संधि
संधि is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- संधि का अर्थ है मेल — दो वर्णों (ध्वनियों) के परस्पर मिलने से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। जैसे विद्या + आलय = विद्यालय।
- संधि-विच्छेद इसका उलटा है — मिले हुए शब्द को पुनः मूल रूप में अलग करना (हिमालय = हिम + आलय)।
- संधि तीन प्रकार की होती है — स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि। CUET में संधि का प्रकार, संधि-विच्छेद या जुड़ा हुआ रूप पूछा जाता है।
- परीक्षा-सत्य: +5 / −1। नियम पहचानो, मेल-बिंदु पर हुए परिवर्तन को समझो — रटने के बजाय नियम लगाओ।
भाग 1 — संधि के तीन प्रकार
| प्रकार | किसका मेल | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वर संधि | स्वर + स्वर | विद्या + आलय = विद्यालय |
| व्यंजन संधि | व्यंजन + व्यंजन/स्वर | सत् + जन = सज्जन |
| विसर्ग संधि | विसर्ग (ः) + वर्ण | निः + आहार = निराहार |
भाग 2 — स्वर संधि के पाँच भेद
| भेद | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| दीर्घ | अ/आ + अ/आ → आ; इ/ई + इ/ई → ई; उ/ऊ + उ/ऊ → ऊ | धर्म + अर्थ = धर्मार्थ; गिरि + ईश = गिरीश; भानु + उदय = भानूदय |
| गुण | अ/आ + इ/ई → ए; अ/आ + उ/ऊ → ओ; अ/आ + ऋ → अर् | नर + इंद्र = नरेंद्र; सूर्य + उदय = सूर्योदय; देव + ऋषि = देवर्षि |
| वृद्धि | अ/आ + ए/ऐ → ऐ; अ/आ + ओ/औ → औ | एक + एक = एकैक; वन + औषधि = वनौषधि; सदा + एव = सदैव |
| यण् | इ/ई + भिन्न स्वर → य्; उ/ऊ → व्; ऋ → र् | अति + अधिक = अत्यधिक; सु + आगत = स्वागत; पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा |
| अयादि | ए → अय्; ऐ → आय्; ओ → अव्; औ → आव् | ने + अन = नयन; नै + अक = नायक; पो + अन = पवन; पौ + अक = पावक |
भाग 3 — व्यंजन संधि के प्रमुख नियम
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| त्/द् + ग/घ/द/ध आदि → सघोष | सत् + जन = सज्जन; उत् + हार = उद्धार |
| त्/द् + च/छ → च्च | उत् + चारण = उच्चारण |
| त् + श → च्छ | उत् + श्वास = उच्छ्वास |
| म् + वर्ग का व्यंजन → अनुस्वार/पंचमाक्षर | सम् + तोष = संतोष; सम् + गठन = संगठन |
| त् + ल → ल्ल | उत् + लास = उल्लास |
| स्/ष् परिवर्तन | निस् + चय = निश्चय |
भाग 4 — विसर्ग संधि के प्रमुख नियम
| नियम | उदाहरण |
|---|---|
| ः + अ/वर्ग 3-5 → ओ | मनः + अनुकूल = मनोनुकूल; मनः + रथ = मनोरथ |
| निः/दुः + र → री/दीर्घ | निः + रोग = नीरोग; निः + रस = नीरस |
| ः + च/छ → श् | निः + छल = निश्छल |
| ः + क/ख/प/फ → ष् | निः + कलंक = निष्कलंक; दुः + कर = दुष्कर |
| ः + त → स् | नमः + ते = नमस्ते |
भाग 5 — विधि (संधि-विच्छेद कैसे करें)
- मेल-बिंदु खोजो — शब्द के बीच वह स्थान जहाँ दो ध्वनियाँ मिली हैं।
- परिवर्तन पहचानो — वहाँ कौन-सा वर्ण बना (ए, ओ, ऐ, औ, य्, व् आदि)?
- नियम उलटो — "सूर्योदय" में बीच का "ओ" = अ + उ (गुण संधि) → सूर्य + उदय।
- प्रकार बताओ — स्वर/व्यंजन/विसर्ग और उपभेद।
भाग 6 — हल किए हुए उदाहरण
- हिमालय = हिम + आलय (दीर्घ स्वर संधि)।
- महेश = महा + ईश (दीर्घ)।
- नरेंद्र = नर + इंद्र (गुण)।
- सूर्योदय = सूर्य + उदय (गुण)।
- सदैव = सदा + एव (वृद्धि)।
- अत्यंत = अति + अंत (यण्)।
- नयन = ने + अन (अयादि)।
- सज्जन = सत् + जन (व्यंजन)।
- संतोष = सम् + तोष (व्यंजन)।
- मनोरथ = मनः + रथ (विसर्ग)।
भाग 7 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)
- गुण बनाम वृद्धि — अ + इ → ए (गुण), पर अ + ए → ऐ (वृद्धि); बीच का वर्ण देखकर तय करें।
- यण् बनाम अयादि — इ/उ/ऋ का परिवर्तन यण् (य्/व्/र्), जबकि ए/ऐ/ओ/औ का परिवर्तन अयादि।
- विसर्ग का "ओ" — मनः + रथ = मनोरथ; इसे स्वर संधि मत समझो।
- पंचमाक्षर/अनुस्वार — सम् + गति = संगति; "म्" का अनुस्वार बनना व्यंजन संधि है।
भाग 8 — संधि नियम-आधारित विषय क्यों है
संधि उन थोड़े-से हिंदी व्याकरण-विषयों में है जहाँ रटने की लगभग आवश्यकता नहीं — यह पूरी तरह नियमों पर चलता है, और एक बार नियम समझ लेने पर आप किसी भी शब्द की संधि या संधि-विच्छेद कर सकते हैं, चाहे वह शब्द पहले कभी देखा हो या नहीं। इसका कारण यह है कि संधि वस्तुतः उच्चारण की सुविधा से उपजी है — जब दो ध्वनियाँ पास आती हैं, तो जीभ उन्हें सरलता से बोलने योग्य बना देती है; "विद्या" और "आलय" को मिलाकर बोलने पर "आ + आ" स्वाभाविक रूप से एक दीर्घ "आ" बन जाता है, और "विद्यालय" बनता है। इसलिए संधि सीखने की कुंजी है — पाँच स्वर-संधि भेदों के परिवर्तन-नियमों को भली-भाँति समझना, और फिर खूब अभ्यास करना। संधि-विच्छेद करते समय सबसे महत्वपूर्ण कदम है मेल-बिंदु पर बने वर्ण को पहचानना — यदि वहाँ "ए" है तो वह प्रायः "अ + इ" (गुण) है, "ओ" है तो "अ + उ" (गुण) या विसर्ग का परिवर्तन, "ऐ/औ" है तो वृद्धि, और "य्/व्/र्" है तो यण्। यह उलटी-गणना की आदत डाल लेने पर संधि-विच्छेद यंत्रवत हो जाता है। यही कारण है कि परिश्रमी विद्यार्थी के लिए संधि परीक्षा का सबसे निश्चित अंक-स्रोत है — क्योंकि यहाँ स्मृति नहीं, समझ काम आती है।
भाग 9 — विस्तृत अभ्यास (संधि-विच्छेद कीजिए)
- परमेश्वर = परम + ईश्वर (दीर्घ)।
- महोत्सव = महा + उत्सव (गुण)।
- राजर्षि = राज + ऋषि (गुण — अ + ऋ → अर्)।
- गणेश = गण + ईश (दीर्घ)।
- एकैक = एक + एक (वृद्धि)।
- भावुक = भौ + उक? नहीं — भाव + उक; ध्यान दें मूल "भाव"।
- इत्यादि = इति + आदि (यण्)।
- अन्वय = अनु + अय (यण् — उ → व्)।
- गायक = गै + अक (अयादि)।
- दिग्गज = दिक् + गज (व्यंजन संधि)।
- जगन्नाथ = जगत् + नाथ (व्यंजन)।
- दुरुपयोग = दुः + उपयोग (विसर्ग)।
भाग 10 — संधि और संधि-विच्छेद में अंतर तथा परीक्षा-रूप
विद्यार्थियों को सबसे पहले यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि परीक्षा संधि के प्रश्न तीन रूपों में पूछती है, और तीनों के लिए तैयारी का ढंग थोड़ा भिन्न है। पहला रूप — संधि कीजिए, जहाँ दो अलग शब्द देकर उन्हें जोड़ना होता है (विद्या + आलय = विद्यालय); इसके लिए आपको परिवर्तन-नियम आगे की दिशा में लगाने आने चाहिए। दूसरा रूप — संधि-विच्छेद कीजिए, जहाँ जुड़ा शब्द देकर उसे तोड़ना होता है (हिमालय = हिम + आलय); इसके लिए आपको मेल-बिंदु पहचानकर नियम उलटी दिशा में लगाना आना चाहिए, जो थोड़ा कठिन है और अधिक अभ्यास माँगता है। तीसरा रूप — संधि का प्रकार बताइए, जहाँ केवल भेद (दीर्घ/गुण/वृद्धि/यण्/अयादि या व्यंजन/विसर्ग) पहचानना होता है। तीनों रूपों के लिए मूल कौशल एक ही है — मेल-बिंदु पर हुए परिवर्तन को पहचानना। एक उपयोगी सुझाव यह है कि अभ्यास करते समय हर शब्द के लिए तीनों काम कीजिए — जोड़िए, तोड़िए, और भेद बताइए — जिससे एक ही उदाहरण से तीनों प्रश्न-रूपों की तैयारी हो जाए। साथ ही, संधि-विच्छेद में सबसे अधिक भूल "गुण" और "वृद्धि" के बीच होती है; इसलिए यह सूत्र पक्का कर लें — यदि मेल-बिंदु पर "ए/ओ" बना है तो गुण, और यदि "ऐ/औ" बना है तो वृद्धि। यह छोटा-सा सूत्र अनेक प्रश्नों में सीधे सही उत्तर तक पहुँचा देता है।
भाग 11 — इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें
तीनों प्रकार (भाग 1) और स्वर-संधि के पाँच भेद (भाग 2) के नियम कंठस्थ करें, फिर संधि-विच्छेद विधि (भाग 5) से अभ्यास करें — मेल-बिंदु का वर्ण देखकर नियम उलटें। भाग 9 के विस्तृत अभ्यास को हल करें, परीक्षा के तीनों प्रश्न-रूप (भाग 10) समझें, और भाग 7 के भ्रमों, विशेषकर गुण-वृद्धि तथा यण्-अयादि के अंतर को परीक्षा से पहले दोहराएँ।
एक पंक्ति का सार: संधि वर्णों के मेल से बना विकार है; पाँच स्वर-संधि नियम (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण्, अयादि) समझो, मेल-बिंदु का वर्ण देखकर नियम उलटो, और गुण-वृद्धि व यण्-अयादि के भ्रम से बचो।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.
Q1. 'अन्तःकरण' शब्द में कौन-सी संधि है?
▸ Show answer & explanation
Answer: C
अन्तः + करण में विसर्ग के बाद 'क' (कठोर वर्ण) आता है और यहाँ विसर्ग यथावत बना रहता है। विसर्ग से सम्बन्धित होने के कारण यह विसर्ग संधि है। अतः अन्तः + करण = अन्तःकरण।
Q2. 'पवित्र' शब्द में निहित संधि का सही विच्छेद एवं नाम है—
▸ Show answer & explanation
Answer: A
पो + इत्र में 'ओ' के बाद असमान स्वर 'इ' आने पर 'ओ' का 'अव्' हो जाता है (ओ + इ = अवि), यह अयादि स्वर संधि है। अतः पो + इत्र = पवित्र।
Q3. 'भानूदय' शब्द का सही संधि-विच्छेद एवं प्रकार चुनिए।
▸ Show answer & explanation
Answer: A
भानु + उदय में 'उ' और 'उ' मिलकर दीर्घ 'ऊ' बनते हैं (उ + उ = ऊ), यह दीर्घ स्वर संधि है। अतः भानु + उदय = भानूदय।
Q4. 'एकैक' शब्द में प्रयुक्त संधि का सही विच्छेद एवं प्रकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: B
एक + एक में 'अ' और 'ए' मिलकर 'ऐ' बनते हैं (अ + ए = ऐ), यह वृद्धि स्वर संधि है। अतः एक + एक = एकैक।
Q5. 'सज्जन' शब्द में प्रयुक्त संधि का सही विच्छेद एवं प्रकार है—
▸ Show answer & explanation
Answer: B
सत् + जन में 'त्' के बाद 'ज' (वर्ग का तीसरा अक्षर/घोष) आने पर 'त्' का 'ज्' हो जाता है। अतः सत् + जन = सज्जन, यह व्यंजन संधि है।
Q6. 'विद्यालय' शब्द का सही संधि-विच्छेद कौन-सा है?
▸ Show answer & explanation
Answer: B
'विद्या' का अंतिम 'आ' और 'आलय' का प्रारम्भिक 'आ' मिलकर दीर्घ 'आ' बनाते हैं (आ + आ = आ)। अतः विद्या + आलय = विद्यालय, यह दीर्घ स्वर संधि है।
Q7. 'उच्चारण' शब्द का सही संधि-विच्छेद कौन-सा है?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
उत् + चारण में 'त्' के बाद 'च' (तालव्य) आने पर 'त्' का 'च्' हो जाता है। अतः उत् + चारण = उच्चारण, यह व्यंजन संधि है।
Q8. 'निःचल' से बना सही संधि-शब्द कौन-सा है?
▸ Show answer & explanation
Answer: A
निः + चल में विसर्ग के बाद 'च' (तालव्य) आने पर विसर्ग 'श्' में बदल जाता है। अतः निः + चल = निश्चल, यह विसर्ग संधि है।
🔒 32 more questions
Attempt all 40 संधि questions in real NTA exam format with timer and instant scoring.
Start practice test →