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Exam Topic CUET Hindi · 102 40 practice MCQs

उपसर्ग और प्रत्यय

उपसर्ग और प्रत्यय is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.

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एक नज़र में

भाग 1 — उपसर्ग और प्रत्यय: क्या, कहाँ और क्यों

Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.

हिंदी में नए शब्द बनाने का सबसे आसान तरीका है किसी मूल शब्द में कुछ जोड़ देना। आगे जोड़ा गया अंश उपसर्ग है और पीछे जोड़ा गया अंश प्रत्यय। दोनों अपने आप में स्वतंत्र शब्द नहीं होते, केवल जुड़कर काम करते हैं। इसी कारण एक मूल शब्द से दर्जनों शब्द बन जाते हैं और नए शब्द का अर्थ पहचानना आसान हो जाता है।

बिंदु उपसर्ग प्रत्यय
स्थान शब्द के आरंभ में शब्द के अंत में
काम अर्थ बदलता या पलट देता है नया शब्द और प्रायः नया शब्द-वर्ग बनाता है
शब्द-वर्ग प्रायः वही रहता है (मान → अपमान, दोनों संज्ञा) बदल सकता है (सुंदर विशेषण → सुंदरता संज्ञा)
उदाहरण प्र + हार = प्रहार पढ़ + आई = पढ़ाई

एक ही मूल "हार" पर उपसर्ग बदलते ही अर्थ बदल जाता है।

शब्द उपसर्ग अर्थ
प्रहार प्र (आगे) चोट करना
आहार आ (समीप, भीतर) भोजन
संहार सम् (पूरी तरह) विनाश
विहार वि (विशेष, इधर-उधर) घूमना, भ्रमण
उपहार उप (पास) भेंट
परिहार परि (चारों ओर से) त्याग, निवारण

रुकिए और सोचिए: "अपमान" और "सम्मान" में मूल शब्द कौन-सा है और कौन-से उपसर्ग लगे हैं?

उत्तर जाँचिए: मूल शब्द मान है। अपमान में अप (बुरा, दूर) लगा है और सम्मान में सम् (अच्छी तरह) लगा है। उपसर्ग बदलने से अर्थ उलट गया।

भाग 2 — संस्कृत के उपसर्ग

परंपरा में संस्कृत के 22 उपसर्ग गिने जाते हैं (निर्/निस् और दुर्/दुस् को उनके रूपों सहित)। ये हिंदी के तत्सम शब्दों में सबसे अधिक आते हैं।

उपसर्ग अर्थ उदाहरण
प्र आगे, अधिक प्रबल, प्रसिद्ध, प्रकाश, प्रयोग
परा उलटा, पीछे पराजय, पराभव, पराक्रम
अप बुरा, दूर, उलटा अपमान, अपयश, अपव्यय, अपकार
सम् अच्छी तरह, साथ संगम, संयोग, संतोष, संग्रह
अनु पीछे, समान अनुकरण, अनुशासन, अनुज, अनुरूप
अव बुरा, नीचे अवगुण, अवनति, अवतार, अवसान
निस्, निर् बिना, बाहर निर्मल, निर्भय, निष्फल, निराश
दुस्, दुर् बुरा, कठिन दुर्जन, दुर्गम, दुष्कर, दुश्चरित्र
वि भिन्न, विशेष, बिना विदेश, विज्ञान, वियोग, विनाश
आ तक, समेत, उलटा आजीवन, आगमन, आदान, आरोहण
नि नीचे, निश्चित, अभाव निवास, निबंध, निषेध, निडर
अधि ऊपर, श्रेष्ठ अधिकार, अध्यक्ष, अधिपति, अधिनायक
अपि भी, निकट अपिधान (ढक्कन)
अति बहुत अधिक, पार अत्यंत, अतिक्रमण, अत्याचार, अतिशय
सु अच्छा, सरल सुगम, सुयोग, सुपुत्र, स्वागत
उत् ऊपर, श्रेष्ठ उन्नति, उत्कर्ष, उत्थान, उद्घाटन
अभि सामने, चारों ओर अभिनव, अभिमान, अभिनंदन, अभियोग
प्रति हर, उलटा, सामने प्रतिदिन, प्रतिकूल, प्रतिक्रिया, प्रत्येक
परि चारों ओर परिक्रमा, परिवार, परिणाम, परिवर्तन
उप निकट, गौण उपकार, उपवन, उपनाम, उपमंत्री

उपसर्ग लगने पर कई बार संधि भी होती है: निः + फल = निष्फल, अति + अधिक = अत्यधिक, सम् + योग = संयोग। इसलिए उपसर्ग पहचानते समय संधि से हुए बदलाव को उलटकर देखिए: निष्फल में निष् दरअसल निः है।

उपसर्ग बदलने पर पूरा अर्थ उलटा हो जाता है, इसलिए CUET में विलोम बनाने के प्रश्नों में भी उपसर्ग काम आते हैं।

शब्द विलोम उपसर्ग का बदलाव
उपकार अपकार उप → अप
सम्मान अपमान सम् → अप
उन्नति अवनति उत् → अव
विजय पराजय वि → परा
अनुकूल प्रतिकूल अनु → प्रति
आदान प्रदान आ → प्र
संयोग वियोग सम् → वि
सफल निष्फल स → निस्

भाग 3 — हिंदी और उर्दू-फ़ारसी के उपसर्ग

हिंदी की अपनी बोलियों से आए कुछ उपसर्ग हैं, और अरबी-फ़ारसी से आए उपसर्ग भी हिंदी में बराबर चलते हैं। इन्हें अलग से पहचानना ज़रूरी है, क्योंकि इनके साथ जुड़ने वाले शब्द अक्सर हिंदी या फ़ारसी के होते हैं।

उपसर्ग अर्थ उदाहरण मूल
अ, अन नहीं, अभाव अछूता, अनपढ़, अनजान, अनबन हिंदी
कु बुरा कुपुत्र, कुकर्म, कुरूप हिंदी
भर पूरा भरपेट, भरपूर, भरसक हिंदी
अध आधा अधपका, अधमरा हिंदी
उन एक कम उनतीस, उनचास हिंदी
बे बिना बेकार, बेरहम, बेईमान, बेशक फ़ारसी
बा साथ, सहित बाकायदा, बाइज़्ज़त फ़ारसी
ना नहीं नादान, नापसंद, नाराज़, नामुमकिन फ़ारसी
ला बिना लाचार, लापरवाह, लावारिस, लाजवाब अरबी-फ़ारसी
बद बुरा बदनाम, बदचलन, बदसूरत, बदकिस्मत फ़ारसी
खुश अच्छा खुशबू, खुशहाल, खुशनसीब फ़ारसी
ग़ैर बिना, दूसरा ग़ैरहाज़िर, ग़ैरकानूनी अरबी-फ़ारसी
हम साथ, समान हमदर्द, हमराज़, हमसफ़र, हमउम्र फ़ारसी
कम थोड़ा, कमी कमज़ोर, कमअक्ल, कमबख़्त फ़ारसी
सर मुख्य सरताज, सरदार, सरकार फ़ारसी
हर प्रत्येक हररोज़, हरदम, हरसाल फ़ारसी

पाठ्यपुस्तक से आगे। परीक्षा के लिए: "बे", "ना" और "ला" तीनों का अर्थ लगभग "बिना" या "नहीं" है, इसलिए विकल्प में तीनों में से एक दिया हो तो शब्द का स्रोत-रूप देखकर तय कीजिए: बेकार, नादान, लाचार। वास्तव में: ये तीनों अलग-अलग शब्दों के साथ बँधे हैं और आपस में बदले नहीं जा सकते, इसलिए "बेदान" या "नाकार" जैसे रूप नहीं बनते। हर शब्द का अपना प्रचलित रूप याद रखना पड़ता है।

भाग 4 — कृत् प्रत्यय: क्रिया-धातु से बने शब्द

प्रत्यय दो वर्गों में बाँटे जाते हैं, और इस बाँट का आधार एक ही प्रश्न है: जिस शब्द में प्रत्यय लगा है, उसका मूल क्या है? यदि मूल क्रिया-धातु (पढ़, लिख, कर, गा) है, तो प्रत्यय कृत् है और बना शब्द कृदंत। यदि मूल संज्ञा, विशेषण या सर्वनाम है, तो प्रत्यय तद्धित है।

प्रत्यय जोड़ने पर बना उदाहरण (धातु + प्रत्यय)
आई भाववाचक संज्ञा पढ़ाई (पढ़), लड़ाई (लड़), सिलाई (सी), कमाई (कमा)
आवट भाववाचक संज्ञा बनावट (बन), सजावट (सज), लिखावट (लिख), रुकावट (रुक)
आव भाववाचक संज्ञा बहाव (बह), खिंचाव (खिंच), घुमाव (घुम)
आवा भाववाचक संज्ञा बुलावा (बुला), चढ़ावा (चढ़), पहनावा (पहन)
आन भाववाचक संज्ञा उड़ान (उड़), मिलान (मिल), थकान (थक)
औती भाववाचक संज्ञा कटौती (कट), चुनौती (चुन), मनौती (मन)
त भाववाचक संज्ञा बचत (बच), खपत (खप), लागत (लग)
नी साधनवाचक संज्ञा करनी (कर), ओढ़नी (ओढ़), कतरनी (कतर)
औना साधन या वस्तु खिलौना (खेल), बिछौना (बिछ)
ऊ कर्ता या विशेषण चालू (चल), टिकाऊ (टिक), बिकाऊ (बिक)
एरा, ऐया करने वाला लुटेरा (लूट), बसेरा (बस), गवैया (गा)
अक (संस्कृत) करने वाला लेखक (लिख), पाठक (पठ्), गायक (गै)
तृ या ता (संस्कृत) करने वाला कर्ता (कृ), दाता (दा), वक्ता (वच्), नेता (नी)
अन (संस्कृत) क्रिया का भाव गमन (गम्), पठन (पठ्), भोजन (भुज्)
अनीय (संस्कृत) योग्य पठनीय, दर्शनीय, माननीय, स्मरणीय
तव्य (संस्कृत) चाहिए कर्तव्य, गंतव्य, वक्तव्य, श्रोतव्य
ति (संस्कृत) भाववाचक संज्ञा गति, मति, शक्ति, भक्ति

ध्यान दीजिए कि कृत् प्रत्यय लगते ही शब्द क्रिया से संज्ञा या विशेषण बन जाता है। इसी बदलाव को परीक्षा में "शब्द-वर्ग बदलना" कहा जाता है।

भाग 5 — तद्धित प्रत्यय: संज्ञा, विशेषण, सर्वनाम से बने शब्द

तद्धित प्रत्यय मूल संज्ञा, विशेषण या सर्वनाम के अंत में लगते हैं। इनसे भाव, गुण, संबंध, स्वामित्व और छोटापन जैसे अर्थ जुड़ते हैं।

प्रत्यय अर्थ उदाहरण (मूल शब्द + प्रत्यय)
ता भाव, गुण सुंदरता (सुंदर), मनुष्यता (मनुष्य), मित्रता (मित्र)
त्व भाव, गुण महत्त्व (महत्), गुरुत्व (गुरु), पुरुषत्व (पुरुष)
पन भाव, अवस्था बचपन, लड़कपन, अपनापन, पागलपन
पा भाव, अवस्था बुढ़ापा (बूढ़ा), मोटापा (मोटा)
आई गुण का भाव भलाई (भला), बुराई (बुरा), ऊँचाई (ऊँचा), चौड़ाई (चौड़ा)
आहट गुण का भाव कड़वाहट (कड़वा), चिकनाहट (चिकना), गरमाहट (गरम)
ई भाव, संबंध गरीबी (गरीब), दोस्ती (दोस्त), खेती (खेत), सर्दी (सर्द)
इया छोटा, संबंधी डिबिया (डिब्बा), खटिया (खाट), बुढ़िया (बूढ़ा)
ईला, ऐला युक्त, वाला रंगीला (रंग), रसीला (रस), चमकीला (चमक), विषैला (विष)
वाला संबंध, पेशा दूधवाला, घरवाला, सब्ज़ीवाला
इक संबंधी सामाजिक (समाज), धार्मिक (धर्म), वार्षिक (वर्ष), ऐतिहासिक (इतिहास)
ईय संबंधी भारतीय (भारत), राष्ट्रीय (राष्ट्र), स्वर्गीय (स्वर्ग), मानवीय (मानव)
वान, मान वाला धनवान (धन), गुणवान (गुण), बुद्धिमान (बुद्धि), श्रीमान (श्री)
आलु स्वभाव वाला दयालु (दया), कृपालु (कृपा)
मय भरा हुआ जलमय, आनंदमय, ज्ञानमय
इत युक्त, पीड़ित आनंदित, पीड़ित, लज्जित, पुलकित
इमा भाव महिमा (महत्), गरिमा (गुरु)
दार (फ़ारसी) वाला दुकानदार, ईमानदार, समझदार
गर, गार (फ़ारसी) करने वाला कारीगर, जादूगर, मददगार, यादगार
खोर (फ़ारसी) खाने वाला रिश्वतखोर, चुगलखोर
मंद (फ़ारसी) वाला अक्लमंद, दौलतमंद, ज़रूरतमंद
नाक (फ़ारसी) युक्त दर्दनाक, ख़तरनाक, शर्मनाक
ची (तुर्की) काम करने वाला तोपची, खज़ांची
आना (फ़ारसी) संबंधी रोज़ाना, सालाना, मर्दाना

रुकिए और सोचिए: "पढ़ाई" और "भलाई" दोनों में प्रत्यय "आई" है। क्या दोनों एक ही प्रकार के प्रत्यय हैं?

उत्तर जाँचिए: नहीं। पढ़ाई का मूल पढ़ है, जो क्रिया-धातु है, इसलिए आई कृत् प्रत्यय है। भलाई का मूल भला है, जो विशेषण है, इसलिए यहाँ आई तद्धित प्रत्यय है।

भाग 6 — शब्द तोड़ने की विधि

कदम क्या करें उदाहरण: निर्भयता
1. शब्द पढ़ें पूरा शब्द एक बार बोलकर देखें निर्भयता
2. आगे का अंश जाँचें क्या शुरुआत किसी ज्ञात उपसर्ग से होती है? निर् (बिना)
3. पीछे का अंश जाँचें क्या अंत किसी ज्ञात प्रत्यय से होता है? ता (भाव)
4. बचा हुआ मूल देखें बचा हिस्सा सार्थक शब्द होना चाहिए भय, सार्थक
5. वर्ग तय करें मूल क्रिया है तो कृत्, संज्ञा-विशेषण है तो तद्धित भय संज्ञा है, इसलिए तद्धित

नियम यह है कि बचा हुआ मूल हमेशा सार्थक होना चाहिए। "प्रेम" में प्र हटाने पर "एम" कोई अर्थ नहीं रखता, इसलिए प्र यहाँ उपसर्ग नहीं है। "अनार" में अन हटाने पर बचा "आर" शब्द के अर्थ से जुड़ा नहीं है, इसलिए यह स्वयं मूल शब्द है। जहाँ बचा अंश सार्थक न हो, वहाँ उपसर्ग मत मानिए।

भाग 7 — CUET में पूछे जाने वाले प्रश्न-प्रकार

प्रश्न-प्रकार नमूना कैसे हल करें
उपसर्ग पहचानिए "निर्भय" में उपसर्ग आरंभ से तोड़ें: निर् + भय
प्रत्यय पहचानिए "सामाजिक" में प्रत्यय अंत से तोड़ें: समाज + इक
शब्द बनाइए "सु" + "कर्म" का शब्द उपसर्ग + मूल जोड़ें: सुकर्म
उपसर्ग/प्रत्यय-रहित शब्द चार में से वह शब्द जिसमें उपसर्ग नहीं है हर विकल्प का आरंभ जाँचें
कृत् या तद्धित "लिखावट" में कौन-सा प्रत्यय मूल देखें: लिख धातु, इसलिए कृत्
विलोम से जुड़ा "उन्नति" का विलोम उपसर्ग बदलें: अवनति
अर्थ-आधारित "बद" का अर्थ उर्दू-फ़ारसी तालिका से: बुरा

भाग 8 — हल सहित उदाहरण

क्र. प्रश्न उत्तर तर्क
1 प्रहार में उपसर्ग प्र; मूल हार आरंभ का अंश सार्थक मूल से पहले
2 निर्मल में उपसर्ग निर्; मूल मल निर् का अर्थ बिना, यानी मल से रहित
3 सुयोग में उपसर्ग सु; मूल योग सु का अर्थ अच्छा
4 बेरहम में उपसर्ग बे (फ़ारसी); मूल रहम बे का अर्थ बिना
5 अनुशासन में उपसर्ग अनु; मूल शासन अनु का अर्थ पीछे या समान
6 पढ़ाई में प्रत्यय आई; कृत् मूल पढ़ धातु है
7 सुंदरता में प्रत्यय ता; तद्धित मूल सुंदर विशेषण है
8 बचपन में प्रत्यय पन; तद्धित पन का अर्थ अवस्था
9 लेखक में प्रत्यय अक; कृत् लिख धातु से बना, करने वाला
10 धार्मिक में प्रत्यय इक; तद्धित धर्म से संबंधित
11 अपमानित अप + मान + इत उपसर्ग और प्रत्यय दोनों
12 प्रशंसनीय प्र + शंस + अनीय उपसर्ग प्र और कृत् प्रत्यय अनीय
13 दुकानदार दुकान + दार फ़ारसी तद्धित प्रत्यय, वाला
14 कर्तव्य कर् (कृ) + तव्य तव्य कृत् प्रत्यय, जो करना चाहिए
15 निर्भयता निर् + भय + ता उपसर्ग निर्, प्रत्यय ता

भाग 9 — सामान्य भूलें (ट्रैप)

ट्रैप यह क्यों लुभाता है सच्चाई
सुंदर में "सु" को उपसर्ग मानना सु-वाले शब्द कई हैं (सुगम, सुयोग) "सुंदर" एक मूल शब्द है; बचा "ंदर" निरर्थक है
विद्या में "वि" को उपसर्ग मानना विज्ञान, विदेश में वि उपसर्ग है विद्या का मूल धातु विद् है, वि उपसर्ग नहीं। विज्ञान में वि + ज्ञान है
"आई" को हमेशा कृत् मानना पढ़ाई, लड़ाई में कृत् है मूल क्रिया हो तो कृत् (पढ़ाई), विशेषण हो तो तद्धित (भलाई)
अ और अन् को गड़बड़ाना दोनों का अर्थ "नहीं" है अ व्यंजन से पहले (असत्य, अधर्म), अन् स्वर से पहले (अनादि, अनंत)
परलोक को परा-वाला मानना पर और परा मिलते-जुलते हैं पराजय में परा उपसर्ग है; परलोक में पर एक स्वतंत्र शब्द (दूसरा) है
महत्व / महत्त्व में अंतर न देखना उच्चारण में दोनों एक जैसे हैं सही रूप महत्त्व है: महत् + त्व
उपसर्ग-प्रत्यय में अंतर भूलना दोनों जुड़ने वाले अंश हैं आरंभ का अंश उपसर्ग, अंत का अंश प्रत्यय
प्रत्यय के बिना ही शब्द मान लेना शब्द के अंत में आई, इक जैसे अक्षर हैं अंत हटाने पर बचा मूल सार्थक होना चाहिए

भाग 10 — तेज़ अभ्यास (उत्तर सहित)

प्रश्न उत्तर
परिक्रमा में उपसर्ग परि
अध्यक्ष में उपसर्ग अधि (अधि + अक्ष)
प्रत्येक में उपसर्ग प्रति (प्रति + एक)
दुर्गम में उपसर्ग दुर्
निष्फल में उपसर्ग निस् या निः
उद्घाटन में उपसर्ग उत्
बदनाम में उपसर्ग बद
लाचार में उपसर्ग ला
नापसंद में उपसर्ग ना
भरपेट में उपसर्ग भर
थकान में प्रत्यय आन (कृत्)
सजावट में प्रत्यय आवट (कृत्)
गायक में प्रत्यय अक (कृत्)
पठनीय में प्रत्यय अनीय (कृत्)
गुरुत्व में प्रत्यय त्व (तद्धित)
बुढ़ापा में प्रत्यय पा (तद्धित)
रंगीला में प्रत्यय ईला (तद्धित)
धनवान में प्रत्यय वान (तद्धित)
दर्दनाक में प्रत्यय नाक (तद्धित)
भारतीय में प्रत्यय ईय (तद्धित)
"आ" + "जीवन" से बना शब्द आजीवन
"प्र" + "बल" से बना शब्द प्रबल
विजय का विलोम (उपसर्ग बदलकर) पराजय
उन्नति का विलोम (उपसर्ग बदलकर) अवनति

भाग 11 — अभ्यास-योजना और जुड़े पृष्ठ

दिन समय क्या करें
1 20 मिनट संस्कृत के उपसर्ग (भाग 2) अर्थ सहित याद करें; हर एक के दो शब्द लिखें
2 15 मिनट हिंदी और उर्दू-फ़ारसी उपसर्ग (भाग 3) और उनके तीन-तीन शब्द
3 20 मिनट कृत् प्रत्यय (भाग 4): प्रत्येक के साथ धातु भी लिखें
4 20 मिनट तद्धित प्रत्यय (भाग 5): प्रत्येक के साथ मूल संज्ञा या विशेषण लिखें
5 15 मिनट शब्द-परिवार: एक मूल शब्द (जैसे ज्ञान, कर्म) पर जितने शब्द बन सकें, बनाएँ
हर दिन 5 मिनट भाग 10 के 10 प्रश्न, प्रति प्रश्न 15 सेकंड

परीक्षा में हर शब्द पर पहला प्रश्न यही रखिए: बचा हुआ मूल सार्थक है या नहीं? सार्थक न हो तो उपसर्ग या प्रत्यय नहीं माना जा सकता। संदेह वाले शब्द अंत के लिए छोड़ दें, क्योंकि गलत उत्तर पर अंक कटते हैं।

उपसर्ग लगने पर होने वाले ध्वनि-परिवर्तन (निष्फल, अत्यधिक) को संधि के पृष्ठ पर समझिए। उपसर्ग बदलकर बनने वाले उलटे अर्थ वाले शब्दों के लिए विलोम शब्द देखिए। शब्दों के रचना-आधारित वर्गीकरण (रूढ़, यौगिक, योगरूढ़) के लिए शब्द-भेद पढ़िए, और समास में देखिए कि शब्द जोड़ने के दूसरे तरीके में क्या अलग होता है।

एक पंक्ति का सार: उपसर्ग आगे लगकर अर्थ बदलता है, प्रत्यय पीछे लगकर नया शब्द या शब्द-वर्ग बनाता है; मूल खोजो, बचा अंश सार्थक रखो, और मूल क्रिया-धातु हो तो कृत्, संज्ञा-विशेषण हो तो तद्धित कहो।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.

Q1. 'विश्वासी' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है—

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Answer: A

'विश्वासी' = विश्वास + ई। मूल शब्द 'विश्वास' में 'ई' प्रत्यय (गुणवाचक/कर्तृवाचक) लगने से 'विश्वास करने वाला' अर्थ में 'विश्वासी' बना।

Q2. 'चालाक' से 'चालाकी' बनाने में कौन-सा प्रत्यय लगा है?

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Answer: A

'चालाकी' = चालाक + ई। मूल शब्द 'चालाक' में भाववाचक प्रत्यय 'ई' लगने से 'चालाकी' बना।

Q3. 'अधोगति' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है—

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Answer: B

'अधोगति' = अधः + गति। 'अधः' उपसर्ग का अर्थ 'नीचे' है; संधि के कारण 'अधः' का 'अधो' रूप हो जाता है। मूल उपसर्ग 'अधः' है।

Q4. निम्नलिखित में से किस शब्द में 'अ' उपसर्ग का प्रयोग 'अभाव' के अर्थ में हुआ है?

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Answer: A

'अमर' = अ + मर, जहाँ 'अ' उपसर्ग नकार/अभाव दर्शाता है अर्थात 'न मरने वाला'। 'अनुज' में 'अनु', 'अपयश' में 'अप' तथा 'अधिकार' में 'अधि' उपसर्ग है।

Q5. 'समालोचना' शब्द में कौन-से उपसर्ग प्रयुक्त हुए हैं?

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Answer: B

'समालोचना' = सम् + आ + लोचना। इसमें दो उपसर्ग 'सम्' और 'आ' मूल शब्द 'लोचना' से जुड़े हैं।

Q6. 'गवैया' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है—

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Answer: A

'गवैया' = गा (गाना धातु) + ऐया। कर्तृवाचक कृत् प्रत्यय 'ऐया' लगने से 'गाने वाला' अर्थ में 'गवैया' बना।

Q7. 'घबराहट' शब्द में कौन-सा प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?

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Answer: A

'घबराहट' = घबरा (क्रिया) + आहट। भाववाचक कृत् प्रत्यय 'आहट' लगने से 'घबराहट' बना, जैसे चिल्लाहट, मुस्कराहट।

Q8. 'अत्यधिक' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है—

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Answer: A

'अत्यधिक' = अति + अधिक। संधि से 'अति + अ' मिलकर 'अत्य' बना। मूल उपसर्ग 'अति' है जिसका अर्थ 'बहुत/अधिक' है।

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