विलोम शब्द
विलोम शब्द is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 35 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- विलोम शब्द (विपरीतार्थक) वे हैं जिनका अर्थ किसी शब्द के ठीक उलटा हो, जैसे दिन × रात, सुख × दुख, आदि × अंत। CUET में यह सटीकता की परीक्षा है।
- प्रश्न के रूप: सीधा विलोम चुनना, उपसर्ग-परिवर्तन से बने जोड़े पहचानना, "इनमें विलोम नहीं है" वाला प्रश्न, और एक ही कोटि (संज्ञा/विशेषण/क्रिया) के विलोम का चयन।
- कुंजी: विकल्प देखने से पहले उलटा अर्थ स्वयं सोचो, फिर उसी से मिलता विकल्प चुनो। विकल्पों में रखा समानार्थी शब्द विलोम नहीं होता।
- उपसर्ग (अ, अन, निर्, दुर्, वि) सहायक हैं, पर अंतिम निर्णय सदा जोड़े को जानकर लो, क्योंकि हर शब्द के आगे अ लगाने से विलोम नहीं बनता।
भाग 1 — विलोम का प्रश्न कैसे सोचें
Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.
विलोम का अर्थ। "विलोम" का अर्थ है उलटा या प्रतिकूल। विलोम के जोड़े प्रायः तीन आधारों पर बनते हैं: पूर्ण विरोध (दिन × रात), अभाव (सफल × असफल) और दिशा या क्रिया का उलटाव (आरोह × अवरोह, आना × जाना)।
परीक्षा विलोम में क्या परखती है? दो चीज़ें। पहली, क्या आप विपरीत और असंबंधित का अंतर जानते हैं: "सुख" का विलोम "दुख" है, "रोग" नहीं। दूसरी, क्या आप समानार्थी विकल्प के बहकावे में आते हैं: "उन्नति" का विलोम पूछते समय विकल्पों में "प्रगति" और "विकास" दोनों रखे जाते हैं, जो समानार्थी हैं। इसीलिए सबसे सुरक्षित विधि है: पहले मन में उलटा शब्द बनाओ, फिर विकल्प देखो। यह तरीका केवल विलोम में नहीं, हर शब्द-प्रश्न में परीक्षा का तनाव घटाता है।
| चरण | क्या करें | क्यों |
|---|---|---|
| 1 | शब्द का अर्थ ठीक-ठीक समझो | ग़लत अर्थ से गलत विलोम बनता है (अमर का अर्थ "न मरने वाला" है, इसलिए विलोम "नश्वर/मर्त्य") |
| 2 | कोटि पहचानो: संज्ञा, विशेषण, क्रिया | विलोम सदा उसी कोटि का होता है; संज्ञा का विलोम विशेषण नहीं हो सकता |
| 3 | विकल्प पढ़ने से पहले अपना विलोम सोचो | समानार्थी विकल्प तब नहीं भटकाते |
| 4 | विकल्पों में से समानार्थी और असंबंधित शब्द हटाओ | जो बचे उसी की जाँच करो |
| 5 | बचे उत्तर को वाक्य में उलटकर परखो | "आज दिन है" का विलोम-वाक्य "आज रात है" स्वाभाविक लगना चाहिए |
भाग 2 — CUET में विलोम के प्रश्न-प्रकार
| प्रकार | नमूना | कैसे हल करें | कारण |
|---|---|---|---|
| सीधा | "उत्कर्ष का विलोम" | जोड़े की स्मृति: उत्कर्ष × अपकर्ष | उपसर्ग-परिवर्तन (उत् × अप) का पैटर्न |
| उपसर्ग-आधारित | "संभव का विलोम" | अ/अन/नि/दुर/वि में से सही उपसर्ग | शब्द की ध्वनि और वर्तनी से सही रूप चुनना होता है |
| अपवर्जन | "इनमें विलोम-जोड़ा नहीं है" | प्रत्येक जोड़े की सत्यता जाँचो | तीन सही जोड़ों में एक झूठा जोड़ा छिपा होता है |
| मिलान | "सूची I और सूची II मिलाइए" | जो जोड़े पक्के हों पहले मिलाओ | बाकी जोड़े स्वयं निकल आते हैं |
| वाक्य-आधारित | "वाक्य में रेखांकित का विपरीत भाव" | वाक्य-भाव से अर्थ तय करो | एक शब्द के कई विलोम होने पर प्रसंग चुनता है |
भाग 3 — भाव, गुण और व्यवहार के उच्च-आवृत्ति विलोम
| शब्द | विलोम | प्रयोग-वाक्य |
|---|---|---|
| आदि | अंत | इस कथा का आदि जितना रोचक है, अंत उतना ही मार्मिक। |
| आय | व्यय | परिवार की आय बढ़ी, पर व्यय भी बढ़ गया। |
| उत्थान | पतन | अनुशासन से उत्थान होता है, लापरवाही से पतन। |
| उदय | अस्त | सूर्य के उदय और अस्त का दृश्य मनोहर होता है। |
| उन्नति | अवनति | कर्म से उन्नति होती है, आलस्य से अवनति। |
| गुण | अवगुण / दोष | मनुष्य को गुण देखकर अपनाओ, अवगुण छोड़ो। |
| जन्म | मृत्यु | जन्म और मृत्यु जीवन के दो छोर हैं। |
| ज्ञान | अज्ञान | ज्ञान से प्रकाश होता है, अज्ञान से अंधकार। |
| तीव्र | मंद | उसकी बुद्धि तीव्र थी, गति मंद। |
| धनी | निर्धन | धनी हो या निर्धन, कानून सबके लिए समान है। |
| निंदा | स्तुति / प्रशंसा | वह निंदा से दुखी और स्तुति से प्रसन्न नहीं होता। |
| पाप | पुण्य | पाप का फल दुख, पुण्य का फल सुख माना गया है। |
| प्रकाश | अंधकार | दीपक ने अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाया। |
| बंधन | मुक्ति | ज्ञान से बंधन कटता है और मुक्ति मिलती है। |
| मित्र | शत्रु | सच्चा मित्र विपत्ति में पहचाना जाता है, शत्रु अवसर में। |
| यश | अपयश | सत्कर्म से यश मिलता है, कुकर्म से अपयश। |
| लाभ | हानि | व्यापार में कभी लाभ होता है, कभी हानि। |
| विजय | पराजय | सेना की विजय हुई और शत्रु की पराजय। |
| संयोग | वियोग | मिलन का संयोग हो तो बिछुड़ने का वियोग भी आता है। |
| सुख | दुख | जीवन में सुख और दुख दोनों आते हैं। |
| स्वतंत्र | परतंत्र / पराधीन | भारत स्वतंत्र हुआ, उससे पहले परतंत्र था। |
| हर्ष | विषाद / शोक | हर्ष का अवसर अचानक विषाद में बदल गया। |
| आशा | निराशा | आशा जीवन देती है, निराशा उसे छीनती है। |
| सम्मान | अपमान | बड़ों का सम्मान करो, उनका अपमान नहीं। |
भाग 4 — विशेषण, गुण और स्थिति के विलोम
| शब्द | विलोम | प्रयोग-वाक्य |
|---|---|---|
| कटु | मधुर | कटु वचन से बचो, मधुर वाणी बोलो। |
| कठोर | कोमल | लोहा कठोर है, रुई कोमल। |
| उष्ण | शीत | ग्रीष्म में उष्ण पवन चलती है, शीत ऋतु में शीतल। |
| स्थूल | सूक्ष्म | स्थूल वस्तुएँ आँख से दिखती हैं, सूक्ष्म जीव सूक्ष्मदर्शी से। |
| स्थायी | अस्थायी | स्थायी नौकरी में सुरक्षा होती है, अस्थायी में नहीं। |
| क्षणिक | शाश्वत | सुख क्षणिक है, ईश्वर शाश्वत। |
| सरल | कठिन / जटिल | सरल प्रश्न पहले हल करो, जटिल बाद में। |
| सुगम | दुर्गम | सुगम मार्ग पर चलना आसान है, दुर्गम पर कठिन। |
| सुलभ | दुर्लभ | वायु सुलभ है, हीरा दुर्लभ। |
| सजीव | निर्जीव | पेड़ सजीव है, पत्थर निर्जीव। |
| सगुण | निर्गुण | भक्त सगुण रूप की पूजा करता है, संत निर्गुण की। |
| साकार | निराकार | मूर्ति साकार है, ध्यान की ज्योति निराकार। |
| सफल | असफल / विफल | परिश्रमी सफल होता है, आलसी विफल। |
| सार्थक | निरर्थक | सार्थक बातें करो, निरर्थक नहीं। |
| साक्षर | निरक्षर | साक्षर समाज उन्नति करता है, निरक्षर समाज पिछड़ता है। |
| सज्जन | दुर्जन | सज्जन की संगति से लाभ होता है, दुर्जन की से हानि। |
| आस्तिक | नास्तिक | आस्तिक ईश्वर में विश्वास रखता है, नास्तिक नहीं। |
| प्राचीन | अर्वाचीन / नवीन | प्राचीन परंपरा और अर्वाचीन विचार दोनों का सम्मान करो। |
| विशाल | लघु | विशाल पर्वत के सामने लघु कंकड़ भी महत्त्व रखता है। |
| स्वदेशी | विदेशी | स्वदेशी वस्तुएँ अपनाओ, विदेशी पर निर्भरता घटाओ। |
| ग्राह्य | त्याज्य | अच्छी बात ग्राह्य है, बुरी त्याज्य। |
| सरस | नीरस | सरस कविता मन मोहती है, नीरस भाषण ऊब पैदा करता है। |
| ऐच्छिक | अनिवार्य | ऐच्छिक विषय चुने जा सकते हैं, अनिवार्य नहीं। |
| मौखिक | लिखित | मौखिक परीक्षा बोलकर होती है, लिखित लिखकर। |
भाग 5 — साहित्यिक, दार्शनिक और जोड़ा याद रखने योग्य विलोम
ये जोड़े नियम से नहीं बनते। इन्हें जोड़े के रूप में ही याद करना पड़ता है, इसीलिए ये परीक्षा में प्रिय हैं।
| शब्द | विलोम | प्रयोग-वाक्य |
|---|---|---|
| आरोह | अवरोह | संगीत में स्वर का आरोह और अवरोह दोनों सीखे जाते हैं। |
| आविर्भाव | तिरोभाव | कवि के आविर्भाव और तिरोभाव की तिथियाँ ज्ञात हैं। |
| अनुराग | विराग | राजा का राज्य से अनुराग घटकर विराग में बदल गया। |
| उत्कर्ष | अपकर्ष | कला का उत्कर्ष किसी युग में हुआ, अपकर्ष किसी में। |
| आकर्षण | विकर्षण | समान आवेशों में विकर्षण होता है, विपरीत में आकर्षण। |
| अनुकूल | प्रतिकूल | अनुकूल हवा में नाव तेज़ चलती है, प्रतिकूल में धीमी। |
| आदान | प्रदान | विचारों का आदान-प्रदान समाज को जोड़ता है। |
| आयात | निर्यात | भारत ने तेल का आयात बढ़ाया और अनाज का निर्यात। |
| सृष्टि | प्रलय | सृष्टि और प्रलय का चक्र चलता रहता है। |
| प्रवृत्ति | निवृत्ति | सांसारिक प्रवृत्ति छोड़कर उसने निवृत्ति का मार्ग अपनाया। |
| विधि | निषेध | विधि है कि सत्य बोलो, निषेध है कि चोरी मत करो। |
| लौकिक | अलौकिक / पारलौकिक | यह सुख लौकिक है, वह अलौकिक। |
| इहलोक | परलोक | इहलोक में किया कर्म परलोक का मार्ग तय करता है। |
| सकाम | निष्काम | निष्काम कर्म गीता का संदेश है। |
| चेतन | जड़ | मन चेतन है, पत्थर जड़। |
| स्थावर | जंगम | पेड़ स्थावर है, पशु जंगम। |
| ज्येष्ठ | कनिष्ठ | ज्येष्ठ भ्राता ने कनिष्ठ को राह दिखाई। |
| संकोच | विस्तार | धातु ठंड से सिकुड़ती (संकोच) और गर्मी से फैलती (विस्तार) है। |
| संक्षेप | विस्तार | संक्षेप में कहो या विस्तार से, पर स्पष्ट कहो। |
| शुक्ल | कृष्ण | शुक्ल पक्ष में चाँद बढ़ता है, कृष्ण पक्ष में घटता है। |
| सुर | असुर | सुर और असुर के संघर्ष की कथाएँ लोकप्रिय हैं। |
| मानव | दानव | मानव में दया है, दानव में क्रूरता। |
| रक्षक | भक्षक | जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय कहाँ मिले। |
| कृतज्ञ | कृतघ्न | कृतज्ञ व्यक्ति उपकार मानता है, कृतघ्न भूल जाता है। |
| वरदान | अभिशाप | विज्ञान वरदान भी है और अभिशाप भी, उपयोग पर निर्भर है। |
भाग 6 — उपसर्ग से विलोम: नियम और अपवाद
उपसर्ग लगाकर विलोम बनाने के चार पैटर्न हैं। पहले नियम समझो, फिर अपवाद देखो।
| पैटर्न | नियम | उदाहरण | क्यों काम करता है |
|---|---|---|---|
| नकार-उपसर्ग लगाना | व्यंजन से पहले अ, स्वर से पहले अन् | संभव × असंभव, उचित × अनुचित, आदि × अनादि | अ/अन् का अर्थ है "नहीं" |
| निर् / निः / दुर् / दुः | अभावसूचक या बुरा-अर्थ देने वाले | गुण × निर्गुण, आशा × निराशा, सुगम × दुर्गम, सुलभ × दुर्लभ | "सु" (अच्छा) का विपरीत "दुर्" (बुरा/कठिन) |
| कु और सु | अच्छे-बुरे का भाव | सुपुत्र × कुपुत्र, सुमार्ग × कुमार्ग, सुयोग × कुयोग | कु = बुरा, सु = अच्छा |
| उपसर्ग बदलना | पहले से लगे उपसर्ग को विरोधी उपसर्ग से बदलो | उत्कर्ष × अपकर्ष, आरोह × अवरोह, संयोग × वियोग, अनुकूल × प्रतिकूल | उत् (ऊपर) × अप/अव (नीचे), सम् (साथ) × वि (अलग), अनु (साथ) × प्रति (उलटा) |
अब वे जोड़े जहाँ "सीधा नियम" धोखा देता है:
| शब्द | कौन-सा नियम चल जाता है | सही विलोम | क्या नहीं चलता |
|---|---|---|---|
| अमर | "अ" पहले से लगा है | नश्वर / मर्त्य | "अनमर" शब्द नहीं |
| सम्मान | नकार-उपसर्ग | अपमान | "असम्मान" व्यवहार में नहीं चलता |
| जय | उपसर्ग-परिवर्तन | पराजय | "अजय" का अर्थ है "जो जीता न जा सके", विलोम नहीं |
| सरल | "अ" से नहीं बनता | कठिन / जटिल | "असरल" नहीं |
| आशा | निर् जुड़ता है | निराशा | "अआशा" नहीं |
| धर्म | अ जुड़ता है | अधर्म | यहाँ नकार-उपसर्ग ठीक बैठता है |
| सफल | कई विलोम हैं | असफल / विफल / निष्फल | प्रश्न में जो विकल्प दिया हो वही उत्तर |
| अनाथ | उपसर्ग पहले से है | सनाथ | "अअनाथ" नहीं |
| आस्था | अन् जुड़ता है (स्वर से पहले) | अनास्था | यहाँ भी नियम काम करता है |
| स्वतंत्र | उपसर्ग बदलता है | परतंत्र / पराधीन | "अस्वतंत्र" व्यवहार में कम |
भाग 7 — हल सहित उदाहरण
| क्र. | प्रश्न | उत्तर | हल और कारण |
|---|---|---|---|
| 1 | "उत्कर्ष" का विलोम: उन्नति, अपकर्ष, विकास, प्रगति | अपकर्ष | उन्नति, विकास और प्रगति समानार्थी हैं, इसलिए तीनों विलोम नहीं हो सकते। उत् (ऊपर) के विरुद्ध अप (नीचे) लगकर अपकर्ष बनता है। |
| 2 | "अमर" का विलोम: अजर, अनमर, नश्वर, अटल | नश्वर | अमर = जो न मरे। विलोम = जो नष्ट हो जाए। "अनमर" शब्द है ही नहीं, और अजर (जो बूढ़ा न हो) तथा अटल अमर से जुड़े भाव हैं, उलटे नहीं। |
| 3 | "कटु" का विलोम: तिक्त, मधुर, कसैला, खट्टा | मधुर | तिक्त (कड़वा) कटु का पर्याय है। मधुर स्वाद और वाणी, दोनों में कटु का सटीक विपरीत है। |
| 4 | "आरोह" का विलोम: चढ़ाई, अवरोह, उतार-चढ़ाव, स्थिरता | अवरोह | आरोह = ऊपर चढ़ना, अवरोह = नीचे उतरना। उपसर्ग-परिवर्तन आ → अव का पैटर्न। |
| 5 | "प्रवृत्ति" का विलोम: निवृत्ति, आसक्ति, उत्पत्ति, प्रगति | निवृत्ति | प्रवृत्ति = कर्म में लगना, निवृत्ति = कर्म से हटना। प्र × नि का जोड़ा। |
| 6 | "सुगम" का विलोम: सुलभ, दुर्गम, सरल, स्वाभाविक | दुर्गम | सुगम = जहाँ पहुँचना आसान हो। सुलभ और सरल उसी के पास के भाव हैं (समानार्थी जैसे), इसलिए छँटते हैं। सु × दुर् का जोड़ा दुर्गम देता है, यानी जहाँ पहुँचना कठिन हो। |
| 7 | "ज्येष्ठ" का विलोम: अनुज, कनिष्ठ, अग्रज, श्रेष्ठ | कनिष्ठ | ज्येष्ठ (सबसे बड़ा) × कनिष्ठ (सबसे छोटा)। अग्रज ज्येष्ठ का निकट-अर्थी है, श्रेष्ठ गुण बताता है, उम्र नहीं। अनुज संज्ञा (छोटा भाई) है, जबकि ज्येष्ठ विशेषण है, इसलिए कोटि भी मेल नहीं खाती। |
| 8 | "स्थावर" का विलोम: जंगम, स्थिर, अचल, निश्चल | जंगम | स्थावर = न हिलने वाला, जंगम = चलने वाला। बाकी तीनों स्थावर के पर्याय हैं। |
| 9 | "सकाम" का विलोम: निष्काम, सकर्म, इच्छित, कामी | निष्काम | सकाम = इच्छा-सहित, निष्काम = इच्छा-रहित। गीता में निष्काम कर्म का संदेश इसी से प्रसिद्ध है। |
| 10 | "इहलोक" का विलोम: स्वर्ग, परलोक, पाताल, देवलोक | परलोक | इहलोक = यह लोक, परलोक = दूसरा लोक। जोड़ा याद रखने योग्य है। |
| 11 | "रक्षक" का विलोम: भक्षक, पालक, शिक्षक, दर्शक | भक्षक | रक्षक = बचाने वाला, भक्षक = खाने वाला। "र" और "भ" का अंतर, पूरा अर्थ उलटा। |
| 12 | "लौकिक" का विलोम: अलौकिक, भौतिक, सामाजिक, सांसारिक | अलौकिक | भौतिक और सांसारिक लौकिक के निकट-अर्थी हैं, विपरीत नहीं। |
| 13 | निम्न में विलोम-जोड़ा नहीं है: सृष्टि × प्रलय, कृतज्ञ × कृतघ्न, सुर × देव, चेतन × जड़ | सुर × देव | सुर और देव पर्याय हैं। बाकी तीनों विलोम हैं। |
| 14 | "राजा" का विलोम: रानी, प्रजा, रंक, सेवक | रंक | रानी स्त्रीलिंग रूप है, विलोम नहीं। परीक्षा में राजा × रंक जोड़ा प्रचलित है। |
| 15 | "संयोग" का विलोम: वियोग, मिलन, योग, भोग | वियोग | मिलन और योग समानार्थी हैं। संयोग × वियोग, उपसर्ग सम् × वि। |
भाग 8 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)
| जाल | क्यों आकर्षक है | सच क्या है |
|---|---|---|
| समानार्थी को विलोम समझना | विकल्प में दिया समानार्थी शब्द देखने में "ठीक" लगता है | विलोम में अर्थ उलटा होता है, पास नहीं। कटु × मधुर, कटु × तिक्त नहीं |
| हर शब्द में "अ" जोड़ना | कई विलोम इसी से बनते हैं | सम्मान × अपमान, जय × पराजय, सरल × जटिल: नियम चूकता है |
| निकट-अर्थी पर रुकना | "भौतिक" लौकिक के पास है | लौकिक × अलौकिक; भौतिक × आध्यात्मिक |
| कोटि बदल देना | संज्ञा के विलोम में विशेषण चुनना | ज्ञान (संज्ञा) × अज्ञान (संज्ञा); ज्ञानी (विशेषण) × अज्ञानी (विशेषण) |
| स्त्रीलिंग को विलोम समझना | राजा × रानी "जोड़ी" लगती है | राजा × रंक/प्रजा; राजा × रानी लिंग-भेद है |
| एकाधिक विलोम | सफल × असफल, विफल | जो विकल्प दिया हो वही चुनो; दोनों दिए हों तो प्रश्न का प्रसंग देखो |
| दुर् वाले जोड़ों में अदला-बदली | सुगम और सुलभ दिखने में पास हैं | सुगम × दुर्गम और सुलभ × दुर्लभ अलग जोड़े हैं; विकल्प में जिसका जोड़ा बनता हो वही चुनो |
| लिंग बदलना | पुत्र × पुत्री एक जोड़ी लगती है | यह लिंग-भेद है, विलोम नहीं; पुत्र का विलोम पूछा जाए तो भी पुत्री उत्तर नहीं |
भाग 9 — रैपिड अभ्यास: 20 प्रश्न और उत्तर
| क्र. | शब्द | विलोम |
|---|---|---|
| 1 | अनुराग | विराग |
| 2 | आदर | अनादर / अपमान |
| 3 | कृपण | उदार / दानी |
| 4 | गुरुता | लघुता |
| 5 | जड़ | चेतन |
| 6 | तम | प्रकाश / ज्योति |
| 7 | दुर्जन | सज्जन |
| 8 | निर्माण | विनाश |
| 9 | भोगी | योगी |
| 10 | मूक | वाचाल |
| 11 | विधि | निषेध |
| 12 | वृद्ध | युवा / बालक |
| 13 | शुष्क | आर्द्र |
| 14 | संग्रह | त्याग |
| 15 | सत्य | असत्य / झूठ |
| 16 | स्वर्ग | नरक |
| 17 | हिंसा | अहिंसा |
| 18 | अधिकार | कर्तव्य |
| 19 | धीर | अधीर |
| 20 | न्याय | अन्याय |
भाग 10 — अभ्यास-दिनचर्या
| दिन | क्या करें | समय |
|---|---|---|
| 1-2 | भाग 3 और 4 के जोड़े: विलोम स्तंभ ढककर लिखो | 25 मिनट |
| 3 | भाग 5 के साहित्यिक जोड़े; हर जोड़े से एक अपना वाक्य बनाओ | 20 मिनट |
| 4 | भाग 6 की उपसर्ग-तालिका और अपवाद-सूची बार-बार दोहराओ | 20 मिनट |
| 5 | भाग 7 के उदाहरण बिना हल देखे दोबारा हल करो | 20 मिनट |
| 6 | भाग 9 का रैपिड अभ्यास 8 मिनट में पूरा करो | 8 मिनट |
| 7 | पूरे सप्ताह की गलतियाँ लिखकर दोहराओ | 15 मिनट |
अभ्यास के समय तीन आदतें बनाओ। पहली, हर प्रश्न में पहले अपना विलोम लिखो, फिर विकल्प देखो। दूसरी, यदि दो विकल्प लगभग सही लगें, तो देखो कि कौन-सा समानार्थी है और कौन-सा विपरीत। तीसरी, हर गलत जोड़े को सप्ताह के अंत में एक कार्ड पर लिखकर अगले सप्ताह दोहराओ।
भाग 11 — यह विषय आगे कहाँ जुड़ता है
- पर्यायवाची शब्द: विलोम और पर्याय साथ पढ़ने से दोनों का अंतर पक्का होता है।
- उपसर्ग और प्रत्यय: अ, अन, निर्, दुर् जैसे उपसर्ग विलोम बनाते हैं।
- अनेक शब्दों के लिए एक शब्द: कृतज्ञ-कृतघ्न जैसे जोड़े यहाँ भी आते हैं।
- गद्यांश: विपरीत भाव पहचानने वाले प्रश्नों में यही समझ काम आती है।
Practice questions
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Q1. 'ज्येष्ठ' का विलोम शब्द चुनिए।
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Answer: B
'ज्येष्ठ' का अर्थ है बड़ा या आयु में अधिक। इसका विलोम 'कनिष्ठ' है जिसका अर्थ है छोटा या आयु में कम।
Q2. 'गुरु' शब्द का विलोम (जब अर्थ 'भारी' हो) क्या होगा?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
जब 'गुरु' का अर्थ 'भारी' या बड़ा होता है, तब इसका मानक विलोम 'लघु' (छोटा/हल्का) होता है। 'शिष्य' केवल 'गुरु = शिक्षक' अर्थ का विलोम है।
Q3. 'आस्तिक' शब्द का उपयुक्त विलोम है—
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'आस्तिक' वह है जो ईश्वर में विश्वास रखता है। इसका विलोम 'नास्तिक' है जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखता।
Q4. 'उर्वर' शब्द का सही विलोम है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
'उर्वर' का अर्थ है उपजाऊ भूमि। इसका विलोम 'बंजर' है जिसका अर्थ है जिसमें कुछ न उपजे।
Q5. 'सापेक्ष' शब्द का उपयुक्त विलोम है—
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'सापेक्ष' का अर्थ है किसी की अपेक्षा रखने वाला (relative)। इसका विलोम 'निरपेक्ष' है जिसका अर्थ है जो किसी पर निर्भर न हो (absolute)।
Q6. 'अल्पज्ञ' शब्द का उपयुक्त विलोम है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
'अल्पज्ञ' का अर्थ है थोड़ा जानने वाला। इसका मानक विलोम 'सर्वज्ञ' है जिसका अर्थ है सब कुछ जानने वाला।
Q7. 'आरोह' का विलोम शब्द चुनिए।
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Answer: A
'आरोह' का अर्थ है चढ़ाव या ऊपर की ओर जाना। इसका मानक विलोम 'अवरोह' है जिसका अर्थ है उतार या नीचे की ओर आना।
Q8. 'मौखिक' का विलोम शब्द चुनिए।
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'मौखिक' का अर्थ है मुख से कहा हुआ। इसका मानक विलोम 'लिखित' है जिसका अर्थ है लिखा हुआ।
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