर्याय मेघ है, वर्षा नहीं; नदी का पर्याय सरिता है, समुद्र नहीं
आत्मज बनाम आत्मजा एक मात्रा का अंतर आत्मज = पुत्र, आत्मजा = पुत्री
एक शब्द के अनेक मूल हरि, कर, नाग, अचल, सोम बहुअर्थी हैं हरि विष्णु, सिंह, सूर्य, बंदर तक; वाक्य का प्रसंग देखकर ही अर्थ तय करें
तरणि बनाम तरणी केवल इ और ई की मात्रा का अंतर तरणि = सूर्य, तरणी = नौका

भाग 9 — रैपिड अभ्यास: 20 प्रश्न और उत्तर

पहले उत्तर ढक कर स्वयं सोचो, फिर मिलाओ। 20 में से 18 सही आना लक्ष्य है।

क्र. प्रश्न उत्तर
1 "भास्कर" का पर्याय सूर्य
2 "शशि" का पर्याय चंद्रमा
3 "तोय" का पर्याय जल
4 "मारुत" का पर्याय वायु
5 "धरणी" का पर्याय पृथ्वी
6 "व्योम" का पर्याय आकाश
7 "उदधि" का पर्याय समुद्र
8 "अरविंद" का पर्याय कमल
9 "यामिनी" का पर्याय रात
10 "कनक" का पर्याय (सोने के अर्थ में) स्वर्ण
11 "पिक" का पर्याय कोयल
12 "तुरंग" का पर्याय घोड़ा
13 "मधुकर" का पर्याय भौंरा
14 "जाह्नवी" का पर्याय गंगा
15 "दामिनी" का पर्याय बिजली
16 "रिपु" का पर्याय शत्रु
17 "लोचन" का पर्याय आँख
18 "गरल" का पर्याय विष
19 "कानन" का पर्याय वन
20 "खड्ग" का पर्याय तलवार

भाग 10 — अभ्यास-दिनचर्या

दिन क्या करें समय
1-2 भाग 3 की तालिका के 15 परिवार पढ़ो, फिर पर्याय वाला स्तंभ ढककर स्वयं लिखो 25 मिनट
3-4 भाग 4 और 5 के शब्द; हर परिवार से एक अपना वाक्य बनाओ 25 मिनट
5 भाग 6 और भाग 8 के जाल-जोड़े (अनल/अनिल जैसे) दोहराओ 20 मिनट
6 भाग 9 का रैपिड अभ्यास 10 मिनट में बिना देखे हल करो 10 मिनट
7 गलत शब्दों की अपनी सूची बनाओ और कल की सूची से मिलाओ 15 मिनट

नियम: प्रतिदिन 15 से अधिक नए शब्द मत जोड़ो। ठोस याद के लिए छोटी मात्रा और नियमित दोहराव बेहतर है। गलत शब्दों को एक कॉपी में लिखो और सप्ताह के अंत में उन्हीं को पुनः हल करो। प्रश्न हल करते समय हमेशा सोचो: यह शब्द किस परिवार का है, और विकल्प में आया दूसरा शब्द किस परिवार का है।

भाग 11 — यह विषय आगे कहाँ जुड़ता है

पर्यायवाची का भंडार नीचे के विषयों में सीधे काम आता है।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 27 more in the timed practice test.

Q1. 'गंगा' का पर्यायवाची शब्द निम्न में से कौन-सा है?

▸ Show answer & explanation

Answer: A

'भागीरथी' गंगा का पर्यायवाची है (अन्य — मंदाकिनी, सुरसरि, देवनदी, जाह्नवी)। 'भारती' सरस्वती तथा 'भवानी' पार्वती को कहते हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'गणेश' का पर्यायवाची नहीं है?

▸ Show answer & explanation

Answer: D

'वासव' इंद्र का पर्यायवाची है। गजानन, लंबोदर और विनायक तीनों गणेश के पर्यायवाची हैं।

Q3. 'किरण' का पर्यायवाची शब्द कौन-सा है?

▸ Show answer & explanation

Answer: A

'मरीचि' किरण का पर्यायवाची है (अन्य — रश्मि, अंशु, कर, ज्योति)। 'मरीचिका' मृगतृष्णा, 'मराल' हंस तथा 'मरुत' वायु को कहते हैं।

Q4. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'पत्नी' का पर्यायवाची नहीं है?

▸ Show answer & explanation

Answer: D

'वामन' का अर्थ बौना/छोटा है। भार्या, दारा और वामा तीनों पत्नी के पर्यायवाची हैं।

Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'जल' का पर्यायवाची नहीं है?

▸ Show answer & explanation

Answer: D

'अनिल' का अर्थ वायु/हवा है, जल नहीं। नीर, वारि और अंबु तीनों जल के पर्यायवाची हैं।

Q6. 'देवता' का पर्यायवाची शब्द निम्न में से कौन-सा है?

▸ Show answer & explanation

Answer: A

'अमर' देवता का पर्यायवाची है (अन्य — सुर, देव, विबुध, त्रिदश)। 'असुर' का अर्थ राक्षस है, जो देवता का विलोम है।

Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द 'पर्वत' का पर्यायवाची नहीं है?

▸ Show answer & explanation

Answer: D

'तुरंग' का अर्थ घोड़ा है। अचल, नग और भूधर तीनों पर्वत के पर्यायवाची हैं।

Q8. 'नदी' का पर्यायवाची शब्द कौन-सा है?

▸ Show answer & explanation

Answer: A

'तटिनी' नदी का पर्यायवाची है (अन्य — सरिता, सरि, निर्झरिणी, आपगा)। 'तरणि' सूर्य, 'तनुजा' पुत्री तथा 'तुहिन' बर्फ/ओस को कहते हैं।

🔒 27 more questions

Attempt all 35 पर्यायवाची शब्द questions in real NTA exam format with timer and instant scoring.

Start practice test →
← Previous
पद्यांश (Poetry Comprehension)
Next →
रस और छंद