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Exam Topic CUET Hindi · 102 40 practice MCQs

समास

समास is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.

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एक नज़र में

भाग 1 — समास के छह भेद (प्रधानता के आधार पर)

समास प्रधान पद पहचान उदाहरण
तत्पुरुष उत्तर (बाद वाला) बीच की विभक्ति लुप्त राजपुत्र = राजा का पुत्र
कर्मधारय उत्तर विशेषण-विशेष्य/उपमान संबंध नीलकमल = नीला कमल
द्विगु उत्तर पहला पद संख्यावाचक त्रिलोक = तीन लोकों का समूह
द्वंद्व दोनों "और/या" से जुड़े माता-पिता = माता और पिता
बहुव्रीहि कोई नहीं (अन्य पद) समस्त पद किसी तीसरे का बोध कराए दशानन = दस मुख वाला (रावण)
अव्ययीभाव पूर्व (पहला) पहला पद अव्यय, पूरा अव्यय बने यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार

भाग 2 — तत्पुरुष समास के उपभेद (विभक्ति के अनुसार)

उपभेद लुप्त विभक्ति उदाहरण
कर्म तत्पुरुष को गिरहकट = गिरह को काटने वाला
करण तत्पुरुष से/के द्वारा तुलसीकृत = तुलसी द्वारा कृत
संप्रदान तत्पुरुष के लिए रसोईघर = रसोई के लिए घर
अपादान तत्पुरुष से (अलग) पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट
संबंध तत्पुरुष का/के/की राजपुत्र = राजा का पुत्र
अधिकरण तत्पुरुष में/पर आपबीती = आप पर बीती

भाग 3 — विधि (समास का भेद कैसे पहचानें)

  1. विग्रह करो — समस्त पद को घटक शब्दों में खोलो और बीच का संबंध-शब्द जोड़ो।
  2. प्रधान पद देखो — कौन-सा शब्द अर्थ का केंद्र है? - उत्तर पद प्रधान → तत्पुरुष/कर्मधारय/द्विगु। - दोनों प्रधान → द्वंद्व। - कोई नहीं, अन्य अर्थ → बहुव्रीहि। - पहला (अव्यय) प्रधान → अव्ययीभाव।
  3. पहला पद संख्यावाचक? → द्विगु; विशेषण? → कर्मधारय।
  4. समस्त पद किसी तीसरे का बोध कराए? → बहुव्रीहि।

भाग 4 — कर्मधारय बनाम बहुव्रीहि (महत्वपूर्ण भेद)

भाग 5 — हल किए हुए उदाहरण

  1. राजपुत्र = राजा का पुत्र → तत्पुरुष (संबंध)।
  2. नीलगगन = नीला गगन → कर्मधारय।
  3. चतुर्भुज = चार भुजाओं का समूह → द्विगु (या चार भुजा वाला = बहुव्रीहि, अर्थानुसार)।
  4. माता-पिता = माता और पिता → द्वंद्व।
  5. दशानन = दस मुख वाला (रावण) → बहुव्रीहि।
  6. यथासंभव = जैसा संभव हो → अव्ययीभाव।
  7. त्रिफला = तीन फलों का समूह → द्विगु।
  8. पीतांबर = पीला है अंबर जिसका (कृष्ण) → बहुव्रीहि।
  9. रसोईघर = रसोई के लिए घर → तत्पुरुष (संप्रदान)।
  10. आजन्म = जन्म से लेकर → अव्ययीभाव।

भाग 6 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)

भाग 7 — समास में प्रधानता ही कुंजी क्यों है

समास के छह भेदों को अलग-अलग रटने के बजाय यदि आप एक केंद्रीय प्रश्न पकड़ लें — "इस समस्त पद में अर्थ का केंद्र (प्रधान पद) कौन है?" — तो लगभग हर भेद स्वतः पहचान में आ जाता है। यदि अर्थ का भार बाद वाले पद पर है (राजपुत्र में "पुत्र"), तो वह तत्पुरुष परिवार का है — और भीतर यह देखना शेष रहता है कि पहला पद विशेषण है (कर्मधारय) या संख्या (द्विगु) या साधारण संज्ञा (शुद्ध तत्पुरुष)। यदि दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं और उनके बीच "और/या" का भाव है (माता-पिता, सुख-दुख), तो वह द्वंद्व है। यदि अर्थ का केंद्र पहले अव्यय पद पर है और पूरा शब्द क्रियाविशेषण-सा व्यवहार करता है (यथाशक्ति, आजीवन), तो अव्ययीभाव। और सबसे रोचक स्थिति तब है जब अर्थ का केंद्र समस्त पद के भीतर किसी पद पर नहीं, बल्कि किसी बाहरी तीसरे व्यक्ति या वस्तु पर है — "दशानन" का अर्थ न "दस" है न "आनन", बल्कि "वह जिसके दस मुख हैं" अर्थात रावण; यही बहुव्रीहि है। इसलिए हर प्रश्न में पहले विग्रह कीजिए, फिर पूछिए कि अर्थ किस पर टिका है; यह एक प्रश्न आपको छहों भेदों के बीच सही मार्ग दिखा देगा, और समास, जो कई विद्यार्थियों को उलझाता है, आपके लिए सरल और निश्चित अंक बन जाएगा।

भाग 8 — विस्तृत अभ्यास (समास-विग्रह व भेद)

  1. नीलकमल = नीला कमल → कर्मधारय।
  2. चौराहा = चार राहों का समूह → द्विगु।
  3. राजा-रानी = राजा और रानी → द्वंद्व।
  4. लंबोदर = लंबा है उदर जिसका (गणेश) → बहुव्रीहि।
  5. प्रतिदिन = प्रत्येक दिन → अव्ययीभाव।
  6. महात्मा = महान है जो आत्मा → कर्मधारय।
  7. त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह → द्विगु।
  8. देशभक्ति = देश के लिए भक्ति → तत्पुरुष (संप्रदान)।
  9. चंद्रमुख = चंद्र जैसा मुख → कर्मधारय (उपमान)।
  10. गिरिधर = गिरि को धारण करने वाला (कृष्ण) → बहुव्रीहि।
  11. यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार → अव्ययीभाव।
  12. भाई-बहन = भाई और बहन → द्वंद्व।

भाग 9 — संधि और समास में अंतर (भ्रम मिटाएँ)

कई विद्यार्थी संधि और समास में भ्रमित हो जाते हैं, क्योंकि दोनों में शब्दों का मेल होता है; पर दोनों मूलतः भिन्न हैं, और यह अंतर समझना दोनों विषयों में सही उत्तर देने के लिए आवश्यक है। संधि वर्णों (ध्वनियों) का मेल है — यहाँ दो शब्दों के पास-पास आने पर मेल-बिंदु की ध्वनि बदलती है (विद्या + आलय = विद्यालय, जहाँ आ+आ मिलकर एक दीर्घ आ बना); संधि का संबंध उच्चारण से है, अर्थ-संबंध से नहीं। समास शब्दों (पदों) का मेल है — यहाँ दो शब्दों के बीच का कारक-चिह्न (विभक्ति) लुप्त होता है और एक नया अर्थपूर्ण शब्द बनता है (राजा का पुत्र = राजपुत्र, जहाँ "का" लुप्त हुआ); समास का संबंध अर्थ और व्याकरणिक संबंध से है। एक सरल पहचान — यदि मेल पर कोई ध्वनि-परिवर्तन हुआ हो (अ+इ=ए जैसा), तो संधि का प्रश्न है; यदि बीच का "का/के/में/से/और" जैसा संबंध-शब्द हटा हो, तो समास का। इसी प्रकार, संधि का विच्छेद ध्वनि-नियमों से होता है, जबकि समास का विग्रह अर्थ-संबंध जोड़कर होता है। इन दोनों प्रक्रियाओं को मन में स्पष्ट रखने पर आप परीक्षा में यह भूल कभी नहीं करेंगे कि किस शब्द पर कौन-सा नियम लगाना है — और हिंदी व्याकरण के ये दोनों महत्वपूर्ण भाग आपके लिए सरल हो जाएँगे।

भाग 10 — इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें

छह भेदों की पहचान-तालिका (भाग 1) और तत्पुरुष के उपभेद (भाग 2) समझें, हर प्रश्न में पहले विग्रह करें फिर प्रधान पद से भेद तय करें (भाग 3)। भाग 8 के विस्तृत अभ्यास को हल करें, संधि-समास का अंतर (भाग 9) स्पष्ट रखें, और कर्मधारय-बहुव्रीहि तथा द्विगु-बहुव्रीहि के भेद (भाग 4, 6) पर विशेष अभ्यास करें, क्योंकि परीक्षा यहीं उलझाती है।

एक पंक्ति का सार: समास शब्दों का संक्षेप है; विग्रह करके देखो कि प्रधान पद कौन है — उत्तर पद (तत्पुरुष/कर्मधारय/द्विगु), दोनों (द्वंद्व), बाहरी तीसरा (बहुव्रीहि), या पहला अव्यय (अव्ययीभाव)।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.

Q1. 'हस्तलिखित' शब्द का सही विग्रह क्या है?

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Answer: C

'हस्तलिखित' करण तत्पुरुष है; इसका विग्रह 'हस्त (हाथ) से लिखित' होता है, जिसमें करण कारक ('से') का लोप हुआ है।

Q2. 'यथासंभव' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: C

'यथासंभव' का विग्रह है 'जैसा संभव हो'। पूर्वपद 'यथा' अव्यय है और पूरा पद क्रियाविशेषण की तरह अव्यय रूप में प्रयुक्त होता है, अतः यह अव्ययीभाव समास है।

Q3. 'यथाशक्ति' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: A

'यथाशक्ति' का विग्रह है 'शक्ति के अनुसार'। पूर्वपद 'यथा' अव्यय है और पूरा समस्तपद क्रियाविशेषण की तरह अव्यय का काम करता है, अतः यह अव्ययीभाव समास है।

Q4. 'भाई-बहन' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: A

'भाई-बहन' का विग्रह है 'भाई और बहन'। दोनों पद प्रधान हैं तथा 'और' योजक का लोप है, अतः यह द्वंद्व समास है।

Q5. 'त्रिनेत्र' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: C

'त्रिनेत्र' का विग्रह है 'तीन हैं नेत्र जिसके, अर्थात् शिव'। समस्तपद किसी अन्य (शिव) का बोध कराता है, अतः यह बहुव्रीहि समास है, न कि द्विगु।

Q6. 'घुड़सवार' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: A

'घुड़सवार' का विग्रह है 'घोड़े पर सवार'। यहाँ अधिकरण कारक ('पर') का लोप होता है और उत्तरपद प्रधान है, अतः यह अधिकरण तत्पुरुष समास है।

Q7. 'चंद्रमुख' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: B

'चंद्रमुख' का विग्रह है 'चंद्र के समान मुख'। इसमें उपमान (चंद्र) और उपमेय (मुख) का सादृश्य संबंध है, जो उपमानवाचक कर्मधारय समास है।

Q8. 'दशानन' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: B

'दशानन' का विग्रह है 'दश हैं आनन (मुख) जिसके, अर्थात् रावण'। समस्तपद अपने पदों से भिन्न किसी अन्य (रावण) का बोध कराता है, अतः यह बहुव्रीहि समास है, न कि द्विगु।

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