उपसर्ग और प्रत्यय
उपसर्ग और प्रत्यय is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.
एक नज़र में
- उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसका अर्थ बदल देते हैं — प्र + हार = प्रहार, अ + सत्य = असत्य।
- प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं — पढ़ + आई = पढ़ाई, सुंदर + ता = सुंदरता।
- दोनों शब्द-रचना के साधन हैं; इन्हें जानने से आप अनेक नए शब्दों का अर्थ स्वयं समझ सकते हैं। CUET में उपसर्ग/प्रत्यय पहचानना या अलग करना पूछा जाता है।
- परीक्षा-सत्य: +5 / −1। मूल शब्द से जुड़े आरंभिक अंश को उपसर्ग और अंतिम अंश को प्रत्यय पहचानो।
भाग 1 — प्रमुख संस्कृत उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्र | आगे/अधिक | प्रगति, प्रबल, प्रहार |
| परा | उल्टा/पीछे | पराजय, पराक्रम |
| अप | बुरा/दूर | अपयश, अपमान |
| सम् | अच्छी तरह | संस्कार, संगठन |
| अनु | पीछे/समान | अनुसरण, अनुकरण |
| अव | नीचे/हीन | अवनति, अवगुण |
| उत् | ऊपर | उन्नति, उत्थान |
| दुर्/दुस् | बुरा/कठिन | दुर्गम, दुष्कर |
| नि | नीचे/अभाव | निवास, निडर |
| वि | विशेष/भिन्न | विज्ञान, विदेश |
| आ | तक/से | आजीवन, आगमन |
| अधि | ऊपर/मुख्य | अधिकार, अध्यक्ष |
| अति | अधिक | अत्यधिक, अतिक्रमण |
| उप | निकट/गौण | उपहार, उपमंत्री |
| परि | चारों ओर | परिक्रमा, परिवार |
| प्रति | विरुद्ध/हर | प्रतिदिन, प्रतिकार |
भाग 2 — हिंदी एवं उर्दू/फ़ारसी उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| अ/अन | नहीं | अछूता, अनजान |
| भर | पूरा | भरपेट, भरपूर |
| कु | बुरा | कुपुत्र, कुरूप |
| बे | बिना | बेकार, बेरहम |
| ला | बिना | लापता, लाचार |
| बद | बुरा | बदनाम, बदसूरत |
| खुश | अच्छा | खुशबू, खुशहाल |
| गैर | बिना/अन्य | गैरहाजिर, गैरकानूनी |
| हम | साथ | हमदर्द, हमराह |
| सर | मुख्य | सरताज, सरकार |
भाग 3 — प्रत्यय के दो प्रकार
(क) कृत् प्रत्यय — क्रिया (धातु) के अंत में जुड़कर संज्ञा/विशेषण बनाते हैं।
| प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|
| -आई | पढ़ाई, लिखाई, चढ़ाई |
| -आवट | सजावट, बनावट, थकावट |
| -अक | लेखक, पाठक, गायक |
| -आ | झूला, घेरा |
| -ता/-ते/-ती | जाता, चलते, हँसती |
| -वाला | पढ़नेवाला, रखवाला |
| -नी | धौंकनी, ओढ़नी |
(ख) तद्धित प्रत्यय — संज्ञा/विशेषण/सर्वनाम के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
| प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|
| -ता | मनुष्यता, सुंदरता, मित्रता |
| -त्व | गुरुत्व, महत्त्व, पुरुषत्व |
| -पन | बचपन, लड़कपन, अपनापन |
| -ई | खटाई, गरमी, चतुराई |
| -इक | सामाजिक, धार्मिक, वार्षिक |
| -वान/-मान | धनवान, बुद्धिमान, गुणवान |
| -हट | घबराहट, चिकनाहट |
| -इया | डिबिया, खटिया, बुढ़िया |
भाग 4 — विधि (उपसर्ग/प्रत्यय कैसे पहचानें)
- मूल शब्द खोजो — शब्द का वह केंद्रीय अंश जो स्वतंत्र अर्थ रखता है।
- आरंभिक अंश = उपसर्ग — "प्रबल" में मूल "बल", आरंभ में "प्र" = उपसर्ग।
- अंतिम अंश = प्रत्यय — "सुंदरता" में मूल "सुंदर", अंत में "ता" = प्रत्यय।
- दोनों भी संभव — "अपमानित" = अप (उपसर्ग) + मान + इत (प्रत्यय)।
भाग 5 — हल किए हुए उदाहरण
- "प्रहार" में उपसर्ग → प्र (मूल: हार)।
- "अपयश" में उपसर्ग → अप।
- "बेकार" में उपसर्ग → बे।
- "पढ़ाई" में प्रत्यय → आई।
- "सुंदरता" में प्रत्यय → ता।
- "बचपन" में प्रत्यय → पन।
- "धनवान" में प्रत्यय → वान।
- "सामाजिक" में प्रत्यय → इक (मूल: समाज)।
- "अनुशासन" में उपसर्ग → अनु।
- "अपमानित" → उपसर्ग अप + प्रत्यय इत।
भाग 6 — सामान्य भ्रम (ट्रैप)
- उपसर्ग बनाम मूल शब्द — "विद्या" में "वि" उपसर्ग नहीं, यह मूल शब्द का अंश है; सावधानी से तोड़ें।
- कृत् बनाम तद्धित — क्रिया से बने तो कृत् (पढ़ाई), संज्ञा/विशेषण से बने तो तद्धित (सुंदरता)।
- समान दिखने वाले प्रत्यय — "-ई" कहीं भाववाचक (गरमी) तो कहीं संबंध (दिल्ली का = दिल्लीवाला)।
- दो उपसर्ग — कुछ शब्दों में दो उपसर्ग होते हैं — "सम् + आ + गम = समागम"।
भाग 7 — उपसर्ग-प्रत्यय शब्द-रचना की कुंजी क्यों हैं
उपसर्ग और प्रत्यय हिंदी की शब्द-निर्माण-शक्ति के दो स्तंभ हैं, और इन्हें समझ लेना केवल एक प्रश्न-प्रकार हल करने तक सीमित नहीं — यह आपकी समूची शब्द-समझ को कई गुना बढ़ा देता है। एक ही मूल शब्द "हार" (हरण/ले जाना) से उपसर्ग बदल-बदलकर देखिए — प्रहार (आगे की ओर चोट), आहार (भीतर लेना/भोजन), विहार (घूमना), संहार (पूर्ण नाश), उपहार (पास लाई वस्तु/भेंट) — एक मूल, अनेक अर्थ, और हर अंतर उपसर्ग से आया। इसी प्रकार प्रत्यय बदलकर "सुंदर" से सुंदरता (भाव), और "धन" से धनवान (युक्त), और "समाज" से सामाजिक (संबंधी) बनते हैं। इसका सीधा लाभ यह है कि जब परीक्षा में कोई अपरिचित शब्द आए, तो आप उसके उपसर्ग और प्रत्यय को पहचानकर अर्थ का अनुमान लगा सकते हैं — "अति + क्रमण" से "अतिक्रमण" का अर्थ "सीमा से आगे बढ़ना" स्वतः स्पष्ट हो जाता है। इसलिए केवल सूची रटने के बजाय हर उपसर्ग और प्रत्यय का अर्थ समझिए, और एक मूल शब्द पर विभिन्न उपसर्ग/प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाने का अभ्यास कीजिए। यह सक्रिय अभ्यास आपको शब्द-तोड़ने के प्रश्नों में तो अंक दिलाएगा ही, साथ ही पर्यायवाची, अनेकार्थी और गद्यांश जैसे अन्य भागों में भी शब्द-अर्थ पकड़ने में सहायता करेगा।
भाग 8 — विस्तृत अभ्यास (उपसर्ग/प्रत्यय पहचानिए)
- "परिक्रमा" में उपसर्ग → परि।
- "अध्यक्ष" में उपसर्ग → अधि (अधि + अक्ष)।
- "बदनाम" में उपसर्ग → बद।
- "लाचार" में उपसर्ग → ला।
- "थकावट" में प्रत्यय → आवट।
- "गुरुत्व" में प्रत्यय → त्व।
- "घबराहट" में प्रत्यय → हट।
- "बुढ़िया" में प्रत्यय → इया।
- "वार्षिक" में प्रत्यय → इक (मूल: वर्ष)।
- "रखवाला" में प्रत्यय → वाला।
- "प्रत्युपकार" में उपसर्ग → प्रति + उप (दो उपसर्ग)।
- "बुद्धिमान" में प्रत्यय → मान।
भाग 9 — एक मूल शब्द, अनेक रूप (शब्द-परिवार बनाना)
उपसर्ग और प्रत्यय की असली शक्ति तब समझ आती है जब आप एक मूल शब्द से पूरा शब्द-परिवार बनाकर देखें; यह अभ्यास न केवल परीक्षा के लिए, बल्कि शब्द-भंडार बढ़ाने के लिए भी अत्यंत प्रभावी है। मूल शब्द "ज्ञान" लीजिए — उपसर्ग जोड़कर बनते हैं विज्ञान (वि + ज्ञान), अज्ञान (अ + ज्ञान), सुज्ञान, प्रज्ञा; और प्रत्यय जोड़कर बनते हैं ज्ञानी (ज्ञान + ई), ज्ञानवान, ज्ञानता। इसी प्रकार मूल "कर्म" से सुकर्म, कुकर्म, दुष्कर्म, अकर्मण्य (उपसर्ग से) और कर्मठ, कर्मी, कर्मण्यता (प्रत्यय से) बनते हैं। ध्यान दीजिए कि एक ही मूल से दर्जनों शब्द बन जाते हैं, और हर नए शब्द का अर्थ आप उपसर्ग/प्रत्यय के अर्थ से स्वयं समझ सकते हैं। परीक्षा की दृष्टि से यह अभ्यास तीन लाभ देता है — पहला, उपसर्ग/प्रत्यय पहचानने के सीधे प्रश्न सरल हो जाते हैं; दूसरा, अपरिचित शब्द का अर्थ अनुमान से निकालना आ जाता है; तीसरा, पर्यायवाची और विलोम बनाने में भी सहायता मिलती है (जैसे "सुकर्म × कुकर्म")। इसलिए प्रतिदिन एक मूल शब्द लेकर उससे जितने शब्द बन सकें, बनाने का अभ्यास कीजिए; कुछ ही सप्ताहों में आपका शब्द-भंडार और व्याकरण-समझ दोनों कई गुना बढ़ जाएँगे। यही सक्रिय विधि निष्क्रिय रटाई से कहीं अधिक स्थायी और उपयोगी सिद्ध होती है।
भाग 10 — इस पृष्ठ का उपयोग कैसे करें
संस्कृत (भाग 1) और हिंदी/फ़ारसी (भाग 2) उपसर्गों के अर्थ समझें, कृत् और तद्धित प्रत्ययों (भाग 3) में भेद करें, हर शब्द में मूल खोजकर आरंभिक/अंतिम अंश अलग करने का अभ्यास करें (भाग 4), और भाग 9 की शब्द-परिवार विधि से एक मूल शब्द पर अनेक उपसर्ग/प्रत्यय लगाकर शब्द बनाएँ — यही सबसे अच्छा अभ्यास है।
एक पंक्ति का सार: उपसर्ग शब्द के आगे और प्रत्यय अंत में जुड़कर अर्थ बदलते हैं; मूल शब्द खोजो, आरंभिक अंश उपसर्ग व अंतिम अंश प्रत्यय पहचानो, और कृत् (क्रिया से) तथा तद्धित (संज्ञा से) में भेद करो।
Practice questions
Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.
Q1. 'विश्वासी' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है—
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Answer: A
'विश्वासी' = विश्वास + ई। मूल शब्द 'विश्वास' में 'ई' प्रत्यय (गुणवाचक/कर्तृवाचक) लगने से 'विश्वास करने वाला' अर्थ में 'विश्वासी' बना।
Q2. 'चालाक' से 'चालाकी' बनाने में कौन-सा प्रत्यय लगा है?
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Answer: A
'चालाकी' = चालाक + ई। मूल शब्द 'चालाक' में भाववाचक प्रत्यय 'ई' लगने से 'चालाकी' बना।
Q3. 'अधोगति' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है—
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Answer: B
'अधोगति' = अधः + गति। 'अधः' उपसर्ग का अर्थ 'नीचे' है; संधि के कारण 'अधः' का 'अधो' रूप हो जाता है। मूल उपसर्ग 'अधः' है।
Q4. निम्नलिखित में से किस शब्द में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग 'अभाव' के अर्थ में हुआ है?
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Answer: A
'अमर' = अ + मर, जहाँ 'अ' उपसर्ग नकार/अभाव दर्शाता है अर्थात 'न मरने वाला'। 'अनुज' में 'अनु', 'अपयश' में 'अप' तथा 'अधिकार' में 'अधि' उपसर्ग है।
Q5. 'समालोचना' शब्द में कौन-से उपसर्ग प्रयुक्त हुए हैं?
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Answer: B
'समालोचना' = सम् + आ + लोचना। इसमें दो उपसर्ग 'सम्' और 'आ' मूल शब्द 'लोचना' से जुड़े हैं।
Q6. 'गवैया' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है—
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Answer: A
'गवैया' = गा (गाना धातु) + ऐया। कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय 'ऐया' लगने से 'गाने वाला' अर्थ में 'गवैया' बना।
Q7. 'घबराहट' शब्द में कौन-सा प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?
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Answer: A
'घबराहट' = घबरा (क्रिया) + आहट। भाववाचक कृत् प्रत्यय 'आहट' लगने से 'घबराहट' बना, जैसे चिल्लाहट, मुस्कराहट।
Q8. 'अत्यधिक' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है—
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Answer: A
'अत्यधिक' = अति + अधिक। संधि से 'अति + अ' मिलकर 'अत्य' बना। मूल उपसर्ग 'अति' है जिसका अर्थ 'बहुत/अधिक' है।
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