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Exam Topic CUET Hindi · 102 40 practice MCQs

समास

समास is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.

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एक नज़र में

भाग 1 — समास क्या है और क्यों बनता है

Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.

भाषा संक्षेप चाहती है। "राजा का पुत्र" कहने में तीन शब्द लगते हैं, पर "राजपुत्र" एक शब्द में वही अर्थ दे देता है। ऐसा तभी हो पाता है जब बीच का संबंध-शब्द (यहाँ "का") हटा दिया जाए। यही समास है: कम शब्दों में पूरा अर्थ, और संबंध श्रोता खुद समझ लेता है।

कुछ शब्द समझ लीजिए। जो नया जुड़ा हुआ शब्द बनता है, वह समस्त पद (या सामासिक शब्द) है। उसके पहले खंड को पूर्व पद और दूसरे को उत्तर पद कहते हैं। समस्त पद को खोलकर संबंध-शब्द सहित लिखना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे समस्त पद राजपुत्र का विग्रह राजा का पुत्र है।

समास प्रधान पद विग्रह में पहचान समस्त पद और विग्रह
तत्पुरुष उत्तर पद कारक-चिह्न (को, से, के लिए, का, में) लुप्त राजपुत्र = राजा का पुत्र
कर्मधारय उत्तर पद विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय; "है जो", "के समान" महापुरुष = महान है जो पुरुष
द्विगु उत्तर पद पूर्व पद संख्या, पूरा शब्द समूह बताए त्रिलोक = तीन लोकों का समूह
द्वंद्व दोनों पद और, तथा, या से जुड़े माता-पिता = माता और पिता
बहुव्रीहि कोई नहीं; अर्थ किसी तीसरे का बोध कराए जिसका, जिसके, वाला दशानन = दस हैं आनन जिसके (रावण)
अव्ययीभाव पूर्व पद (अव्यय) पहला पद अव्यय; पूरा शब्द अव्यय बन जाए यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार

यहाँ "प्रधान" का अर्थ है वह पद जिस पर अर्थ का भार हो। "राजपुत्र" का मुख्य अर्थ "पुत्र" है, राजा केवल उसकी पहचान बताता है। "माता-पिता" में दोनों बराबर महत्त्व के हैं। "दशानन" में न दश मुख्य है, न आनन: अर्थ रावण पर जाता है।

रुकिए और सोचिए: "माता-पिता" का विग्रह "माता का पिता" क्यों नहीं हो सकता?

उत्तर जाँचिए: दोनों पद अलग-अलग व्यक्ति हैं और बराबर महत्त्व रखते हैं; उनके बीच "और" का संबंध है, "का" का नहीं। इसलिए यह तत्पुरुष नहीं, द्वंद्व है।

भाग 2 — तत्पुरुष समास और उसके छह उपभेद

तत्पुरुष में पूर्व पद और उत्तर पद के बीच कोई कारक-चिह्न (विभक्ति) छिपा रहता है और उत्तर पद प्रधान होता है। जो कारक-चिह्न छिपा हो, उसी के नाम पर उपभेद का नाम पड़ता है।

उपभेद लुप्त चिह्न समस्त पद विग्रह
कर्म तत्पुरुष को शरणागत शरण को आगत
कर्म तत्पुरुष को यशप्राप्त यश को प्राप्त
करण तत्पुरुष से, द्वारा तुलसीकृत तुलसी द्वारा कृत
करण तत्पुरुष से, द्वारा हस्तलिखित हाथ से लिखित
संप्रदान तत्पुरुष के लिए रसोईघर रसोई के लिए घर
संप्रदान तत्पुरुष के लिए हथकड़ी हाथ के लिए कड़ी
अपादान तत्पुरुष से (अलग होना) पथभ्रष्ट पथ से भ्रष्ट
अपादान तत्पुरुष से (अलग होना) ऋणमुक्त ऋण से मुक्त
संबंध तत्पुरुष का, के, की राजमहल राजा का महल
संबंध तत्पुरुष का, के, की गंगाजल गंगा का जल
अधिकरण तत्पुरुष में, पर आपबीती आप पर बीती
अधिकरण तत्पुरुष में, पर कलाप्रवीण कला में प्रवीण

एक सातवाँ रूप नञ् तत्पुरुष भी पूछा जाता है। इसमें पूर्व पद "अ" या "अन्" होता है और अर्थ "न" या "नहीं" का बनता है: असत्य = न सत्य, अनादि = न आदि, अधर्म = न धर्म। विग्रह में "न" आने पर इसे पहचानिए।

कर्म और संप्रदान का अंतर: दोनों में "को" हो सकता है, पर कर्म में क्रिया का फल सीधे पड़ता है ("शरण को आगत"), जबकि संप्रदान में "के लिए" का भाव है। करण और अपादान का अंतर: करण में "से" साधन बताता है (हाथ से लिखित), अपादान में "से" अलगाव बताता है (पथ से भ्रष्ट)। प्रश्न यही है: "से" के बाद का शब्द उपकरण है या छोड़ी हुई चीज़?

भाग 3 — कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व: तीन भेद एक नज़र में

कर्मधारय में दोनों पद एक ही वस्तु या व्यक्ति के बारे में बताते हैं। इसके दो रूप आते हैं।

रूप पहचान समस्त पद विग्रह
विशेषण-विशेष्य पहला पद विशेषता बताए नीलकमल नीला है जो कमल
विशेषण-विशेष्य पहला पद विशेषता बताए महापुरुष महान है जो पुरुष
उपमान-उपमेय "के समान" या "रूपी" चंद्रमुख चंद्र के समान मुख
उपमान-उपमेय "के समान" या "रूपी" देहलता देह रूपी लता

द्विगु में पूर्व पद संख्या होता है और पूरा शब्द किसी समूह या संग्रह को बताता है। इसमें अर्थ किसी बाहरी तीसरे का नहीं होता, समूह का ही होता है।

समस्त पद विग्रह
त्रिलोक तीन लोकों का समूह
पंचवटी पाँच वटों का समूह
सप्ताह सात दिनों का समूह
नवग्रह नौ ग्रहों का समूह
शताब्दी सौ वर्षों का समूह
त्रिफला तीन फलों का समूह

द्वंद्व में दोनों पद प्रधान हैं और विग्रह "और", "तथा" या "या" से होता है।

रूप विग्रह उदाहरण
इतरेतर (और) दोनों अलग-अलग गिने जाते हैं माता-पिता = माता और पिता; राम-लक्ष्मण = राम और लक्ष्मण
वैकल्पिक (या) एक या दूसरा भला-बुरा = भला या बुरा; थोड़ा-बहुत = थोड़ा या बहुत
समाहार और भी ऐसी चीज़ें, पूरा समूह दाल-रोटी = दाल, रोटी आदि खाना; कपड़े-लत्ते = कपड़े, लत्ते आदि

द्वंद्व में प्रायः दोनों पदों के बीच योजक-चिह्न (-) लगता है; यह भी पहचान में मदद करता है।

भाग 4 — बहुव्रीहि और अव्ययीभाव

बहुव्रीहि में समस्त पद का अर्थ उसके किसी भी खंड का नहीं, बल्कि किसी बाहरी तीसरे का बोध कराता है। विग्रह में "जिसका", "जिसके", "वाला" जैसे शब्द आते हैं, और तीसरे का नाम कोष्ठक में दिया जाता है।

समस्त पद विग्रह किसका बोध
दशानन दस हैं आनन जिसके रावण
लंबोदर लंबा है उदर जिसका गणेश
पीतांबर पीला है अंबर जिसका कृष्ण या विष्णु
नीलकंठ नीला है कंठ जिसका शिव
चक्रपाणि चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके विष्णु
गिरिधर गिरि को धारण करता है जो कृष्ण
त्रिलोचन तीन हैं लोचन जिसके शिव
पंचानन पाँच हैं आनन जिसके शिव या सिंह

अव्ययीभाव में पहला पद अव्यय (जिसका रूप कभी नहीं बदलता) होता है और पूरा समस्त पद भी अव्यय की तरह चलता है: उसमें लिंग, वचन, कारक से रूप नहीं बदलता।

पहला अव्यय अर्थ समस्त पद और विग्रह
यथा के अनुसार, जैसा यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार; यथासंभव = जितना संभव हो
प्रति हर प्रतिदिन = दिन-दिन; प्रतिवर्ष = हर वर्ष
आ से लेकर, तक आजन्म = जन्म से लेकर; आजीवन = जीवन भर
भर पूरा भरपेट = पेट भर; भरसक = शक्ति भर
बे, बा बिना, सहित (फ़ारसी) बेशक = बिना शक के; बाकायदा = कायदे के साथ
दोहराव बार-बार रातोंरात, हाथोंहाथ, पल-पल, घर-घर

ध्यान दें: प्रतिदिन में "प्रति" पूर्व पद है और वही मुख्य है। इसलिए अव्ययीभाव का प्रधान पद पूर्व पद है, जबकि तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु में उत्तर पद।

भाग 5 — भेद पहचानने की विधि: प्रश्नों की सीढ़ी

विग्रह करने के बाद इन प्रश्नों को ऊपर से नीचे पूछिए। जहाँ पहला "हाँ" मिले, वही भेद है।

क्रम प्रश्न हाँ तो भेद
1 क्या पहला पद अव्यय है (यथा, प्रति, आ, भर) और पूरा शब्द क्रियाविशेषण जैसा चलता है? अव्ययीभाव
2 क्या विग्रह में "जिसका/जिसके/वाला" आता है और अर्थ किसी बाहरी तीसरे पर जाता है? बहुव्रीहि
3 क्या दोनों पद बराबर हैं और बीच में "और/या" है? द्वंद्व
4 क्या पहला पद संख्या है और अर्थ समूह का है? द्विगु
5 क्या विग्रह में "है जो" या "के समान/रूपी" लगता है? कर्मधारय
6 क्या विग्रह में कारक-चिह्न (का, को, से, के लिए, में, पर) लगता है? तत्पुरुष (फिर उपभेद देखें)

क्रम इसलिए यही है कि सबसे विशेष लक्षण पहले जाँचे जाएँ। बहुव्रीहि को द्वंद्व और कर्मधारय से पहले जाँचना अनिवार्य है, क्योंकि वह उन्हीं की तरह दिख सकता है। यही कारण है कि "है जो" और "जिसका" के बीच का अंतर परीक्षा में सबसे अधिक काम आता है।

पाठ्यपुस्तक से आगे। परीक्षा के लिए: कर्मधारय और द्विगु को कई पुस्तकें तत्पुरुष का ही उपभेद मानती हैं, पर प्रश्नों में इन्हें प्रायः अलग भेद के रूप में दिया जाता है, इसलिए इन्हें स्वतंत्र छह भेदों में ही गिनिए। वास्तव में: यह वर्गीकरण केवल पढ़ाने की सुविधा के लिए है; दोनों मतों में समस्त पद वही रहता है।

भाग 6 — कर्मधारय और बहुव्रीहि का भेद

परीक्षा में सबसे अधिक उलझन यहीं होती है, क्योंकि दोनों में पहला पद विशेषण होता है। अंतर विग्रह में है।

बिंदु कर्मधारय बहुव्रीहि
विग्रह में शब्द है जो, के समान जिसका, जिसके, वाला
अर्थ कहाँ जाता है समस्त पद के भीतर के उत्तर पद पर समस्त पद के बाहर किसी तीसरे पर
उदाहरण नीलकमल = नीला है जो कमल (कमल ही) नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका (शिव)
उदाहरण महात्मा = महान है जो आत्मा दशानन = दस हैं मुख जिसके (रावण)

एक ही शब्द संदर्भ से दोनों हो सकता है। "नीलकंठ" यदि केवल नीले गले का अर्थ दे, तो कर्मधारय है; यदि शिव का बोध कराए, तो बहुव्रीहि। इसी तरह द्विगु और बहुव्रीहि में भी अंतर देखिए: पंचवटी पाँच वटों का समूह है (द्विगु), जबकि पंचानन पाँच मुखों वाला कोई तीसरा (शिव या सिंह) है (बहुव्रीहि)। संख्या दोनों में है, पर अर्थ का भार अलग जगह है।

रुकिए और सोचिए: "त्रिलोचन" और "त्रिलोक", दोनों में संख्या है। दोनों एक ही समास के हैं या अलग-अलग?

उत्तर जाँचिए: अलग-अलग हैं। त्रिलोक = तीन लोकों का समूह (द्विगु), जबकि त्रिलोचन = तीन हैं लोचन जिसके, यानी शिव (बहुव्रीहि)।

भाग 7 — CUET में पूछे जाने वाले प्रश्न-प्रकार

प्रश्न-प्रकार नमूना कैसे हल करें
समास का नाम बताइए "यथाशक्ति" में कौन-सा समास है भाग 5 की सीढ़ी पर ऊपर से चलें
सही विग्रह चुनिए "चंद्रमुख" का विग्रह विकल्प में "के समान" या "रूपी" खोजें
समस्त पद बनाइए "तीन भुवनों का समूह" का समस्त पद त्रिभुवन; संख्या-समूह देखकर द्विगु
जोड़ी मिलाइए समस्त पद और समास की जोड़ी बहुव्रीहि, अव्ययीभाव पहले मिलाएँ
तत्पुरुष का उपभेद "देशनिकाला" में कौन-सा कारक छिपा है "देश से निकाला", इसलिए अपादान
अलग शब्द चुनिए चार में से अलग समास वाला हर विकल्प का विग्रह करें और तीन समान ढूँढें

भाग 8 — हल सहित उदाहरण

क्र. प्रश्न उत्तर तर्क
1 राजपुत्र राजा का पुत्र; संबंध तत्पुरुष "का" लुप्त, पुत्र प्रधान
2 रसोईघर रसोई के लिए घर; संप्रदान तत्पुरुष "के लिए" लुप्त
3 पथभ्रष्ट पथ से भ्रष्ट; अपादान तत्पुरुष "से" अलगाव के अर्थ में
4 हस्तलिखित हाथ से लिखित; करण तत्पुरुष "से" साधन के अर्थ में
5 आपबीती आप पर बीती; अधिकरण तत्पुरुष "पर" लुप्त
6 अनादि न आदि; नञ् तत्पुरुष विग्रह में "न"
7 महापुरुष महान है जो पुरुष; कर्मधारय पहला पद विशेषण, "है जो"
8 चंद्रमुख चंद्र के समान मुख; कर्मधारय उपमान-उपमेय
9 त्रिलोक तीन लोकों का समूह; द्विगु संख्या और समूह
10 भाई-बहन भाई और बहन; द्वंद्व "और", दोनों प्रधान
11 दशानन दस हैं आनन जिसके (रावण); बहुव्रीहि अर्थ बाहरी तीसरे पर
12 लंबोदर लंबा है उदर जिसका (गणेश); बहुव्रीहि "जिसका"
13 प्रतिदिन दिन-दिन; अव्ययीभाव पहला पद अव्यय "प्रति"
14 आजीवन जीवन भर; अव्ययीभाव "आ" अव्यय, पूर्व पद प्रधान
15 पीतांबर पीला है अंबर जिसका (कृष्ण); बहुव्रीहि कर्मधारय जैसा दिखता है, पर अर्थ तीसरे पर

भाग 9 — सामान्य भूलें (ट्रैप)

ट्रैप यह क्यों लुभाता है सच्चाई
कर्मधारय और बहुव्रीहि को मिला देना दोनों में पहला पद विशेषण होता है विग्रह में "है जो" हो तो कर्मधारय, "जिसका" हो तो बहुव्रीहि
संख्या देखते ही द्विगु लिख देना द्विगु की पहचान संख्या है संख्या के बाद अर्थ समूह का हो तो द्विगु; "वाला" कोई अन्य हो तो बहुव्रीहि (पंचवटी बनाम पंचानन)
द्वंद्व को तत्पुरुष समझना दोनों में दो संज्ञाएँ हैं बीच में "का" लगे तो तत्पुरुष; "और" लगे तो द्वंद्व
अव्ययीभाव में उत्तर पद को प्रधान मानना अन्य भेदों में उत्तर पद प्रधान है अव्ययीभाव में पूर्व पद (अव्यय) प्रधान होता है
करण और अपादान का "से" चिह्न एक ही है साधन हो तो करण (हाथ से लिखा), अलगाव हो तो अपादान (पथ से भ्रष्ट)
कर्म और संप्रदान का अंतर दोनों में "को" की झलक क्रिया का सीधा फल हो तो कर्म, "के लिए" हो तो संप्रदान
नञ् तत्पुरुष को द्वंद्व मान लेना "अ" और शब्द दो खंड लगते हैं विग्रह में "न" आने पर नञ् तत्पुरुष
अर्थ देखे बिना केवल शब्द से भेद तय करना याद किया हुआ भेद लिख देना एक शब्द के दो विग्रह संभव हों तो अर्थ और संदर्भ निर्णायक हैं

भाग 10 — तेज़ अभ्यास (उत्तर सहित)

समस्त पद विग्रह और समास
देशभक्ति देश के लिए भक्ति; संप्रदान तत्पुरुष
धनहीन धन से हीन; अपादान तत्पुरुष
गंगाजल गंगा का जल; संबंध तत्पुरुष
शोकमग्न शोक में मग्न; अधिकरण तत्पुरुष
तुलसीकृत तुलसी द्वारा कृत; करण तत्पुरुष
असंभव न संभव; नञ् तत्पुरुष
परमानंद परम है जो आनंद; कर्मधारय
मुखचंद्र मुख रूपी चंद्र; कर्मधारय
चौराहा चार राहों का समूह; द्विगु
नवरात्र नौ रातों का समूह; द्विगु
दाल-रोटी दाल और रोटी आदि; द्वंद्व (समाहार)
सुख-दुख सुख और दुख; द्वंद्व
चक्रपाणि चक्र है पाणि में जिसके (विष्णु); बहुव्रीहि
गिरिधर गिरि को धारण करता है जो (कृष्ण); बहुव्रीहि
नीलकंठ (शिव अर्थ में) नीला है कंठ जिसका; बहुव्रीहि
यथासमय समय के अनुसार; अव्ययीभाव
आमरण मृत्यु तक; अव्ययीभाव
भरपेट पेट भर; अव्ययीभाव
रातोंरात रात ही रात में; अव्ययीभाव
महात्मा महान है जो आत्मा; कर्मधारय

भाग 11 — अभ्यास-योजना और जुड़े पृष्ठ

दिन समय क्या करें
1 20 मिनट छह भेदों की तालिका (भाग 1) बिना देखे लिखें; हर भेद के तीन उदाहरण
2 20 मिनट तत्पुरुष के छह उपभेद और नञ्; प्रत्येक के दो-दो शब्द
3 20 मिनट भाग 5 की सीढ़ी से 15 नए शब्दों का भेद
4 15 मिनट कर्मधारय-बहुव्रीहि और द्विगु-बहुव्रीहि के जोड़े बनाकर अभ्यास
5 से 6 15 मिनट भाग 10 की तालिका ढककर हल करें, फिर मिलान
हर दिन 5 मिनट 10 शब्दों के विग्रह; प्रति शब्द 15 सेकंड

समय-सीमा में प्रश्न हल करते समय पहले विग्रह लिखकर देखिए, फिर विकल्प मिलाइए। जिस शब्द पर दो भेद संभव लगें, उसे अंत के लिए छोड़ दीजिए, क्योंकि गलत उत्तर पर अंक कटते हैं।

समास और संधि दोनों में शब्द जुड़ते हैं, पर संधि में ध्वनि बदलती है और समास में संबंध-शब्द लुप्त होता है; इस अंतर को संधि के पृष्ठ पर देखिए। कारक-चिह्नों (को, से, के लिए, में) की पक्की समझ वचन, लिंग और कारक से आएगी, जो तत्पुरुष के उपभेदों का आधार है। शब्द की रचना के बड़े वर्गीकरण (यौगिक, योगरूढ़) के लिए शब्द-भेद और उपसर्ग या प्रत्यय वाले शब्दों के लिए उपसर्ग और प्रत्यय देखिए।

एक पंक्ति का सार: पहले विग्रह करो; पहला पद अव्यय हो तो अव्ययीभाव, "जिसका" आए तो बहुव्रीहि, "और/या" आए तो द्वंद्व, संख्या और समूह हो तो द्विगु, "है जो/के समान" आए तो कर्मधारय, और कारक-चिह्न छिपा हो तो तत्पुरुष।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.

Q1. 'हस्तलिखित' शब्द का सही विग्रह क्या है?

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Answer: C

'हस्तलिखित' करण तत्पुरुष है; इसका विग्रह 'हस्त (हाथ) से लिखित' होता है, जिसमें करण कारक ('से') का लोप हुआ है।

Q2. 'यथासंभव' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: C

'यथासंभव' का विग्रह है 'जैसा संभव हो'। पूर्वपद 'यथा' अव्यय है और पूरा पद क्रियाविशेषण की तरह अव्यय रूप में प्रयुक्त होता है, अतः यह अव्ययीभाव समास है।

Q3. 'यथाशक्ति' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: A

'यथाशक्ति' का विग्रह है 'शक्ति के अनुसार'। पूर्वपद 'यथा' अव्यय है और पूरा समस्तपद क्रियाविशेषण की तरह अव्यय का काम करता है, अतः यह अव्ययीभाव समास है।

Q4. 'भाई-बहन' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: A

'भाई-बहन' का विग्रह है 'भाई और बहन'। दोनों पद प्रधान हैं तथा 'और' योजक का लोप है, अतः यह द्वंद्व समास है।

Q5. 'त्रिनेत्र' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: C

'त्रिनेत्र' का विग्रह है 'तीन हैं नेत्र जिसके, अर्थात् शिव'। समस्तपद किसी अन्य (शिव) का बोध कराता है, अतः यह बहुव्रीहि समास है, न कि द्विगु।

Q6. 'घुड़सवार' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: A

'घुड़सवार' का विग्रह है 'घोड़े पर सवार'। यहाँ अधिकरण कारक ('पर') का लोप होता है और उत्तरपद प्रधान है, अतः यह अधिकरण तत्पुरुष समास है।

Q7. 'चंद्रमुख' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: B

'चंद्रमुख' का विग्रह है 'चंद्र के समान मुख'। इसमें उपमान (चंद्र) और उपमेय (मुख) का सादृश्य संबंध है, जो उपमानवाचक कर्मधारय समास है।

Q8. 'दशानन' शब्द में कौन-सा समास है?

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Answer: B

'दशानन' का विग्रह है 'दश हैं आनन (मुख) जिसके, अर्थात् रावण'। समस्तपद अपने पदों से भिन्न किसी अन्य (रावण) का बोध कराता है, अतः यह बहुव्रीहि समास है, न कि द्विगु।

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