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Exam Topic CUET Hindi · 102 40 practice MCQs

वचन, लिंग और कारक

वचन, लिंग और कारक is a frequently tested area in CUET Hindi. Work through these free NTA-style sample questions with full answers and explanations, then attempt all 40 in a timed practice test to build exam-day speed.

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एक नज़र में

भाग 1 — तीनों एक साथ क्यों पढ़ें

Written and reviewed by Omveer Thakur, English & Languages faculty at UniDrill (M.A. English, University of Delhi · 9 years teaching). Prepared for the CUET UG Hindi paper.

हिंदी में संज्ञा का वचन और लिंग केवल उसी का रूप नहीं बदलते; वे पूरे वाक्य को साथ बदल देते हैं। "लड़का अच्छा गाता है" में विशेषण "अच्छा" और क्रिया "गाता है" लड़के के अनुसार हैं। संज्ञा बदलकर "लड़की" कर दें तो वाक्य "लड़की अच्छी गाती है" हो जाता है। इसे अन्वय (अनुरूपता) कहते हैं। इसी कारण वचन-लिंग की भूल पूरा वाक्य अशुद्ध कर देती है और वाक्य-शुद्धि के प्रश्नों में सबसे अधिक पकड़ी जाती है।

विषय क्या बताता है विकल्प एक झलक
वचन संख्या एकवचन, बहुवचन लड़का → लड़के
लिंग नर या मादा का भाव पुल्लिंग, स्त्रीलिंग लड़का → लड़की
कारक संज्ञा का क्रिया से संबंध आठ कारक राम ने खाया

रुकिए और सोचिए: "मेरी पुस्तक पानी में गिर गया।" इस वाक्य में क्या गलती है और किसके अनुसार सुधार होगा?

उत्तर जाँचिए: "पुस्तक" स्त्रीलिंग है, इसलिए क्रिया भी स्त्रीलिंग में आएगी: "मेरी पुस्तक पानी में गिर गई।" क्रिया कर्ता के लिंग के अनुसार चलती है।

भाग 2 — वचन: बहुवचन बनाने के नियम

वचन का नियम संज्ञा के अंतिम स्वर पर टिका है। इसलिए पहले शब्द का अंत देखिए, फिर तालिका से नियम चुनिए।

शब्द का अंत नियम एकवचन → बहुवचन
आकारांत पुल्लिंग (हिंदी) आ → ए लड़का → लड़के; घोड़ा → घोड़े; कमरा → कमरे
अन्य पुल्लिंग रूप नहीं बदलता पिता → पिता; राजा → राजा; हाथी → हाथी; कवि → कवि; साधु → साधु
आकारांत स्त्रीलिंग + एँ माता → माताएँ; कन्या → कन्याएँ; लता → लताएँ; कथा → कथाएँ
अकारांत स्त्रीलिंग अंत में एँ जुड़ता है (मात्रा के रूप में ें) बात → बातें; रात → रातें; किताब → किताबें; आँख → आँखें; बहन → बहनें
इकारांत, ईकारांत स्त्रीलिंग ि/ी → ियाँ तिथि → तिथियाँ; नदी → नदियाँ; लड़की → लड़कियाँ; रोटी → रोटियाँ
उकारांत, ऊकारांत स्त्रीलिंग ु/ू → ुएँ वस्तु → वस्तुएँ; बहू → बहुएँ; वधू → वधुएँ; ऋतु → ऋतुएँ

पुल्लिंग शब्द बहुवचन में प्रायः क्यों नहीं बदलते? क्योंकि वाक्य में वचन का संकेत क्रिया और विशेषण भी देते हैं। "राजा आया" और "राजा आए" में केवल क्रिया बदली है, इसलिए संज्ञा को बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि "हाथी", "कवि", "पिता" बिना बदले चलते हैं और "हाथियाँ" जैसा रूप अशुद्ध माना जाता है।

कारक-चिह्न (परसर्ग) लगने पर शब्द के बहुवचन में -ओं आ जाता है, चाहे लिंग कोई भी हो: लड़कों ने, लड़कियों को, किताबों में, हाथियों से, कवियों का।

कुछ विशेष स्थितियाँ भी ध्यान में रखिए।

स्थिति उदाहरण
सदा बहुवचन में चलने वाले शब्द प्राण, आँसू, दर्शन, हस्ताक्षर, केश, लोग
द्रव्यवाचक और भाववाचक संज्ञाएँ प्रायः एकवचन दूध, सोना, प्रेम, ईमानदारी
आदर के लिए एक व्यक्ति पर भी बहुवचन पिताजी आए हैं; गुरुजी पढ़ा रहे हैं; आप कहाँ रहते हैं
सर्वनाम के बहुवचन रूप मैं → हम; तू → तुम; यह → ये; वह → वे

भाग 3 — लिंग: प्राणियों में लिंग-परिवर्तन

हिंदी में दो ही लिंग हैं, नपुंसकलिंग नहीं। प्राणिवाचक शब्दों में लिंग अर्थ से पहचाना जाता है, इसलिए स्त्रीलिंग बनाने के नियम सीख लेने पर अधिकतर प्रश्न हल हो जाते हैं।

पुल्लिंग का अंत स्त्रीलिंग का अंत उदाहरण
-आ -ई लड़का → लड़की; घोड़ा → घोड़ी; बेटा → बेटी; चाचा → चाची; नाना → नानी; बकरा → बकरी
-ई (पेशेवर) -इन माली → मालिन; धोबी → धोबिन; नाई → नाइन; तेली → तेलिन
-अक -इका लेखक → लेखिका; शिक्षक → शिक्षिका; नायक → नायिका; गायक → गायिका; बालक → बालिका
-वान, -मान -वती, -मती गुणवान → गुणवती; बलवान → बलवती; बुद्धिमान → बुद्धिमती; श्रीमान → श्रीमती
-ता (कर्ता का) -त्री नेता → नेत्री; अभिनेता → अभिनेत्री; कर्ता → कर्त्री; दाता → दात्री
-ई (संस्कृत) -इनी योगी → योगिनी; तपस्वी → तपस्विनी; संन्यासी → संन्यासिनी
-आनी जोड़कर -आनी नौकर → नौकरानी; सेठ → सेठानी; देवर → देवरानी; जेठ → जेठानी
-नी जोड़कर -नी शेर → शेरनी; मोर → मोरनी; ऊँट → ऊँटनी; सिंह → सिंहनी
-आइन जोड़कर -आइन पंडित → पंडिताइन; ठाकुर → ठकुराइन

इन नियमों में न आने वाली जोड़ियाँ अलग से याद रखनी पड़ती हैं, क्योंकि वहाँ पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के शब्द अलग-अलग मूल से बने हैं।

पुल्लिंग स्त्रीलिंग पुल्लिंग स्त्रीलिंग
पिता माता पति पत्नी
भाई बहन पुरुष स्त्री
राजा रानी बैल गाय
सम्राट सम्राज्ञी ससुर सास
विद्वान विदुषी वर वधू
भिक्षु भिक्षुणी कवि कवयित्री
युवा युवती बादशाह बेगम

भाग 4 — निर्जीव वस्तुओं का लिंग

निर्जीव वस्तुओं का लिंग अर्थ से नहीं, परंपरा से तय होता है, पर कुछ प्रत्यय पक्का संकेत देते हैं।

संकेत लिंग उदाहरण
अंत में -ता, -आई, -आहट, -वट, -ति, -इमा स्त्रीलिंग सुंदरता, भलाई, घबराहट, सजावट, शक्ति, महिमा
अंत में -त्व, -पन, -पा, -आव पुल्लिंग महत्त्व, बचपन, बुढ़ापा, बहाव
सभी नदियाँ, भाषाएँ, लिपियाँ, तिथियाँ स्त्रीलिंग गंगा, हिंदी, देवनागरी, पूर्णिमा
पर्वत, महासागर, ग्रह, दिन, धातु (अधिकांश) पुल्लिंग हिमालय, प्रशांत, मंगल, सोमवार, लोहा

जो शब्द इन नियमों में नहीं बैठते, उनके लिए सूची याद करनी पड़ती है।

पुल्लिंग शब्द स्त्रीलिंग शब्द
पानी, दही, घी, तेल, दूध, मक्खन रोटी, दाल, चीनी, चाँदी, बर्फ़, घास
लोहा, सोना, हीरा, मोती पुस्तक, कलम, मेज़, कुर्सी, दीवार
देश, पर्वत, सागर, आकाश, बादल आत्मा, मृत्यु, आयु, वस्तु, ऋतु
समाचार, अख़बार, कागज़, पत्र हवा, दवा, रेल, घड़ी, सड़क

प्राणियों में कुछ नाम नित्य पुल्लिंग हैं (कौआ, उल्लू, खटमल, मच्छर, भेड़िया, चीता) और कुछ नित्य स्त्रीलिंग (कोयल, मैना, मक्खी, चींटी, तितली, गिलहरी, छिपकली)। इनके विपरीत लिंग के लिए "नर" या "मादा" पहले जोड़ दिया जाता है: मादा भेड़िया, नर कोयल।

पाठ्यपुस्तक से आगे। परीक्षा के लिए: ईकारांत शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं, पर पानी, दही, घी, मोती, हाथी पुल्लिंग हैं; इसलिए इन अपवादों को अलग सूची में रखकर पढ़िए। वास्तव में: कुछ शब्दों का लिंग क्षेत्र और प्रयोग के अनुसार बदलता भी दिखता है, पर मानक व्याकरण में वही लिंग मान्य है जो परीक्षा में चलता है, इसलिए सूची वाले रूप ही लिखिए।

भाग 5 — आठ कारक: चिह्न, प्रश्न और उदाहरण

कारक संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया (या दूसरे शब्द) से संबंध बताता है। उस संबंध को दिखाने वाले चिह्नों को विभक्ति या परसर्ग कहते हैं।

कारक विभक्ति चिह्न प्रश्न उदाहरण
कर्ता प्रथमा ने (या कोई चिह्न नहीं) कौन? किसने? राम ने पत्र लिखा
कर्म द्वितीया को (या कोई चिह्न नहीं) किसे? क्या? राम ने रावण को मारा
करण तृतीया से, के द्वारा किससे? किस साधन से? वह कलम से लिखता है
संप्रदान चतुर्थी को, के लिए किसके लिए? माँ बच्चे के लिए दूध लाई
अपादान पंचमी से (अलग होना) किससे अलग? पेड़ से पत्ता गिरा
संबंध षष्ठी का, के, की; रा, रे, री किसका? यह राम का घर है
अधिकरण सप्तमी में, पर कहाँ? किसमें? कब? मेज़ पर किताब है
संबोधन संबोधन हे, अरे, ओ (पुकारना) हे ईश्वर! रक्षा करो

संबंध और संबोधन को संस्कृत-परंपरा में शुद्ध कारक नहीं माना जाता, क्योंकि वे क्रिया से सीधे नहीं जुड़ते; पर हिंदी की स्कूली और परीक्षा-परंपरा में आठों कारक गिने जाते हैं।

भाग 6 — कर्ता कारक और "ने" का नियम

"ने" चिह्न हर वाक्य में नहीं आता। इसका नियम सीधा है: ने तभी लगता है जब क्रिया सकर्मक हो और भूतकाल में हो।

स्थिति "ने" आएगा? उदाहरण
सकर्मक क्रिया, भूतकाल हाँ राम ने खाना खाया
सकर्मक क्रिया, वर्तमान या भविष्य नहीं राम खाना खाता है; राम खाना खाएगा
अकर्मक क्रिया, भूतकाल नहीं राम गया; बच्चा हँसा
बोलना, भूलना, बकना, लाना (भूतकाल में) नहीं वह झूठ बोला; मैं किताब भूल गया
छींकना, खाँसना, थूकना (अकर्मक पर) हाँ उसने छींका; उसने खाँसा

क्रिया किसके अनुसार चलेगी? "ने" वाले वाक्यों में क्रिया कर्ता के नहीं, कर्म के लिंग-वचन के अनुसार चलती है, बशर्ते कर्म के साथ "को" न हो।

वाक्य क्रिया किसके अनुसार क्रिया का रूप
राम ने रोटी खाई कर्म "रोटी" (स्त्रीलिंग, एकवचन) खाई
राम ने रोटियाँ खाईं कर्म "रोटियाँ" (स्त्रीलिंग, बहुवचन) खाईं
राम ने फल खाया कर्म "फल" (पुल्लिंग, एकवचन) खाया
सीता ने राम को देखा कर्म के साथ "को" है देखा (पुल्लिंग एकवचन, सामान्य रूप)
सीता गई (ने नहीं) कर्ता "सीता" गई

इसका ऐतिहासिक कारण यह है कि भूतकाल के सकर्मक वाक्य मूलतः कर्म को प्रमुख मानकर बने थे। इसी से "ने" वाली क्रिया कर्म के साथ चलती है और बिना "ने" वाली क्रिया कर्ता के साथ।

भाग 7 — दो उलझाने वाले चिह्न: को और से

एक ही चिह्न दो कारकों में आता है। इसलिए केवल चिह्न नहीं, उसका अर्थ भी देखना पड़ता है।

चिह्न पहला कारक दूसरा कारक कैसे भेद करें
को कर्म: क्रिया का सीधा फल जिस पर पड़े संप्रदान: जिसे कुछ दिया जाए या जिसके लिए किया जाए देना, बाँटना, दान या "के लिए" का भाव हो तो संप्रदान
से करण: साधन, उपकरण, कारण अपादान: अलगाव, उद्गम, भय, सीखना साधन हो तो करण; अलग होना हो तो अपादान
वाक्य रेखांकित कारक क्यों
राम ने श्याम को बुलाया श्याम को कर्म बुलाने की क्रिया का सीधा फल श्याम पर
पिता ने पुत्र को पुस्तक दी पुत्र को संप्रदान पुस्तक पुत्र को "दी" गई, यानी उसके लिए
वह चाकू से फल काटता है चाकू से करण चाकू साधन है
वह गाँव से आया गाँव से अपादान गाँव से अलग हुआ
बच्चा साँप से डरता है साँप से अपादान डरना, भय का स्रोत
छात्र गुरु से सीखता है गुरु से अपादान सीखने का स्रोत

भाग 8 — संबंध, अधिकरण, संबोधन और सर्वनाम के कारक-रूप

संबंध में का, के, की उस वस्तु के लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं जिसका संबंध बताया जा रहा है, न कि स्वामी के अनुसार।

वाक्य स्वामी वस्तु चिह्न
राम का घर राम घर (पुल्लिंग, एकवचन) का
राम की किताब राम किताब (स्त्रीलिंग) की
राम के घर में राम घर (विभक्ति के साथ, पुल्लिंग) के
सीता का भाई सीता (स्त्री) भाई (पुल्लिंग) का

अधिकरण आधार, स्थान या समय बताता है: "में" भीतर (जल में मछली), "पर" ऊपर (मेज़ पर पुस्तक)। संबोधन में किसी को पुकारा जाता है: "हे राम!", "ओ भाई!", और बहुवचन में "बच्चो, सुनो" (अनुनासिक के बिना)।

सर्वनाम कारक लगने पर अपना रूप बदल लेते हैं। यह परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।

सर्वनाम ने को से का
मैं मैंने मुझे मुझसे मेरा
हम हमने हमें हमसे हमारा
तुम तुमने तुम्हें तुमसे तुम्हारा
वह उसने उसे उससे उसका
वे उन्होंने उन्हें उनसे उनका
यह इसने इसे इससे इसका
ये इन्होंने इन्हें इनसे इनका
कौन किसने किसे किससे किसका

भाग 9 — कारक पहचानने की विधि

हर वाक्य में चार कदम चलिए। यह विधि "से" और "को" वाले कठिन प्रश्नों में भी काम करती है।

कदम क्या करें उदाहरण: वह चाकू से फल काटता है
1. क्रिया खोजें वाक्य की क्रिया पहचानें काटता है
2. चिह्न देखें रेखांकित शब्द के साथ कौन-सा चिह्न है से
3. क्रिया से प्रश्न पूछें किससे काटता है? उत्तर: चाकू से, यानी साधन
4. अर्थ से तय करें साधन है, अलगाव नहीं करण

यदि रेखांकित शब्द के साथ कोई चिह्न न हो, तो भी कारक हो सकता है। "राम खाना खाता है" में "राम" कर्ता है (कौन खाता है?) और "खाना" कर्म है (क्या खाता है?), जबकि दोनों के साथ कोई चिह्न नहीं है।

भाग 10 — CUET में पूछे जाने वाले प्रश्न-प्रकार

प्रश्न-प्रकार नमूना कैसे हल करें
कारक पहचानिए "पेड़ से पत्ता गिरा" में कारक अलगाव, इसलिए अपादान
सही चिह्न चुनिए "वह कलम __ लिखता है" साधन, इसलिए "से"
बहुवचन बनाइए "तिथि" का बहुवचन इकारांत स्त्रीलिंग, इसलिए तिथियाँ
स्त्रीलिंग बनाइए "नेता" का स्त्रीलिंग -ता → -त्री, इसलिए नेत्री
लिंग पहचानिए निम्न में पुल्लिंग शब्द सूची और प्रत्यय-संकेत से
वाक्य शुद्धि "राम ने रोटी खाया" कर्म "रोटी" स्त्रीलिंग, इसलिए खाई
कथन-आधारित "ने भूतकाल में सकर्मक के साथ आता है" ठीक; अपवाद बोलना, भूलना, बकना, लाना

भाग 11 — हल सहित उदाहरण

क्र. प्रश्न उत्तर तर्क
1 लड़का का बहुवचन लड़के आकारांत पुल्लिंग: आ → ए
2 नदी का बहुवचन नदियाँ ईकारांत स्त्रीलिंग: ियाँ
3 बहू का बहुवचन बहुएँ ऊकारांत स्त्रीलिंग: ू → ुएँ
4 कथा का बहुवचन कथाएँ आकारांत स्त्रीलिंग: + एँ
5 किताब का बहुवचन किताबें अकारांत स्त्रीलिंग: + ें
6 शिक्षक का स्त्रीलिंग शिक्षिका -अक → -इका
7 नेता का स्त्रीलिंग नेत्री -ता → -त्री
8 माली का स्त्रीलिंग मालिन पेशेवर -ई → -इन
9 राम ने पत्र लिखा। रेखांकित: राम ने कर्ता कारक सकर्मक क्रिया, भूतकाल, चिह्न "ने"
10 माँ ने बच्चे को सुलाया। रेखांकित: बच्चे को कर्म कारक सुलाने का फल बच्चे पर
11 पिता ने बेटे को घड़ी दी। रेखांकित: बेटे को संप्रदान कारक देने का भाव
12 वह चाकू से फल काटता है। रेखांकित: चाकू से करण कारक साधन
13 गंगा हिमालय से निकलती है। रेखांकित: हिमालय से अपादान कारक उद्गम, अलग होना
14 बच्चे बगीचे में खेल रहे हैं। रेखांकित: बगीचे में अधिकरण कारक स्थान
15 मैंने किताब पढ़ा। शुद्ध करें मैंने किताब पढ़ी "ने" वाले वाक्य में क्रिया कर्म "किताब" (स्त्रीलिंग) के अनुसार

भाग 12 — सामान्य भूलें (ट्रैप)

ट्रैप यह क्यों लुभाता है सच्चाई
करण और अपादान का "से" चिह्न एक ही है साधन हो तो करण (चाकू से), अलगाव या स्रोत हो तो अपादान (घर से, साँप से डरना)
कर्म और संप्रदान का "को" चिह्न एक ही है क्रिया का सीधा फल हो तो कर्म, "देना" या "के लिए" का भाव हो तो संप्रदान
वर्तमान या भविष्य में "ने" लगाना भूतकाल का नियम याद रहता है "ने" केवल भूतकाल में; "वह खाना खाता है" में ने नहीं
बोलना, भूलना, बकना, लाना में "ने" ये क्रियाएँ सकर्मक हैं ये अपवाद हैं: वह झूठ बोला, मैं किताब भूल गया
"ने" वाले वाक्य में क्रिया कर्ता के अनुसार लगाना बिना "ने" वाले वाक्य में यही नियम है "ने" हो तो क्रिया कर्म के अनुसार (राम ने रोटी खाई)
का, के, की स्वामी के अनुसार चुनना "सीता" स्त्री है तो "की" लगता है वस्तु का लिंग देखिए: सीता का भाई, सीता की बहन
हाथी जैसे पुल्लिंग का बहुवचन "हाथियाँ" लिखना ईकारांत में "ियाँ" का नियम याद रहता है वह नियम स्त्रीलिंग का है; पुल्लिंग हाथी, माली का रूप नहीं बदलता
पानी, दही, आत्मा, चाँदी का लिंग अनुमान से तय करना अंत देखकर अनुमान लगाना आसान लगता है पानी, दही पुल्लिंग; आत्मा, चाँदी स्त्रीलिंग; सूची याद रखनी होगी

भाग 13 — तेज़ अभ्यास (उत्तर सहित)

प्रश्न उत्तर
कवि का बहुवचन कवि
घोड़ा का बहुवचन घोड़े
वस्तु का बहुवचन वस्तुएँ
रात का बहुवचन रातें
माता का बहुवचन माताएँ
लड़की का बहुवचन लड़कियाँ
बालक का स्त्रीलिंग बालिका
बुद्धिमान का स्त्रीलिंग बुद्धिमती
नौकर का स्त्रीलिंग नौकरानी
शेर का स्त्रीलिंग शेरनी
पुत्र का स्त्रीलिंग पुत्री
सम्राट का स्त्रीलिंग सम्राज्ञी
दही का लिंग पुल्लिंग
आत्मा का लिंग स्त्रीलिंग
समाचार का लिंग पुल्लिंग
चाँदी का लिंग स्त्रीलिंग
"तुलसी ने रामचरितमानस लिखा" में कारक कर्ता
"राम ने रावण को मारा" में रावण को कर्म
"भिखारी को दान दो" में भिखारी को संप्रदान
"रमेश के लिए पुस्तक लाओ" में रमेश के लिए संप्रदान
"छत से गिरा" में छत से अपादान
"आँखों से देखा" में आँखों से करण
"मेज़ पर पुस्तक है" में मेज़ पर अधिकरण
"वह" का "ने" वाला रूप उसने

भाग 14 — अभ्यास-योजना और जुड़े पृष्ठ

दिन समय क्या करें
1 20 मिनट वचन के छह नियम (भाग 2) बिना देखे लिखें; हर नियम के चार शब्द बनाएँ
2 20 मिनट स्त्रीलिंग बनाने के नियम (भाग 3); अलग जोड़ियाँ याद करें
3 20 मिनट निर्जीव वस्तुओं की सूची (भाग 4) और प्रत्यय-संकेत
4 25 मिनट आठ कारक, चिह्न और प्रश्न (भाग 5); हर कारक का एक वाक्य
5 20 मिनट "ने" के नियम और क्रिया-अन्वय (भाग 6); 10 वाक्यों की शुद्धि
6 20 मिनट "को" और "से" वाले वाक्यों की जाँच (भाग 7); 15 वाक्य
हर दिन 5 मिनट भाग 13 के 10 प्रश्न, प्रति प्रश्न 15 सेकंड

परीक्षा में समय-सीमा के भीतर कारक के प्रश्न हल करते समय सबसे पहले क्रिया खोजिए और फिर उससे प्रश्न पूछिए। जिस वाक्य में "से" या "को" दो अर्थों में खिंचे, उसे अंत के लिए छोड़ दें और पहले साफ़ वाक्य हल करें।

सर्वनाम और विशेषण के भेद शब्द-भेद में हैं, और लिंग-वचन-कारक की भूलों को वाक्य में पकड़ना वाक्य शुद्धि और वर्तनी में सिखाया गया है। तत्पुरुष समास के उपभेद इन्हीं कारकों पर टिके हैं, इसलिए समास पढ़ते समय इस पृष्ठ की तालिका साथ रखिए। पुल्लिंग-स्त्रीलिंग जोड़ियों में तत्सम रूप उपसर्ग और प्रत्यय के पृष्ठ से भी जुड़ते हैं।

एक पंक्ति का सार: वचन और लिंग संज्ञा के अंत से बदलते हैं और क्रिया-विशेषण को साथ बदलते हैं; कारक पहचानने के लिए क्रिया से प्रश्न पूछो, "से" में साधन और अलगाव तथा "को" में फल और देने का भेद करो, और "ने" केवल भूतकाल की सकर्मक क्रिया में आता है।

Practice questions

Now test yourself. 8 free sample questions with explanations. 32 more in the timed practice test.

Q1. 'राजा' शब्द का बहुवचन रूप 'घोड़ा>घोड़े' वाले नियम से नहीं बनता। इसका सही बहुवचन क्या है?

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Answer: A

संबंधवाचक/उपाधिवाचक आकारांत पुल्लिंग शब्द जैसे 'राजा', 'पिता', 'चाचा', 'नेता' बहुवचन में अपरिवर्तित रहते हैं — 'पाँच राजा आए'। इन पर आकारांत >'ए' नियम लागू नहीं होता।

Q2. 'कुत्ता' का स्त्रीलिंग रूप क्या है?

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Answer: C

'कुत्ता' का रूढ़ स्त्रीलिंग रूप 'कुतिया' है, जैसे बंदर>बंदरिया प्रकार के 'इया' प्रत्यय से बनता है। शेष रूप व्यवहार में अमान्य हैं।

Q3. 'हे ईश्वर! मेरी रक्षा करो।' इस वाक्य में 'हे ईश्वर!' किस कारक का उदाहरण है?

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Answer: B

किसी को पुकारने या संबोधित करने पर संबोधन कारक होता है, चिह्न 'हे/अरे/ओ!'। 'हे ईश्वर!' पुकार है, अतः संबोधन कारक।

Q4. 'विद्यालय से छुट्टी हो गई।' इस वाक्य में 'विद्यालय से' किस कारक का उदाहरण है?

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Answer: D

यहाँ 'से' अलगाव/निकलने का भाव दर्शाता है — छुट्टी विद्यालय से प्रारंभ होकर अलग होने का बोध कराती है, अतः अपादान कारक। करण कारक में 'से' साधन का बोधक होता है, जो यहाँ नहीं है।

Q5. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द सदैव एकवचन में ही प्रयुक्त होता है?

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Answer: B

समूहवाचक संज्ञाएँ जैसे 'जनता', 'सेना', 'भीड़', 'सोना', 'जल' सदा एकवचन में प्रयुक्त होती हैं — 'जनता आई', न कि 'जनताएँ'। शेष शब्दों के स्पष्ट बहुवचन रूप बनते हैं।

Q6. 'साधु' शब्द का शुद्ध बहुवचन रूप कौन-सा है?

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Answer: B

उकारांत पुल्लिंग 'साधु' अपरिवर्तित रहता है या 'गण/जन' जोड़कर बहुवचन बनता है — साधुगण, साधुजन। 'साधुएँ' स्त्रीलिंग नियम है जो यहाँ लागू नहीं होता।

Q7. 'बहू' शब्द का सही बहुवचन रूप क्या होगा?

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Answer: B

ऊकारांत स्त्रीलिंग 'बहू' में अंतिम 'ऊ' ह्रस्व होकर 'एँ' जुड़ता है — बहू>बहुएँ। 'बहुओं' तिर्यक/कारक रूप है, कर्ता बहुवचन नहीं।

Q8. 'गुरु जी ने शिष्य को पुस्तक दी।' इस वाक्य में 'शिष्य को' किस कारक का उदाहरण है?

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Answer: A

जिसके लिए या जिसे कुछ दिया जाए, वह संप्रदान कारक होता है, चिह्न 'को/के लिए'। यहाँ पुस्तक देने का लाभ 'शिष्य' को मिल रहा है, अतः संप्रदान कारक।

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