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Exam Topic CUET Hindi · 102 35 practice MCQs

विलोम शब्द

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एक नज़र में

भाग 1 — विलोम का प्रश्न कैसे सोचें

Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.

विलोम का अर्थ। "विलोम" का अर्थ है उलटा या प्रतिकूल। विलोम के जोड़े प्रायः तीन आधारों पर बनते हैं: पूर्ण विरोध (दिन × रात), अभाव (सफल × असफल) और दिशा या क्रिया का उलटाव (आरोह × अवरोह, आना × जाना)।

परीक्षा विलोम में क्या परखती है? दो चीज़ें। पहली, क्या आप विपरीत और असंबंधित का अंतर जानते हैं: "सुख" का विलोम "दुख" है, "रोग" नहीं। दूसरी, क्या आप समानार्थी विकल्प के बहकावे में आते हैं: "उन्नति" का विलोम पूछते समय विकल्पों में "प्रगति" और "विकास" दोनों रखे जाते हैं, जो समानार्थी हैं। इसीलिए सबसे सुरक्षित विधि है: पहले मन में उलटा शब्द बनाओ, फिर विकल्प देखो। यह तरीका केवल विलोम में नहीं, हर शब्द-प्रश्न में परीक्षा का तनाव घटाता है।

चरण क्या करें क्यों
1 शब्द का अर्थ ठीक-ठीक समझो ग़लत अर्थ से गलत विलोम बनता है (अमर का अर्थ "न मरने वाला" है, इसलिए विलोम "नश्वर/मर्त्य")
2 कोटि पहचानो: संज्ञा, विशेषण, क्रिया विलोम सदा उसी कोटि का होता है; संज्ञा का विलोम विशेषण नहीं हो सकता
3 विकल्प पढ़ने से पहले अपना विलोम सोचो समानार्थी विकल्प तब नहीं भटकाते
4 विकल्पों में से समानार्थी और असंबंधित शब्द हटाओ जो बचे उसी की जाँच करो
5 बचे उत्तर को वाक्य में उलटकर परखो "आज दिन है" का विलोम-वाक्य "आज रात है" स्वाभाविक लगना चाहिए

भाग 2 — CUET में विलोम के प्रश्न-प्रकार

प्रकार नमूना कैसे हल करें कारण
सीधा "उत्कर्ष का विलोम" जोड़े की स्मृति: उत्कर्ष × अपकर्ष उपसर्ग-परिवर्तन (उत् × अप) का पैटर्न
उपसर्ग-आधारित "संभव का विलोम" अ/अन/नि/दुर/वि में से सही उपसर्ग शब्द की ध्वनि और वर्तनी से सही रूप चुनना होता है
अपवर्जन "इनमें विलोम-जोड़ा नहीं है" प्रत्येक जोड़े की सत्यता जाँचो तीन सही जोड़ों में एक झूठा जोड़ा छिपा होता है
मिलान "सूची I और सूची II मिलाइए" जो जोड़े पक्के हों पहले मिलाओ बाकी जोड़े स्वयं निकल आते हैं
वाक्य-आधारित "वाक्य में रेखांकित का विपरीत भाव" वाक्य-भाव से अर्थ तय करो एक शब्द के कई विलोम होने पर प्रसंग चुनता है

भाग 3 — भाव, गुण और व्यवहार के उच्च-आवृत्ति विलोम

शब्द विलोम प्रयोग-वाक्य
आदि अंत इस कथा का आदि जितना रोचक है, अंत उतना ही मार्मिक।
आय व्यय परिवार की आय बढ़ी, पर व्यय भी बढ़ गया।
उत्थान पतन अनुशासन से उत्थान होता है, लापरवाही से पतन।
उदय अस्त सूर्य के उदय और अस्त का दृश्य मनोहर होता है।
उन्नति अवनति कर्म से उन्नति होती है, आलस्य से अवनति।
गुण अवगुण / दोष मनुष्य को गुण देखकर अपनाओ, अवगुण छोड़ो।
जन्म मृत्यु जन्म और मृत्यु जीवन के दो छोर हैं।
ज्ञान अज्ञान ज्ञान से प्रकाश होता है, अज्ञान से अंधकार।
तीव्र मंद उसकी बुद्धि तीव्र थी, गति मंद।
धनी निर्धन धनी हो या निर्धन, कानून सबके लिए समान है।
निंदा स्तुति / प्रशंसा वह निंदा से दुखी और स्तुति से प्रसन्न नहीं होता।
पाप पुण्य पाप का फल दुख, पुण्य का फल सुख माना गया है।
प्रकाश अंधकार दीपक ने अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाया।
बंधन मुक्ति ज्ञान से बंधन कटता है और मुक्ति मिलती है।
मित्र शत्रु सच्चा मित्र विपत्ति में पहचाना जाता है, शत्रु अवसर में।
यश अपयश सत्कर्म से यश मिलता है, कुकर्म से अपयश।
लाभ हानि व्यापार में कभी लाभ होता है, कभी हानि।
विजय पराजय सेना की विजय हुई और शत्रु की पराजय।
संयोग वियोग मिलन का संयोग हो तो बिछुड़ने का वियोग भी आता है।
सुख दुख जीवन में सुख और दुख दोनों आते हैं।
स्वतंत्र परतंत्र / पराधीन भारत स्वतंत्र हुआ, उससे पहले परतंत्र था।
हर्ष विषाद / शोक हर्ष का अवसर अचानक विषाद में बदल गया।
आशा निराशा आशा जीवन देती है, निराशा उसे छीनती है।
सम्मान अपमान बड़ों का सम्मान करो, उनका अपमान नहीं।

भाग 4 — विशेषण, गुण और स्थिति के विलोम

शब्द विलोम प्रयोग-वाक्य
कटु मधुर कटु वचन से बचो, मधुर वाणी बोलो।
कठोर कोमल लोहा कठोर है, रुई कोमल।
उष्ण शीत ग्रीष्म में उष्ण पवन चलती है, शीत ऋतु में शीतल।
स्थूल सूक्ष्म स्थूल वस्तुएँ आँख से दिखती हैं, सूक्ष्म जीव सूक्ष्मदर्शी से।
स्थायी अस्थायी स्थायी नौकरी में सुरक्षा होती है, अस्थायी में नहीं।
क्षणिक शाश्वत सुख क्षणिक है, ईश्वर शाश्वत।
सरल कठिन / जटिल सरल प्रश्न पहले हल करो, जटिल बाद में।
सुगम दुर्गम सुगम मार्ग पर चलना आसान है, दुर्गम पर कठिन।
सुलभ दुर्लभ वायु सुलभ है, हीरा दुर्लभ।
सजीव निर्जीव पेड़ सजीव है, पत्थर निर्जीव।
सगुण निर्गुण भक्त सगुण रूप की पूजा करता है, संत निर्गुण की।
साकार निराकार मूर्ति साकार है, ध्यान की ज्योति निराकार।
सफल असफल / विफल परिश्रमी सफल होता है, आलसी विफल।
सार्थक निरर्थक सार्थक बातें करो, निरर्थक नहीं।
साक्षर निरक्षर साक्षर समाज उन्नति करता है, निरक्षर समाज पिछड़ता है।
सज्जन दुर्जन सज्जन की संगति से लाभ होता है, दुर्जन की से हानि।
आस्तिक नास्तिक आस्तिक ईश्वर में विश्वास रखता है, नास्तिक नहीं।
प्राचीन अर्वाचीन / नवीन प्राचीन परंपरा और अर्वाचीन विचार दोनों का सम्मान करो।
विशाल लघु विशाल पर्वत के सामने लघु कंकड़ भी महत्त्व रखता है।
स्वदेशी विदेशी स्वदेशी वस्तुएँ अपनाओ, विदेशी पर निर्भरता घटाओ।
ग्राह्य त्याज्य अच्छी बात ग्राह्य है, बुरी त्याज्य।
सरस नीरस सरस कविता मन मोहती है, नीरस भाषण ऊब पैदा करता है।
ऐच्छिक अनिवार्य ऐच्छिक विषय चुने जा सकते हैं, अनिवार्य नहीं।
मौखिक लिखित मौखिक परीक्षा बोलकर होती है, लिखित लिखकर।

भाग 5 — साहित्यिक, दार्शनिक और जोड़ा याद रखने योग्य विलोम

ये जोड़े नियम से नहीं बनते। इन्हें जोड़े के रूप में ही याद करना पड़ता है, इसीलिए ये परीक्षा में प्रिय हैं।

शब्द विलोम प्रयोग-वाक्य
आरोह अवरोह संगीत में स्वर का आरोह और अवरोह दोनों सीखे जाते हैं।
आविर्भाव तिरोभाव कवि के आविर्भाव और तिरोभाव की तिथियाँ ज्ञात हैं।
अनुराग विराग राजा का राज्य से अनुराग घटकर विराग में बदल गया।
उत्कर्ष अपकर्ष कला का उत्कर्ष किसी युग में हुआ, अपकर्ष किसी में।
आकर्षण विकर्षण समान आवेशों में विकर्षण होता है, विपरीत में आकर्षण।
अनुकूल प्रतिकूल अनुकूल हवा में नाव तेज़ चलती है, प्रतिकूल में धीमी।
आदान प्रदान विचारों का आदान-प्रदान समाज को जोड़ता है।
आयात निर्यात भारत ने तेल का आयात बढ़ाया और अनाज का निर्यात।
सृष्टि प्रलय सृष्टि और प्रलय का चक्र चलता रहता है।
प्रवृत्ति निवृत्ति सांसारिक प्रवृत्ति छोड़कर उसने निवृत्ति का मार्ग अपनाया।
विधि निषेध विधि है कि सत्य बोलो, निषेध है कि चोरी मत करो।
लौकिक अलौकिक / पारलौकिक यह सुख लौकिक है, वह अलौकिक।
इहलोक परलोक इहलोक में किया कर्म परलोक का मार्ग तय करता है।
सकाम निष्काम निष्काम कर्म गीता का संदेश है।
चेतन जड़ मन चेतन है, पत्थर जड़।
स्थावर जंगम पेड़ स्थावर है, पशु जंगम।
ज्येष्ठ कनिष्ठ ज्येष्ठ भ्राता ने कनिष्ठ को राह दिखाई।
संकोच विस्तार धातु ठंड से सिकुड़ती (संकोच) और गर्मी से फैलती (विस्तार) है।
संक्षेप विस्तार संक्षेप में कहो या विस्तार से, पर स्पष्ट कहो।
शुक्ल कृष्ण शुक्ल पक्ष में चाँद बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है।
सुर असुर सुर और असुर के संघर्ष की कथाएँ लोकप्रिय हैं।
मानव दानव मानव में दया है, दानव में क्रूरता।
रक्षक भक्षक जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय कहाँ मिले।
कृतज्ञ कृतघ्न कृतज्ञ व्यक्ति उपकार मानता है, कृतघ्न भूल जाता है।
वरदान अभिशाप विज्ञान वरदान भी है और अभिशाप भी, उपयोग पर निर्भर है।

भाग 6 — उपसर्ग से विलोम: नियम और अपवाद

उपसर्ग लगाकर विलोम बनाने के चार पैटर्न हैं। पहले नियम समझो, फिर अपवाद देखो।

पैटर्न नियम उदाहरण क्यों काम करता है
नकार-उपसर्ग लगाना व्यंजन से पहले अ, स्वर से पहले अन् संभव × असंभव, उचित × अनुचित, आदि × अनादि अ/अन् का अर्थ है "नहीं"
निर् / निः / दुर् / दुः अभावसूचक या बुरा-अर्थ देने वाले गुण × निर्गुण, आशा × निराशा, सुगम × दुर्गम, सुलभ × दुर्लभ "सु" (अच्छा) का विपरीत "दुर्" (बुरा/कठिन)
कु और सु अच्छे-बुरे का भाव सुपुत्र × कुपुत्र, सुमार्ग × कुमार्ग, सुयोग × कुयोग कु = बुरा, सु = अच्छा
उपसर्ग बदलना पहले से लगे उपसर्ग को विरोधी उपसर्ग से बदलो उत्कर्ष × अपकर्ष, आरोह × अवरोह, संयोग × वियोग, अनुकूल × प्रतिकूल उत् (ऊपर) × अप/अव (नीचे), सम् (साथ) × वि (अलग), अनु (साथ) × प्रति (उलटा)

अब वे जोड़े जहाँ "सीधा नियम" धोखा देता है:

शब्द कौन-सा नियम चल जाता है सही विलोम क्या नहीं चलता
अमर "अ" पहले से लगा है नश्वर / मर्त्य "अनमर" शब्द नहीं
सम्मान नकार-उपसर्ग अपमान "असम्मान" व्यवहार में नहीं चलता
जय उपसर्ग-परिवर्तन पराजय "अजय" का अर्थ है "जो जीता न जा सके", विलोम नहीं
सरल "अ" से नहीं बनता कठिन / जटिल "असरल" नहीं
आशा निर् जुड़ता है निराशा "अआशा" नहीं
धर्म अ जुड़ता है अधर्म यहाँ नकार-उपसर्ग ठीक बैठता है
सफल कई विलोम हैं असफल / विफल / निष्फल प्रश्न में जो विकल्प दिया हो वही उत्तर
अनाथ उपसर्ग पहले से है सनाथ "अअनाथ" नहीं
आस्था अन् जुड़ता है (स्वर से पहले) अनास्था यहाँ भी नियम काम करता है
स्वतंत्र उपसर्ग बदलता है परतंत्र / पराधीन "अस्वतंत्र" व्यवहार में कम

भाग 7 — हल सहित उदाहरण

क्र. प्रश्न उत्तर हल और कारण
1 "उत्कर्ष" का विलोम: उन्नति, अपकर्ष, विकास, प्रगति अपकर्ष उन्नति, विकास और प्रगति समानार्थी हैं, इसलिए तीनों विलोम नहीं हो सकते। उत् (ऊपर) के विरुद्ध अप (नीचे) लगकर अपकर्ष बनता है।
2 "अमर" का विलोम: अजर, अनमर, नश्वर, अटल नश्वर अमर = जो न मरे। विलोम = जो नष्ट हो जाए। "अनमर" शब्द है ही नहीं, और अजर (जो बूढ़ा न हो) तथा अटल अमर से जुड़े भाव हैं, उलटे नहीं।
3 "कटु" का विलोम: तिक्त, मधुर, कसैला, खट्टा मधुर तिक्त (कड़वा) कटु का पर्याय है। मधुर स्वाद और वाणी, दोनों में कटु का सटीक विपरीत है।
4 "आरोह" का विलोम: चढ़ाई, अवरोह, उतार-चढ़ाव, स्थिरता अवरोह आरोह = ऊपर चढ़ना, अवरोह = नीचे उतरना। उपसर्ग-परिवर्तन आ → अव का पैटर्न।
5 "प्रवृत्ति" का विलोम: निवृत्ति, आसक्ति, उत्पत्ति, प्रगति निवृत्ति प्रवृत्ति = कर्म में लगना, निवृत्ति = कर्म से हटना। प्र × नि का जोड़ा।
6 "सुगम" का विलोम: सुलभ, दुर्गम, सरल, स्वाभाविक दुर्गम सुगम = जहाँ पहुँचना आसान हो। सुलभ और सरल उसी के पास के भाव हैं (समानार्थी जैसे), इसलिए छँटते हैं। सु × दुर् का जोड़ा दुर्गम देता है, यानी जहाँ पहुँचना कठिन हो।
7 "ज्येष्ठ" का विलोम: अनुज, कनिष्ठ, अग्रज, श्रेष्ठ कनिष्ठ ज्येष्ठ (सबसे बड़ा) × कनिष्ठ (सबसे छोटा)। अग्रज ज्येष्ठ का निकट-अर्थी है, श्रेष्ठ गुण बताता है, उम्र नहीं। अनुज संज्ञा (छोटा भाई) है, जबकि ज्येष्ठ विशेषण है, इसलिए कोटि भी मेल नहीं खाती।
8 "स्थावर" का विलोम: जंगम, स्थिर, अचल, निश्चल जंगम स्थावर = न हिलने वाला, जंगम = चलने वाला। बाकी तीनों स्थावर के पर्याय हैं।
9 "सकाम" का विलोम: निष्काम, सकर्म, इच्छित, कामी निष्काम सकाम = इच्छा-सहित, निष्काम = इच्छा-रहित। गीता में निष्काम कर्म का संदेश इसी से प्रसिद्ध है।
10 "इहलोक" का विलोम: स्वर्ग, परलोक, पाताल, देवलोक परलोक इहलोक = यह लोक, परलोक = दूसरा लोक। जोड़ा याद रखने योग्य है।
11 "रक्षक" का विलोम: भक्षक, पालक, शिक्षक, दर्शक भक्षक रक्षक = बचाने वाला, भक्षक = खाने वाला। "र" और "भ" का अंतर, पूरा अर्थ उलटा।
12 "लौकिक" का विलोम: अलौकिक, भौतिक, सामाजिक, सांसारिक अलौकिक भौतिक और सांसारिक लौकिक के निकट-अर्थी हैं, विपरीत नहीं।
13 निम्न में विलोम-जोड़ा नहीं है: सृष्टि × प्रलय, कृतज्ञ × कृतघ्न, सुर × देव, चेतन × जड़ सुर × देव सुर और देव पर्याय हैं। बाकी तीनों विलोम हैं।
14 "राजा" का विलोम: रानी, प्रजा, रंक, सेवक रंक रानी स्त्रीलिंग रूप है, विलोम नहीं। परीक्षा में राजा × रंक जोड़ा प्रचलित है।
15 "संयोग" का विलोम: वियोग, मिलन, योग, भोग वियोग मिलन और योग समानार्थी हैं। संयोग × वियोग, उपसर्ग सम् × वि।

भाग 8 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)

जाल क्यों आकर्षक है सच क्या है
समानार्थी को विलोम समझना विकल्प में दिया समानार्थी शब्द देखने में "ठीक" लगता है विलोम में अर्थ उलटा होता है, पास नहीं। कटु × मधुर, कटु × तिक्त नहीं
हर शब्द में "अ" जोड़ना कई विलोम इसी से बनते हैं सम्मान × अपमान, जय × पराजय, सरल × जटिल: नियम चूकता है
निकट-अर्थी पर रुकना "भौतिक" लौकिक के पास है लौकिक × अलौकिक; भौतिक × आध्यात्मिक
कोटि बदल देना संज्ञा के विलोम में विशेषण चुनना ज्ञान (संज्ञा) × अज्ञान (संज्ञा); ज्ञानी (विशेषण) × अज्ञानी (विशेषण)
स्त्रीलिंग को विलोम समझना राजा × रानी "जोड़ी" लगती है राजा × रंक/प्रजा; राजा × रानी लिंग-भेद है
एकाधिक विलोम सफल × असफल, विफल जो विकल्प दिया हो वही चुनो; दोनों दिए हों तो प्रश्न का प्रसंग देखो
दुर् वाले जोड़ों में अदला-बदली सुगम और सुलभ दिखने में पास हैं सुगम × दुर्गम और सुलभ × दुर्लभ अलग जोड़े हैं; विकल्प में जिसका जोड़ा बनता हो वही चुनो
लिंग बदलना पुत्र × पुत्री एक जोड़ी लगती है यह लिंग-भेद है, विलोम नहीं; पुत्र का विलोम पूछा जाए तो भी पुत्री उत्तर नहीं

भाग 9 — रैपिड अभ्यास: 20 प्रश्न और उत्तर

क्र. शब्द विलोम
1 अनुराग विराग
2 आदर अनादर / अपमान
3 कृपण उदार / दानी
4 गुरुता लघुता
5 जड़ चेतन
6 तम प्रकाश / ज्योति
7 दुर्जन सज्जन
8 निर्माण विनाश
9 भोगी योगी
10 मूक वाचाल
11 विधि निषेध
12 वृद्ध युवा / बालक
13 शुष्क आर्द्र
14 संग्रह त्याग
15 सत्य असत्य / झूठ
16 स्वर्ग नरक
17 हिंसा अहिंसा
18 अधिकार कर्तव्य
19 धीर अधीर
20 न्याय अन्याय

भाग 10 — अभ्यास-दिनचर्या

दिन क्या करें समय
1-2 भाग 3 और 4 के जोड़े: विलोम स्तंभ ढककर लिखो 25 मिनट
3 भाग 5 के साहित्यिक जोड़े; हर जोड़े से एक अपना वाक्य बनाओ 20 मिनट
4 भाग 6 की उपसर्ग-तालिका और अपवाद-सूची बार-बार दोहराओ 20 मिनट
5 भाग 7 के उदाहरण बिना हल देखे दोबारा हल करो 20 मिनट
6 भाग 9 का रैपिड अभ्यास 8 मिनट में पूरा करो 8 मिनट
7 पूरे सप्ताह की गलतियाँ लिखकर दोहराओ 15 मिनट

अभ्यास के समय तीन आदतें बनाओ। पहली, हर प्रश्न में पहले अपना विलोम लिखो, फिर विकल्प देखो। दूसरी, यदि दो विकल्प लगभग सही लगें, तो देखो कि कौन-सा समानार्थी है और कौन-सा विपरीत। तीसरी, हर गलत जोड़े को सप्ताह के अंत में एक कार्ड पर लिखकर अगले सप्ताह दोहराओ।

भाग 11 — यह विषय आगे कहाँ जुड़ता है

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 27 more in the timed practice test.

Q1. 'ज्येष्ठ' का विलोम शब्द चुनिए।

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Answer: B

'ज्येष्ठ' का अर्थ है बड़ा या आयु में अधिक। इसका विलोम 'कनिष्ठ' है जिसका अर्थ है छोटा या आयु में कम।

Q2. 'गुरु' शब्द का विलोम (जब अर्थ 'भारी' हो) क्या होगा?

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Answer: B

जब 'गुरु' का अर्थ 'भारी' या बड़ा होता है, तब इसका मानक विलोम 'लघु' (छोटा/हल्का) होता है। 'शिष्य' केवल 'गुरु = शिक्षक' अर्थ का विलोम है।

Q3. 'आस्तिक' शब्द का उपयुक्त विलोम है—

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Answer: B

'आस्तिक' वह है जो ईश्वर में विश्वास रखता है। इसका विलोम 'नास्तिक' है जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखता।

Q4. 'उर्वर' शब्द का सही विलोम है—

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Answer: A

'उर्वर' का अर्थ है उपजाऊ भूमि। इसका विलोम 'बंजर' है जिसका अर्थ है जिसमें कुछ न उपजे।

Q5. 'सापेक्ष' शब्द का उपयुक्त विलोम है—

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Answer: B

'सापेक्ष' का अर्थ है किसी की अपेक्षा रखने वाला (relative)। इसका विलोम 'निरपेक्ष' है जिसका अर्थ है जो किसी पर निर्भर न हो (absolute)।

Q6. 'अल्पज्ञ' शब्द का उपयुक्त विलोम है—

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Answer: A

'अल्पज्ञ' का अर्थ है थोड़ा जानने वाला। इसका मानक विलोम 'सर्वज्ञ' है जिसका अर्थ है सब कुछ जानने वाला।

Q7. 'आरोह' का विलोम शब्द चुनिए।

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Answer: A

'आरोह' का अर्थ है चढ़ाव या ऊपर की ओर जाना। इसका मानक विलोम 'अवरोह' है जिसका अर्थ है उतार या नीचे की ओर आना।

Q8. 'मौखिक' का विलोम शब्द चुनिए।

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Answer: B

'मौखिक' का अर्थ है मुख से कहा हुआ। इसका मानक विलोम 'लिखित' है जिसका अर्थ है लिखा हुआ।

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वाक्य शुद्धि और वर्तनी